फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Catastrophe in Uttarakhand: Nature wreaked havoc, but Chamoli survived from great ruin

उत्तराखंड में तबाही: कुदरत का कहर तो बरपा मगर बड़ी बर्बादी से ऐसे बच गई देवभूमि

Sun, 07 Feb 2021 05:55 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चमोली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चमोली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 07 Feb 2021 05:55 PM IST
विज्ञापन
Catastrophe in Uttarakhand: Nature wreaked havoc, but Chamoli survived from great ruin
उत्तराखंड के चमोली जिले में कुदरती कहर बरपा - फोटो : Amar Ujala

रविवार सुबह देवभूमि उत्तराखंड पर एक बार पुन: कुदरती कहर बरपा। जैसे ही राज्य के चमोली जिले के रैनी में ग्लेशियर फटने की खबर मिली तो सात साल पहले 2013 के केदारनाथ में आई प्रलयंकारी बाढ़ व भीषण तबाही का मंजर आंखों में तैरने लगा। आरंभिक कुछ घंटों में जानमाल की भारी नुकसान का अंदेशा जताया गया, लेकिन शुक्र रहा कि तबाही तो हुई मगर केदारनाथ जैसी नहीं। ग्लेशियर टूटने के तत्काल बाद किए गए इंतजामों व राहत व बचाव कार्यों ने भारी तबाही से बचाने में जान झोंक दी। राज्य से लेकर केंद्र तक की आपदा मशीनरी सक्रिय होने और दिन का वक्त होने से तबाही के असर को कम करने में कामयाबी मिली।  

विज्ञापन


दरअसल कुदरती कहर सुबह के वक्त बरपा, जोर की आवाज के साथ हिमखंड टूटा और धौली गंगा नदी में समा गया। इससे नदी में बाढ़ आई और पानी व मलबे के साथ यह बहता हुआ क्षेत्र के तपोवन बांध तक पहुंचा। बाढ़ से बांध ध्वस्त हो गया। यहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। सबसे ज्यादा जनहानि यहीं होने की खबर है। 
विज्ञापन


इन उपायों से मिली बड़ी राहत
1.
हिमखंड टूटने व धौली गंगा नदी में बाढ़ का घटनाक्रम सुबह के वक्त हुआ। इससे तत्काल जंगल में आग की तरह सूचना फैली। तमाम संचार माध्यमों व अन्य तरीकों से आसपास गांवों से लेकर शहरों तक व गंगा किनारे के राज्यों व शहरों तक को आगाह कर दिया गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

2. चमोली में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना को झील को खाली कराया गया, ताकि यदि अलकनंदा का जल स्तर बढ़े अतिरिक्त पानी छोड़ने में दिक्कत न हो।
3. श्रीनगर में प्रशासन ने नदी किनारे बस्तियों में रह रहे लोगों से सुरक्षित स्थानों को वहां से तुरंत हटाया गया। नदी में काम कर रहे मजदूरों को भी हटाया जा रहा है।
4. टिहरी गढ़वाल की नदियों में पानी ज्यादा बढ़ा हुआ है। 
5. राज्य आपदा राहत बल के साथ केंद्र की ओर से राष्ट्रीय आपदा राहत बल, पुलिस व अन्य बलों ने तत्काल राहत व बचाव कार्य शुरू किए। 
6. मौसम साफ होने का भी राहत व बचाव कार्यों में फायदा मिला।
7. सुबह ग्लेशियर फटने के बाद शाम तक बचाव व राहत कार्य निरंतर जारी रहा। करीब 150 लापता मजदूरों की खोजबीन जारी रही। शाम तक 10 शव निकाले जा चुके थे। 

देहरादून से लेकर दिल्ली तक दिखी सक्रियता

8. चमोली में हिमखंड टूटने से तबाही के अंदेश के तत्काल बाद उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक जबर्दस्त सक्रियता नजर आई।
9. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से चर्चा कर राहत व बचाव में कोई कसर न छोड़ने का निर्देश दिया। 
10. मुख्यमंत्री रावत स्वयं मौके के लिए रवाना हुए। गृह मंत्री शाह ने केंद्र से पूरी मदद भेजी और स्वयं वहां जाकर हालचाल जानने का निर्णय किया। 
11. सारा प्रशासनिक तंत्र एकजुट होकर राहत व बचाव कार्यों में जुटा। गंगा किनारे के राज्यों यानी उप्र से लेकर बिहार तक अलर्ट जारी किया गया, ताकि संभावित बाढ़ के खतरे से निपटा जा सके। 

 

उत्तराखंड में पिछले 30 सालों में आईं बड़ी प्राकृतिक आपदाएं 

वर्ष 1991 उत्तरकाशी भूकंप: अविभाजित उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 1991 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया। इस आपदा में कम से कम 768 लोगों की मौत हुई और हजारों घर तबाह हो गए।

वर्ष 1998 माल्पा भूस्खलन: पिथौरागढ़ जिले का छोटा सा गांव माल्पा भूस्खलन के चलते बर्बाद हुआ। इस हादसे में 55 कैलाश मानसरोवर श्रद्धालुओं समेत करीब 255 लोगों की मौत हुई। भूस्खलन से गिरे मलबे के चलते शारदा नदी बाधित हो गई थी।

वर्ष 1999 चमोली भूकंप: चमोली जिले में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप ने 100 से अधिक लोगों की जान ले ली। पड़ोसी जिले रुद्रप्रयाग में भारी नुकसान हुआ था। भूकंप के चलते सड़कों एवं जमीन में दरारें आ गई थीं।

वर्ष 2013 केदारनाथ बाढ़: जून में एक ही दिन में बादल फटने की कई घटनाओं के चलते भारी बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं थीं। राज्य सरकार के आकलन के मुताबिक, माना जाता है कि 5,700 से अधिक लोग इस आपदा में जान गंवा बैठे थे। सड़कों एवं पुलों के ध्वस्त हो जाने के कारण चार धाम को जाने वाली घाटियों में देशभर के तीन लाख से अधिक लोग फंस गए थे।

अमित शाह ने तबाही पर लिया फास्ट एक्शन

उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिलते ही केंद्रीय गृह मंत्रालय सक्रिय हो गया था। घटना की भयावह स्थिति के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने हादसे की सूचना मिलने के 30 मिनट के भीतर एयरफोर्स, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के साथ समन्वय स्थापित कर राहत एवं बचाव टीमें चमोली के लिए रवाना कर दी थी।

उन्होंने सबसे पहले आईटीबीपी अधिकारियों से घटना के बारे में बातचीत की थी। आईटीबीपी के जवान ही सबसे पहले घटना स्थल पर पहुंचे थे। अमित शाह का कहना था कि मोदी सरकार इस संकट की घड़ी में उत्तराखंड के लोगों के साथ खड़ी है। 

गृह राज्यमंत्री राय को एनडीआरएफ के कंट्रोल रूम भेजा

बता दें कि रविवार सुबह साढ़े दस बजे जैसे ही यह सूचना आई कि उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के कारण भारी तबाही मच गई तो केंद्रीय गृह मंत्री सक्रिय हो गए थे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय को एनडीआरएफ के कंट्रोल रुम में बैठने के लिए कहा। राय ने बिना कोई देरी किए मंत्रालय के कंट्रोल रुम की कमान संभाल ली। वहां पर एनडीआरएफ और दूसरे सुरक्षा बलों के अधिकारी भी मौजूद थे।

अमित शाह ने सबसे पहले आईटीबीपी के अफसरों से फोन पर बातचीत की। चूंकि जोशीमठ में आईटीबीपी के जवानों की बड़ी संख्या है, इसलिए उन्हें तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना कर दिया गया।उसके बाद दिल्ली से और दूसरी जगहों से भी जवानों को वहां भेजा गया है। शाह ने इसके बाद उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत के साथ बातचीत की है। उन्होंने घटना की विस्तृत जानकारी दी। उसी समय उन्होंने एनडीआरएफ की टीमों को लेकर अफसरों से फोन पर बातचीत की। इसमें सामने आया कि दूसरे सेंटरों से एनडीआरएफ के जवानों को एयरलिफ्ट कर चमोली तक पहुंचाना होगा। शाह ने तुरंत एयरफोर्स से संपर्क कर हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया कराई। शाह ने कहा, वे लगातार इस मामले पर नजर रख रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed