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Chamoli News: देवाल के वाण गांव की भागीरथी ने जीती अपोलो न्यू मैराथन
Sun, 23 Feb 2025 07:03 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sun, 23 Feb 2025 07:03 PM IST
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वाण गांव की भागीरथी।
फोटो
2 घंटे 48 मिनट 59 सेकेंड में पूरी की 42 किमी दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। दिल्ली के नेहरू स्टेडियम से आयोजित अपोलो न्यू मैराथन में चमोली जिले के देवाल ब्लाॅक के वाण गांव की भागीरथी बिष्ट ने प्रथम स्थान हासिल किया। भागीरथी ने 42 किमी की यह दौड़ 2 घंटे 48 मिनट 59 सेकेंड में पूरी की। भागीरथी की इस कामयाबी से प्रदेश के जिले व क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।
हिमाचल प्रदेश जिला सिरमौर निवासी अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा मैराथन धावक व भागीरथी के कोच सुनील शर्मा ने बताया कि भागीरथी बिष्ट (23) इससे पूर्व भी कई मैराथन में प्रतिभाग कर प्रथम स्थान हासिल कर चुकी हैं। इन दिनों फ्लाइंग गर्ल अपनी रफ्तार से दुनिया के फलक पर चमक बिखेरने के लिए पौड़ी जिला स्थित रांसी स्टेडियम में कड़ी मेहनत कर रही हैं। भागीरथी ने संघर्ष और संसाधनों के अभाव में दौड़ की शुरुआत की थी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता की असमय मृत्यु हो गई थी। बताया कि वह पढ़ाई के साथ घर के काम में हाथ बंटाती थी और खेतों में हल भी लगाती थी। बताया कि इस चैंपियनशिप को जीतने के बाद भागीरथी की आगामी एशियन गेम्स में क्वालीफाई होने की राह भी आसान हो गई है।
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2 घंटे 48 मिनट 59 सेकेंड में पूरी की 42 किमी दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। दिल्ली के नेहरू स्टेडियम से आयोजित अपोलो न्यू मैराथन में चमोली जिले के देवाल ब्लाॅक के वाण गांव की भागीरथी बिष्ट ने प्रथम स्थान हासिल किया। भागीरथी ने 42 किमी की यह दौड़ 2 घंटे 48 मिनट 59 सेकेंड में पूरी की। भागीरथी की इस कामयाबी से प्रदेश के जिले व क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।
हिमाचल प्रदेश जिला सिरमौर निवासी अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा मैराथन धावक व भागीरथी के कोच सुनील शर्मा ने बताया कि भागीरथी बिष्ट (23) इससे पूर्व भी कई मैराथन में प्रतिभाग कर प्रथम स्थान हासिल कर चुकी हैं। इन दिनों फ्लाइंग गर्ल अपनी रफ्तार से दुनिया के फलक पर चमक बिखेरने के लिए पौड़ी जिला स्थित रांसी स्टेडियम में कड़ी मेहनत कर रही हैं। भागीरथी ने संघर्ष और संसाधनों के अभाव में दौड़ की शुरुआत की थी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता की असमय मृत्यु हो गई थी। बताया कि वह पढ़ाई के साथ घर के काम में हाथ बंटाती थी और खेतों में हल भी लगाती थी। बताया कि इस चैंपियनशिप को जीतने के बाद भागीरथी की आगामी एशियन गेम्स में क्वालीफाई होने की राह भी आसान हो गई है।
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