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देश के विकास के लिए बालिका शिक्षा बेहद जरुरी
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गोपेश्वर। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत गोपेश्वर के पीजी कॉलेज के बीएड संकाय में ‘उच्च शिक्षा में बालिकाओं की सहभागिता’ विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान बालिकाओं ने देश के विकास के लिए बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया। कहा गया कि बालिका शिक्षित होगी तो वह हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा सकेगी।
संकाय परिसर में आयोजित गोष्ठी में अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डा. डीएस नेगी ने कहा कि पीजी कॉलेज में वर्तमान में 65 फीसदी बालिकाएं हैं। अकेले बीएड संकाय में 70 फीसदी छात्राएं हैं। ये सभी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। कैंपस में खेल, सांस्कृतिक और अन्य प्रतियोगिताओं में छात्राएं आगे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में पहाड़ के गांवों में बेटियों को स्कूल भेजने के बजाय घर के काम में लगा दिया जाता था। लोगों में यह भ्रांति थी कि बेटी को पढ़ा लिखाकर क्या करना है। एक दिन शादी होकर उसे दूसरे के घर जाना है। अब यह भ्रांति टूट रही है। जागरूकता के कारण पहाड़ में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी अब बेटियों की पढ़ाई पर विशेष जोर दे रहे हैं। इससे बालिकाओं में आगे बढ़ने की ललक बढ़ रही है।
बीएड की प्राध्यापक ममता असवाल ने कहा कि पहाड़ के कई हिस्सों में आज भी बालिका शिक्षा पर लोग चुप्पी साधे रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में अपराजिता जैसे कार्यक्रमों के आयोजन की जरूरत है। आज सरकार की ओर से कमजोर और आरक्षित वर्ग की छात्राओं की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति के रूप में मदद दी जा रही है। ऐसे में बालिकाओं को बेहतर उच्च शिक्षा देनी चाहिए। इस मौके पर डा. सुशील बहुगुणा, डा. एसी कुकरेती, डा. आरके यादव, डा. अखिल चमोली, डा. सरिता पंवार, दीपा, रीना, चांदनी, तुलसी, श्वेता, अरुणा, करिश्मा, प्रीति, किरण, रुचि आदि मौजूद थे।
संकाय परिसर में आयोजित गोष्ठी में अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डा. डीएस नेगी ने कहा कि पीजी कॉलेज में वर्तमान में 65 फीसदी बालिकाएं हैं। अकेले बीएड संकाय में 70 फीसदी छात्राएं हैं। ये सभी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। कैंपस में खेल, सांस्कृतिक और अन्य प्रतियोगिताओं में छात्राएं आगे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में पहाड़ के गांवों में बेटियों को स्कूल भेजने के बजाय घर के काम में लगा दिया जाता था। लोगों में यह भ्रांति थी कि बेटी को पढ़ा लिखाकर क्या करना है। एक दिन शादी होकर उसे दूसरे के घर जाना है। अब यह भ्रांति टूट रही है। जागरूकता के कारण पहाड़ में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी अब बेटियों की पढ़ाई पर विशेष जोर दे रहे हैं। इससे बालिकाओं में आगे बढ़ने की ललक बढ़ रही है।
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बीएड की प्राध्यापक ममता असवाल ने कहा कि पहाड़ के कई हिस्सों में आज भी बालिका शिक्षा पर लोग चुप्पी साधे रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में अपराजिता जैसे कार्यक्रमों के आयोजन की जरूरत है। आज सरकार की ओर से कमजोर और आरक्षित वर्ग की छात्राओं की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति के रूप में मदद दी जा रही है। ऐसे में बालिकाओं को बेहतर उच्च शिक्षा देनी चाहिए। इस मौके पर डा. सुशील बहुगुणा, डा. एसी कुकरेती, डा. आरके यादव, डा. अखिल चमोली, डा. सरिता पंवार, दीपा, रीना, चांदनी, तुलसी, श्वेता, अरुणा, करिश्मा, प्रीति, किरण, रुचि आदि मौजूद थे।
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