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स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड के सेनानियों का रहा अहम योगदान : प्रो. पाठक
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बागेश्वर डायट में हुई गोष्ठी में बोलते वक्ता। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में ‘उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम की झलक’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रोफेसर शेखर पाठक ने आजादी की लड़ाई में प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने महात्मा गांधी की बागेश्वर यात्रा, कुली बेगार आंदोलन पर भी विचार रखे।
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत कौसानी से बागेश्वर तक हुई गांधी रीविजिटिंग यात्रा कार्यक्रम के अंतिम दिवस डायट में गोष्ठी का आयोजन किया गया। डीएलएड प्रशिक्षुओं ने कुली बेगार गीत और राज्य गीत गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य वक्ता प्रो. पाठक ने 1815 में हुई सिंगोली की संधि से देश की आजादी तक के स्वतंत्रता संग्राम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कुली बेगार प्रथा को स्वतंत्रता संग्राम के दौर की प्रमुख समस्या बताया। वहीं, बंदोबस्ती व्यवस्था, पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात साधनों का अभाव आदि पर चर्चा की। उन्होंने अल्मोड़ा में डिबेटिंग क्लब की स्थापना, शक्ति अखबार के प्रकाशन का आजादी की लड़ाई में योगदान पर रोशनी डाली। कुली बेगार आंदोलन को आजादी की लड़ाई की प्रमुख घटना बताया। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रदेश के कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जानकारी दी।
गांधीवादी विचारक और साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने कहा कि कुली बेगार आंदोलन आजादी की लड़ाई में काफी अहम रहा। महात्मा गांधी भी इस आंदोलन की सफलता से प्रभावित थे और आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाने स्वयं बागेश्वर आए थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए सीमित साधन थे, कुली बेगार आंदोलन में हजारों की भीड़ का एकत्र होना अचंभित करने वाली बात थी। कार्यक्रम समन्वयक रवि कुमार जोशी ने यात्रा कार्यक्रम के तीन दिनों में हुई प्रमुख बातों पर संक्षेप में प्रकाश डाला। मुख्य शिक्षाधिकारी गजेंद्र सिंह सौन ने इस तरह के आयोजन को युवा पीढ़ी की जानकारी और ज्ञान बढ़ाने के लिए बेहद कारगर बताया। डायट प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र धपोला ने आभार जताया। यहां डीईओ बेसिक पदमेंद्र सकलानी, डॉ. सुरेंद्र धपोला, डॉ. पंकज दुबे, प्रधानाचार्य प्रमोद तेवाड़ी, दीप जोशी, वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, आलोक साह, पंकज पांडेय सहित डायट के सभी शिक्षक प्रशिक्षक और डीएलएड प्रशिक्षु मौजूद रहे।
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आजादी का अमृत महोत्सव के तहत कौसानी से बागेश्वर तक हुई गांधी रीविजिटिंग यात्रा कार्यक्रम के अंतिम दिवस डायट में गोष्ठी का आयोजन किया गया। डीएलएड प्रशिक्षुओं ने कुली बेगार गीत और राज्य गीत गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य वक्ता प्रो. पाठक ने 1815 में हुई सिंगोली की संधि से देश की आजादी तक के स्वतंत्रता संग्राम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कुली बेगार प्रथा को स्वतंत्रता संग्राम के दौर की प्रमुख समस्या बताया। वहीं, बंदोबस्ती व्यवस्था, पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात साधनों का अभाव आदि पर चर्चा की। उन्होंने अल्मोड़ा में डिबेटिंग क्लब की स्थापना, शक्ति अखबार के प्रकाशन का आजादी की लड़ाई में योगदान पर रोशनी डाली। कुली बेगार आंदोलन को आजादी की लड़ाई की प्रमुख घटना बताया। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रदेश के कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जानकारी दी।
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गांधीवादी विचारक और साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने कहा कि कुली बेगार आंदोलन आजादी की लड़ाई में काफी अहम रहा। महात्मा गांधी भी इस आंदोलन की सफलता से प्रभावित थे और आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाने स्वयं बागेश्वर आए थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए सीमित साधन थे, कुली बेगार आंदोलन में हजारों की भीड़ का एकत्र होना अचंभित करने वाली बात थी। कार्यक्रम समन्वयक रवि कुमार जोशी ने यात्रा कार्यक्रम के तीन दिनों में हुई प्रमुख बातों पर संक्षेप में प्रकाश डाला। मुख्य शिक्षाधिकारी गजेंद्र सिंह सौन ने इस तरह के आयोजन को युवा पीढ़ी की जानकारी और ज्ञान बढ़ाने के लिए बेहद कारगर बताया। डायट प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र धपोला ने आभार जताया। यहां डीईओ बेसिक पदमेंद्र सकलानी, डॉ. सुरेंद्र धपोला, डॉ. पंकज दुबे, प्रधानाचार्य प्रमोद तेवाड़ी, दीप जोशी, वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, आलोक साह, पंकज पांडेय सहित डायट के सभी शिक्षक प्रशिक्षक और डीएलएड प्रशिक्षु मौजूद रहे।
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