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सीवर पर प्रत्याशियों का रुख भांप रहे मतदाता
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 10 Nov 2018 10:48 PM IST
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सदानीरा सरयू में बह रही भागीरथी नाले का गंदा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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दो नदियों के तट पर बसे बागेश्वर ने भले ही दशकों पहले नगर का रूप ले लिया मगर नगर में आजतक सीवर प्रणाली का निर्माण नहीं हो पाया है। निकाय के पास हजारों की आबादी की गंदगी के निस्तारण की कोई योजना नहीं है। यह मुद्दा नगर निकाय ही नहीं विस चुनाव और लोकसभा चुनाव में भी गूंजता रहा है। इस चुनाव में भी मतदाता इस मुद्दे पर प्रत्याशियों का रुख भांप रहे हैं।
पावनी बागनाथ नगरी के घरों, प्रतिष्ठानों के शौचालयों की गंदगी नालियों और नालों के जरिए सीधे नदियों में समा रही है। इससे नदियों के जल प्रदूषण का खतरा भी बना है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चुनाव में खड़े प्रत्याशियों को सीवर निर्माण के संघर्ष का खाका सामने रखना चाहिए। जिस प्रत्याशी में संघर्ष का माद्दा नजर आएगा, वोट उस ही को जाएगा।
बता दें कि दशकों पूर्व से ही हरिद्वार की तर्ज पर बागनाथ की नगरी में सीवरेज योजना की मांग उठाई जाती रही है। लेकिन अभी तक डीपीआर के लिए भी मंजूरी नहीं मिल सकी है। पूरी योजना महज पेयजल निगम के सर्वे तक सीमित रह गई है। सालों से योजना के निर्माण को हरी झंडी मिलने और बजट का इंतजार किया जा रहा है।
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कोट
सर्वे के साथ ही योजना का प्रारंभिक आगणन कर लिया गया है। शासन की मंजूरी मिलते ही डीपीआर निर्माण शुरू हो जाएगा।
- सीपी गंगवार, ईई, पेयजल निगम, बागेश्वर
नदियों की पवित्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है। अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को प्रदूषण से निबटने के लिए ठोस प्लान मतदाताओं के समक्ष रखना चाहिए। जो भी प्रत्याशी जीते उसे नदियों को पवित्र बनाने के लिए कार्य करना होगा।
- रमेश दानू, व्यापारी
सरयू गोमती हमारी आस्था का विषय है। निकाय चुनाव में नदियों को स्वच्छ बनाए रखना एक मुद्दा होना चाहिए था लेकिन किसी भी प्रत्याशी ने प्रदूषण से निबटने का ठोस प्लान मतदाताओं के समक्ष नहीं रखा है। अपना नजरिया स्पष्ट करना चाहिए।
- दीपक कन्नौजिया, व्यापारी
संगम तट पर बसी बागनाथ नगरी में नदियों को लेकर ही शहर का अस्तित्व है। नदियां साल दर साल प्रदूषित होती जा रही हैं। नदियों के संरक्षण, प्रदूषण से बचाने के लिए सभी प्रत्याशियों को योजना को सार्वजनिक करना चाहिए।
- अंकुर उपाध्याय, छात्र नेता
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पावनी बागनाथ नगरी के घरों, प्रतिष्ठानों के शौचालयों की गंदगी नालियों और नालों के जरिए सीधे नदियों में समा रही है। इससे नदियों के जल प्रदूषण का खतरा भी बना है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चुनाव में खड़े प्रत्याशियों को सीवर निर्माण के संघर्ष का खाका सामने रखना चाहिए। जिस प्रत्याशी में संघर्ष का माद्दा नजर आएगा, वोट उस ही को जाएगा।
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बता दें कि दशकों पूर्व से ही हरिद्वार की तर्ज पर बागनाथ की नगरी में सीवरेज योजना की मांग उठाई जाती रही है। लेकिन अभी तक डीपीआर के लिए भी मंजूरी नहीं मिल सकी है। पूरी योजना महज पेयजल निगम के सर्वे तक सीमित रह गई है। सालों से योजना के निर्माण को हरी झंडी मिलने और बजट का इंतजार किया जा रहा है।
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सर्वे के साथ ही योजना का प्रारंभिक आगणन कर लिया गया है। शासन की मंजूरी मिलते ही डीपीआर निर्माण शुरू हो जाएगा।
- सीपी गंगवार, ईई, पेयजल निगम, बागेश्वर
नदियों की पवित्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है। अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को प्रदूषण से निबटने के लिए ठोस प्लान मतदाताओं के समक्ष रखना चाहिए। जो भी प्रत्याशी जीते उसे नदियों को पवित्र बनाने के लिए कार्य करना होगा।
- रमेश दानू, व्यापारी
सरयू गोमती हमारी आस्था का विषय है। निकाय चुनाव में नदियों को स्वच्छ बनाए रखना एक मुद्दा होना चाहिए था लेकिन किसी भी प्रत्याशी ने प्रदूषण से निबटने का ठोस प्लान मतदाताओं के समक्ष नहीं रखा है। अपना नजरिया स्पष्ट करना चाहिए।
- दीपक कन्नौजिया, व्यापारी
संगम तट पर बसी बागनाथ नगरी में नदियों को लेकर ही शहर का अस्तित्व है। नदियां साल दर साल प्रदूषित होती जा रही हैं। नदियों के संरक्षण, प्रदूषण से बचाने के लिए सभी प्रत्याशियों को योजना को सार्वजनिक करना चाहिए।
- अंकुर उपाध्याय, छात्र नेता