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Bageshwar News: मौसम परिवर्तन और स्वाध्याय का प्रतीक पर्व है बसंत पंचमी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jan 2023 11:53 PM IST
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Vasant Panchmi
डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी, श्रीपंचमी या बागीश्वरी जयंती के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के कंठ से माता सरस्वती प्रकट हुई थी। सरस्वती को वाणी की देवी माना जाता है। सनातन धर्म में वसंत पंचमी को अक्षरारंभ या विद्यारंभ के लिए बेहद शुभ माना गया है। वसंत पंचमी के बाद से मौसम में बदलाव होने लगता है। जिसके चलते इस पर्व को मौसम परिवर्तन का प्रतीक पर्व भी माना जाता है।
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वसंत पंचमी के दिन को उत्तराखंड में समृद्धि, संवाद और प्रकृति पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माताएं और बहनें अपने पुत्रों और भाइयों के मस्तक पर जौं के पत्ते रखकर उनके मंगल और सुखी जीवन की कामना करती हैं। गाय के गोबर का रोगनाशक और जौं को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
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घर के दरवाजे और देहली में भी गाय के गोबर के साथ जौं के पत्ते लगाए जाते हैं। कलाकार, संगीतज्ञ, लेखक, शास्त्रप्रेमी और विद्यार्थियों के लिए भी इस दिन का महत्व माना गया है। इस दिन बच्चों को पीले रंग का रुमाल धारण करते हैं। पीले रंग को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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वसंत पंचमी के दिन दंडकारण्य में भगवान श्रीराम और शबरी की भेंट हुई थी। वसंत पंचमी से मौसम में बदलाव होना शुरू हो जाता है। यह पर्व शिशिर ऋतु के जाने और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। वसंत पंचमी के बाद प्रकृति बासंती आवरण धारण करने लगती है। पतझड़ के बाद पेड़ों में नये पत्ते आने शुरू हो जाते हैं। पीली-पीली सरसों से खेत पीत रंग में रंग जाते हैं। पेड़-पौधों पर विभिन्न प्रकार के पुष्प खिलने लगते हैं और मौसम में शीत का असर कम होकर धीरे-धीरे ताप बढ़ने लगता है। इसी ऋतु में रति और कामदेव की पूजा कर रतिकोत्सव भी मनाया जाता है।
सरस्वती पूजा का मंत्र
सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरुपिणि
विद्यारंभ करिष्यामि, सिर्द्धभवतु मे सदा
इसके अलावा सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उनके द्वादशनामों का जाप और स्त्रोत का पाठ किया जाता है।
कोट
तीज-त्योहार हमें प्रकृति से सामंजस्य बनाकर संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। वसंत पंचमी का पर्व ज्ञान के महत्व को प्रदर्शित करने के साथ प्रकृति और मनुष्य के बीच के संबंध को प्रदर्शित करता है। हमें अपने पर्व और त्योहारों के उद्देश्य के अनुसार आचरण कर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।

डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, आचार्य/प्रवक्ता बागेश्वर
अल्मोड़ा के बाजारों में रौनक
अल्मोड़ा। वसंत पंचमी की खरीदारी के लिए बुधवार को अल्मोड़ा के बाजारों में रौनक रही। नगर के चौक बाजार, लाला बाजार, कारखाना बाजार, कचहरी बाजार समेत अन्य बाजारों में दुकानों में खरीदारी के लिए ग्राहकों की भीड़ रही। संवाद
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