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वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है वसंत पंचमी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Feb 2022 12:24 AM IST
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Vasant Panchami in Bageshqar
आयो नवल बसंत:बागेश्वर में बसंत ऋतु के आगमन पर खेतों में खिली सरसों। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाने वाली वसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है। इस दिन को विद्या की देवी मां सरस्वती के आविर्भाव दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। पुराने समय में वसंत पंचमी पर बच्चों को पहली बार अक्षर बोध कराने का विधान था। कला, संगीत और लेखन से जुड़े लोगों के लिए भी पर्व का विशेष महत्व माना जाता है।
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वसंत ऋतु के आगमन का परिचायक होने के चलते इस पर्व को वासंती महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व पर जौं के पत्तों से भगवान की पूजा करने का विधान है। घर के बुजुर्ग बच्चों के मस्तक पर जौं के पत्ते रखकर सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। मां अपने बच्चों और बहन अपने भाइयों को जौं लगाकर उनके सुखी जीवन की कामना करती हैं। जौं को सनातन धर्म में समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करने का भी चलन है। यह दिन यज्ञोपवीत, शादी, कर्णभेद, अन्नप्राशन आदि शुभ कार्यों के लिए विशेष माना गया है।
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रतिकामदेव महोत्सव के नाम भी जाना जाता है पर्व
बागेश्वर। वसंत पंचमी के बाद मौसम खुशनुमा हो जाता है। सर्दी के मौसम की शीतलता कम होने लगती है, पेड़-पौधों में पतझड़ के बाद नई बहार आने लगती है। इस दौरान कामदेव अपनी पूरी कलाओं के साथ वातावरण में विद्यमान होने लगते हैं। वसंत ऋतु में रति और कामदेव की पूजा का भी विधान माना गया है। जिस कारण इस पर्व को रतिकामदेव महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।
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सनातन धर्म से जुड़े तीज-त्योहार हमारी समृद्ध परंपरा के परिचायक हैं। पर्व हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाकर जीवन-यापन करने के लिए प्रेरित करते हैं। वसंत पंचमी का पर्व ज्ञान की महत्ता को प्रदर्शित करने के साथ मानव जीवन में प्रकृति के महत्व को बताता है। परंपराओं और पर्वों से मिलने वाली सीख हमें अपने जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देती है।

डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, आचार्य/प्रवक्ता बागेश्वर
विद्यार्थियों को व्रत पूजन से मिलेगा अक्षत ज्ञान: डॉ. जोशी
अल्मोड़ा। वसंत पंचमी के दिन यज्ञोपवीत संस्कार और मांगलिक कार्य अति शुभ माने जाते हैं। पंडित डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि इस दिन प्रात काल स्नान करके मां सरस्वती की पूजा करें। उन्हें पीला चंदन, फूल और पीला वस्त्र चढ़ाएं। सरस्वती पूजन में पीला रंग का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि देवी भागवत के नवम स्कंध में माता सरस्वती के अवतरण की कथा वर्णित है। संसार में विद्या ज्ञान प्रदान करने के लिए मां भगवती ने सरस्वती रुप धारण किया। संसार के जीवों का कल्याण करने के लिए वेद रूपी ज्ञान का प्रकाश ऋषियों को दिया। देवी भागवत के अनुसार इस दिन अक्षरारम्भ उपनयन वेदारंभ का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को वसंत पंचमी के व्रत पूजन करने से अक्षय ज्ञान प्राप्त होगा। इस दिन यज्ञोपवीत संस्कार व मांगलिक कार्य अति शुभ माने जाते हैं।
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