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पांच बंगाली समेत 12 सदस्यों के दल ने किया ट्रेल दर्रा पार
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बागेश्वर के ट्रेल पास पहुंचा ट्रैकरों का दल। संवाद
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। बंगाली ट्रैकरों और जिले के पर्वतारोहियों के 12 सदस्यीय दल ने पिंडारी ग्लेशियर के ट्रेल पास को पार करने में कामयाबी हासिल की है। 26 सितंबर को खाती से रवाना हुए दल ने चार अक्तूबर को 5312 मीटर ऊंचाई पर स्थित ट्रेल पास को फतह किया। इसके बाद टीम आठ अक्तूबर को मुनस्यारी पहुंची। विपरीत मौसम के बावजूद दल में शामिल पर्वतारोहियों ने बुलंद हौसलों का परिचय देते हुए अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।
ट्रेल पास पिंडारी ग्लेशियर में स्थित है। 1830 में अंग्रेज घुमक्कड़ सर विलियम ट्रेल ने सूपी गांव के मलक सिंह के साथ मिलकर पिंडारी ट्रैक को खोजा था। स्वास्थ्य कारणों के कारण विलियम ट्रेल आगे नहीं जा पाए थे लेकिन मलक सिंह जोहार होते हुए मुनस्यारी तक पहुंच गए थे। 26 सितंबर को ट्रेल पास के लिए खाती से टीम रवाना हुई थी। टीम में पांच बंगाली ट्रैकर पार्थो घोष, रंजन दत्ता, तापस हर, विजय कांत पांडे और प्रशांत कुमार थे। उनके साथ गाइड दिनेश सिंह दानू, इंद्र सिंह, प्रवीण सिंह, गोविंद सिंह, महिपाल सिंह, कृपाल सिंह और मोहन सिंह शामिल थे।
ऐसा रहा यात्रा के प्रत्येक दिन का हाल
बागेश्वर। पहले दिन 26 सितंबर को टीम खाती से द्वाली पहुंची। 27 को द्वाली से बेस कैंप सिनोट पहुंची। 28 को दल ने बैस कैंप से एडवांस कैंप (सोराग खरिक) की लौटाफेरी की। 29 को फिर दल बैस कैंप से एडवांस कैंप गया। 30 सितंबर को एडवांस कैंप से कैंप वन की लौटाफेरी की। एक अक्तूबर को दल एडवांस कैंप से कैंप वन को रवाना हुआ लेकिन भारी हिमपात के कारण टीम को बीच में ही अस्थायी कैंप लगाना पड़ा। दो को अस्थायी शिविर से कैंप वन और तीन को टीम कैंप वन से टू पहुंची। चार अक्तूबर को कैंप टू से रवाना होकर दल ने ट्रेल पास फतह करते हुए मोरेन कैंप का सफर तय किया। पांच को मोरेन कैंप से नंदा देवी बेस कैंप होते हुए दल राताडंठल गया। छह को राताडंठल से मरतोली और सात को मरतोली से बुगडियार पहुंचा। आठ अक्तूबर को बुगडियार से मुनस्यारी के लिलम में मिशन समाप्त कर दल वाहन से मुनस्यारी पहुंचा।
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ट्रेल पास पिंडारी ग्लेशियर में स्थित है। 1830 में अंग्रेज घुमक्कड़ सर विलियम ट्रेल ने सूपी गांव के मलक सिंह के साथ मिलकर पिंडारी ट्रैक को खोजा था। स्वास्थ्य कारणों के कारण विलियम ट्रेल आगे नहीं जा पाए थे लेकिन मलक सिंह जोहार होते हुए मुनस्यारी तक पहुंच गए थे। 26 सितंबर को ट्रेल पास के लिए खाती से टीम रवाना हुई थी। टीम में पांच बंगाली ट्रैकर पार्थो घोष, रंजन दत्ता, तापस हर, विजय कांत पांडे और प्रशांत कुमार थे। उनके साथ गाइड दिनेश सिंह दानू, इंद्र सिंह, प्रवीण सिंह, गोविंद सिंह, महिपाल सिंह, कृपाल सिंह और मोहन सिंह शामिल थे।
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ऐसा रहा यात्रा के प्रत्येक दिन का हाल
बागेश्वर। पहले दिन 26 सितंबर को टीम खाती से द्वाली पहुंची। 27 को द्वाली से बेस कैंप सिनोट पहुंची। 28 को दल ने बैस कैंप से एडवांस कैंप (सोराग खरिक) की लौटाफेरी की। 29 को फिर दल बैस कैंप से एडवांस कैंप गया। 30 सितंबर को एडवांस कैंप से कैंप वन की लौटाफेरी की। एक अक्तूबर को दल एडवांस कैंप से कैंप वन को रवाना हुआ लेकिन भारी हिमपात के कारण टीम को बीच में ही अस्थायी कैंप लगाना पड़ा। दो को अस्थायी शिविर से कैंप वन और तीन को टीम कैंप वन से टू पहुंची। चार अक्तूबर को कैंप टू से रवाना होकर दल ने ट्रेल पास फतह करते हुए मोरेन कैंप का सफर तय किया। पांच को मोरेन कैंप से नंदा देवी बेस कैंप होते हुए दल राताडंठल गया। छह को राताडंठल से मरतोली और सात को मरतोली से बुगडियार पहुंचा। आठ अक्तूबर को बुगडियार से मुनस्यारी के लिलम में मिशन समाप्त कर दल वाहन से मुनस्यारी पहुंचा।
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