{"_id":"66410d01a4ec1867100c9f64","slug":"there-is-water-in-bageshwar-even-after-rain-bageshwar-news-c-231-1-shld1005-106461-2024-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bageshwar News: बारिश के बाद भी बागेश्वर में हाय पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bageshwar News: बारिश के बाद भी बागेश्वर में हाय पानी
Mon, 13 May 2024 12:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 13 May 2024 12:10 AM IST
विज्ञापन
बागेश्वर के मंडलसेरा में हैंडपंप से पानी भरते लोग। संवाद
बागेश्वर। नदियों से घिरे बागेश्वर में लगातार हो रही बारिश के बाद भी पानी का संकट बना हुआ है। कई इलाकों में लोगों को सुबह से शाम तक पीने के पानी के इंतजाम में लगा रहना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत में नगर के मंडलसेरा, जीतनगर के लोगों को हैं।
सदानीरा सरयू और गोमती के तट पर बसे बागेश्वर नगर में पानी की कमी कोई नई बात नहीं है। सरकार, प्रतिनिधि और सरकारी तंत्र की नाकामी ही कही जाएगी कि हर तरफ पानी होने के बाद भी नगर की 30 हजार आबादी को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। वर्तमान आवश्यकता के हिसाब से नगर को 5.5 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की आवश्यकता है, लेकिन जखेड़ा, मंडलसेरा, मंडलसेरा आईवेल, अमसरकोट आदि योजनाओं से केवल तीन एमएलडी पानी मिल पाता है। ढाई एमएलडी पानी की कमी बनी हुई है।
नगर के मंडलसेरा और जीतनगर में पीने के पानी को लेकर वर्षभर हाहाकार मचा रहता है। जल संस्थान ने मंडलसेरा क्षेत्र में नए कनेक्शन देने पर रोक लगाई है। जिन घरों में कनेक्शन हैं, वहां भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता। नगर के तहसील रोड, मजियाखेत क्षेत्र में भी पानी की कमी है। इन इलाकों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जाता है। नगर के लिए चार साल से बन रही 3.7 एमएलडी की मंडलसेरा पंपिंग पेयजल योजना अधूरी पड़ी है।
विज्ञापन
कोट
पेयजल निगम के ईई को मंडलसेरा पंपिंग पेयजल योजना का काम जल्द पूरा करने की हिदायत दी गई है। जल्द योजना का काम पूरा नहीं हुआ तो लापरवाह अभियंताओं की जिम्मेदारी तय कराई जाएगी। - पार्वती दास विधायक बागेश्वर
कोट
पानी की कमी के कारण रोटेशन से पानी देना पड़ता है। मंडलसेरा, जीतनगर की पेयजल व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। - सीएस देवड़ी ईई जल संस्थान बागेश्वर
......................
दूषित पानी की आपूर्ति से बढ़ी दिक्कत, प्राकृतिक जल स्रोतों में लग रही है लाइन
-दूषित पानी की आपूर्ति होने से नगर की 60 हजार की आबादी परेशान, बढ़ा बीमारी का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। बीते दिनों हुई भारी बारिश ने जल संस्थान के साथ ही नगर की 60 हजार की आबादी की दिक्कत बढ़ाने का काम किया है। किसी तरह नगर में कोसी पंपिंग योजना से चार दिन बाद जलापूर्ति शुरू हुई, लेकिन नलों से दूषित पानी टपकने से लोग बेहाल हैं। उन्हें प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाकर या बाजार से बोतल बंद पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
नगर के लोगों की प्यास बुझाने वाले कोसी बैराज में बीते बुधवार हुई बारिश से भारी मात्रा में सिल्ट जमा हो गई थी, इससे तीन दिन तक जलापूर्ति ठप रही। जल संस्थान ने सिल्ट हटाने के दावे कर किसी तरह चौथे दिन जलापूर्ति सुचारु की, लेकिन लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं हो सका। नलों से लगातार दूषित पानी टपक रहा है, इससे लोग परेशान हैं। मटमैले, चिपचिपे और बदबूदार पानी का उपयोग करना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। बीते शनिवार देर रात तक और रविवार को पूरे दिन नगर के प्रमुख सिमकनी, धारानौला सहित अन्य नौलों में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। देर रात तक लोग खाली बर्तनों के साथ लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। संवाद
बीमारी का बढ़ा खतरा
अल्मोड़ा। जल संस्थान कोसी बैराज से फिल्टर कर जलापूर्ति करने के दावे कर रहा है, लेकिन नलों से दूषित पानी टपकना बंद नहीं हो रहा। वहीं पूर्व में हुई जांच में नगर के अधिकांश नौलों के पानी में कोलीफार्म मिलने की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में नलों और प्राकृतिक जल स्रोतों में शुद्ध पानी न होने से बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है।
कोट
कोसी बैराज से सिल्ट अलग कर पानी की पंपिंग हो रही है। पानी को शुद्ध करने के लिए फिटकरी का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में पानी चिपचिपा और बदबूदार है। दिक्कत की कोई बात नहीं है। एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। - अरुण कुमार सोनी, ईई, जल संस्थान, अल्मोड़ा।
..................
टैंकरों से बांटा 70 हजार लीटर पानी, तब बुझी प्यास
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। बारिश के बाद भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर नहीं हो रहा है। पेयजल योजनाओं के जवाब देने से ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं और टैंकरों से उनकी प्यास बुझ रही है। जिले के सोमेश्वर, हवालबाग सहित अन्य हिस्सों में जलापूर्ति ठप रही। इन क्षेत्रों में टैंकरों से 70 हजार लीटर पानी बांटकर लोगों को राहत पहुंचानी पड़ी।
नगर के लिंक रोड थपलिया सहित जिले के सोमेश्वर, लोद, नगरखान, तोली, हवालबाग, रसयारा गांव, कसारदेवी, डीनापानी, बल्टा, शीतलाखेत में जलापूर्ति ठप रही। नल सूखे रहे और 16 हजार से अधिक की आबादी को पानी के लिए तरसना पड़ा। लोग पानी के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाते रहे। सूचना के बाद जल संस्थान ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर, पिकअप, डंपरों से पानी बांटकर लोगों को राहत पहुंचाई। वहीं सड़क से दूर गांवों में टैंकर न पहुंचने से लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। पूरे दिन प्राकृतिक जल स्रोतों से उन्हें पानी ढोकर अपनी जरूरत पूरी करनी पड़ी। जल संस्थान के जेई विरेंद्र मेहता ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर से पानी बांटा जा रहा है। लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए संस्थान गंभीरता से काम कर रहा है। संवाद
................
जलापूर्ति ठप रहने से घटैढाली के ग्रामीण परेशान
द्वाराहाट(अल्मोड़ा)। विजयपुर ग्राम पंचायत के घटैढाली तोक में चार दिन से जलापूर्ति ठप होने से ग्रामीण परेशान हैं। बीते बुधवार को भारी बारिश के बाद पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से यहां जल संकट गहराया है, लेकिन योजना को ठीक करने के प्रयास नहीं हो रहे। ग्राम प्रधान योगेश भट्ट ने कहा कि जल निगम को सूचना देने के बाद भी जलापूर्ति बहाल करने के प्रयास नहीं हो रहे जो गंभीर है। उन्होंने शीघ्र क्षतिग्रस्त लाइन ठीक न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। संवाद
.................
सोमेश्वर में जलापूर्ति ठप रहने से आपदा प्रभावित परेशान
सोमेश्वर। सोमेश्वर के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं। किसी तरह चार दिन बाद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन यहां अब भी प्रभावित पानी के लिए तरस रहे हैं। जगह-जगह पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से जलापूर्ति ठप है, इससे क्षेत्र की पांच हजार की आबादी को पीने का शुद्ध पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। हालांकि टैंकरों से पानी बांटकर प्रभावितों को राहत पहुंचाई जा रही है। टैंकर से पर्याप्त पानी न मिलने से उन्हें पीने के अलावा अन्य जरूरत के लिए गधेरों और प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संवाद
विज्ञापन
सदानीरा सरयू और गोमती के तट पर बसे बागेश्वर नगर में पानी की कमी कोई नई बात नहीं है। सरकार, प्रतिनिधि और सरकारी तंत्र की नाकामी ही कही जाएगी कि हर तरफ पानी होने के बाद भी नगर की 30 हजार आबादी को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। वर्तमान आवश्यकता के हिसाब से नगर को 5.5 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की आवश्यकता है, लेकिन जखेड़ा, मंडलसेरा, मंडलसेरा आईवेल, अमसरकोट आदि योजनाओं से केवल तीन एमएलडी पानी मिल पाता है। ढाई एमएलडी पानी की कमी बनी हुई है।
विज्ञापन
नगर के मंडलसेरा और जीतनगर में पीने के पानी को लेकर वर्षभर हाहाकार मचा रहता है। जल संस्थान ने मंडलसेरा क्षेत्र में नए कनेक्शन देने पर रोक लगाई है। जिन घरों में कनेक्शन हैं, वहां भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता। नगर के तहसील रोड, मजियाखेत क्षेत्र में भी पानी की कमी है। इन इलाकों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जाता है। नगर के लिए चार साल से बन रही 3.7 एमएलडी की मंडलसेरा पंपिंग पेयजल योजना अधूरी पड़ी है।
विज्ञापन
कोट
पेयजल निगम के ईई को मंडलसेरा पंपिंग पेयजल योजना का काम जल्द पूरा करने की हिदायत दी गई है। जल्द योजना का काम पूरा नहीं हुआ तो लापरवाह अभियंताओं की जिम्मेदारी तय कराई जाएगी। - पार्वती दास विधायक बागेश्वर
कोट
पानी की कमी के कारण रोटेशन से पानी देना पड़ता है। मंडलसेरा, जीतनगर की पेयजल व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। - सीएस देवड़ी ईई जल संस्थान बागेश्वर
......................
दूषित पानी की आपूर्ति से बढ़ी दिक्कत, प्राकृतिक जल स्रोतों में लग रही है लाइन
-दूषित पानी की आपूर्ति होने से नगर की 60 हजार की आबादी परेशान, बढ़ा बीमारी का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। बीते दिनों हुई भारी बारिश ने जल संस्थान के साथ ही नगर की 60 हजार की आबादी की दिक्कत बढ़ाने का काम किया है। किसी तरह नगर में कोसी पंपिंग योजना से चार दिन बाद जलापूर्ति शुरू हुई, लेकिन नलों से दूषित पानी टपकने से लोग बेहाल हैं। उन्हें प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाकर या बाजार से बोतल बंद पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
नगर के लोगों की प्यास बुझाने वाले कोसी बैराज में बीते बुधवार हुई बारिश से भारी मात्रा में सिल्ट जमा हो गई थी, इससे तीन दिन तक जलापूर्ति ठप रही। जल संस्थान ने सिल्ट हटाने के दावे कर किसी तरह चौथे दिन जलापूर्ति सुचारु की, लेकिन लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं हो सका। नलों से लगातार दूषित पानी टपक रहा है, इससे लोग परेशान हैं। मटमैले, चिपचिपे और बदबूदार पानी का उपयोग करना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। बीते शनिवार देर रात तक और रविवार को पूरे दिन नगर के प्रमुख सिमकनी, धारानौला सहित अन्य नौलों में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। देर रात तक लोग खाली बर्तनों के साथ लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। संवाद
बीमारी का बढ़ा खतरा
अल्मोड़ा। जल संस्थान कोसी बैराज से फिल्टर कर जलापूर्ति करने के दावे कर रहा है, लेकिन नलों से दूषित पानी टपकना बंद नहीं हो रहा। वहीं पूर्व में हुई जांच में नगर के अधिकांश नौलों के पानी में कोलीफार्म मिलने की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में नलों और प्राकृतिक जल स्रोतों में शुद्ध पानी न होने से बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है।
कोट
कोसी बैराज से सिल्ट अलग कर पानी की पंपिंग हो रही है। पानी को शुद्ध करने के लिए फिटकरी का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में पानी चिपचिपा और बदबूदार है। दिक्कत की कोई बात नहीं है। एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। - अरुण कुमार सोनी, ईई, जल संस्थान, अल्मोड़ा।
..................
टैंकरों से बांटा 70 हजार लीटर पानी, तब बुझी प्यास
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। बारिश के बाद भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर नहीं हो रहा है। पेयजल योजनाओं के जवाब देने से ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं और टैंकरों से उनकी प्यास बुझ रही है। जिले के सोमेश्वर, हवालबाग सहित अन्य हिस्सों में जलापूर्ति ठप रही। इन क्षेत्रों में टैंकरों से 70 हजार लीटर पानी बांटकर लोगों को राहत पहुंचानी पड़ी।
नगर के लिंक रोड थपलिया सहित जिले के सोमेश्वर, लोद, नगरखान, तोली, हवालबाग, रसयारा गांव, कसारदेवी, डीनापानी, बल्टा, शीतलाखेत में जलापूर्ति ठप रही। नल सूखे रहे और 16 हजार से अधिक की आबादी को पानी के लिए तरसना पड़ा। लोग पानी के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाते रहे। सूचना के बाद जल संस्थान ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर, पिकअप, डंपरों से पानी बांटकर लोगों को राहत पहुंचाई। वहीं सड़क से दूर गांवों में टैंकर न पहुंचने से लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। पूरे दिन प्राकृतिक जल स्रोतों से उन्हें पानी ढोकर अपनी जरूरत पूरी करनी पड़ी। जल संस्थान के जेई विरेंद्र मेहता ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर से पानी बांटा जा रहा है। लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए संस्थान गंभीरता से काम कर रहा है। संवाद
................
जलापूर्ति ठप रहने से घटैढाली के ग्रामीण परेशान
द्वाराहाट(अल्मोड़ा)। विजयपुर ग्राम पंचायत के घटैढाली तोक में चार दिन से जलापूर्ति ठप होने से ग्रामीण परेशान हैं। बीते बुधवार को भारी बारिश के बाद पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से यहां जल संकट गहराया है, लेकिन योजना को ठीक करने के प्रयास नहीं हो रहे। ग्राम प्रधान योगेश भट्ट ने कहा कि जल निगम को सूचना देने के बाद भी जलापूर्ति बहाल करने के प्रयास नहीं हो रहे जो गंभीर है। उन्होंने शीघ्र क्षतिग्रस्त लाइन ठीक न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। संवाद
.................
सोमेश्वर में जलापूर्ति ठप रहने से आपदा प्रभावित परेशान
सोमेश्वर। सोमेश्वर के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे हैं। किसी तरह चार दिन बाद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन यहां अब भी प्रभावित पानी के लिए तरस रहे हैं। जगह-जगह पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से जलापूर्ति ठप है, इससे क्षेत्र की पांच हजार की आबादी को पीने का शुद्ध पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। हालांकि टैंकरों से पानी बांटकर प्रभावितों को राहत पहुंचाई जा रही है। टैंकर से पर्याप्त पानी न मिलने से उन्हें पीने के अलावा अन्य जरूरत के लिए गधेरों और प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संवाद