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सामरिक सुरक्षा के लिए रेल लाइन जरूरी
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ बागेश्वर
Updated Sun, 26 Apr 2015 10:32 PM IST
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टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति ने रविवार को यहां तहसील मुख्यालय पर धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि रेल मार्ग की मंजूरी को लंबा समय हो गया है। केंद्र सरकार इस इलाके के सामरिक महत्व को नजरअंदाज कर रही है, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं है।
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बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति के सदस्यों ने तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। वहां हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि रेल मार्ग की मांग बहुत पुरानी थी। इस मामले में अंग्रेज शासक अधिक संवेदनशील, दूरदर्शी थे। उन्होंने 1912 में टनकपुर से बागेश्वर तक रेल लाइन बनाने की मंजूरी गई थी, लेकिन इसका निर्माण नहीं हुआ। आजादी के बाद हर बार यह मांग उठाई गई। कई बार आंदोलन हो चुके हैं।
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आंदोलनकारियों ने कहा कि चीन ने इस दिशा में अपनी सीमाओं पर सड़कों, रेल लाइनों का जाल बिछा दिया है, लेकिन भारत सरकार ने इस मामले को नजरअंदाज किया है। आंदोलनकारियों ने कहा कि रेल मार्ग के साथ इस सुदूरवर्ती इलाके के विकास का सपना भी जुड़ा है। वहां आंदोलन की भावी रणनीति तय की गई। अगली बैठक 31 मई को भराड़ी में होगी। संगठन के उपाध्यक्ष गोपीराम की मृत्यु, भूकंप त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया गया।
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बैठक में संघर्ष समिति की अध्यक्ष नीमा दफौटी, महासचिव खड़क राम आर्य, प्रताप सिंह गड़िया, हयात सिंह मेहरा, प्रवीण सिंह दफौटी, रमेश पांडे बृजवासी, मोहन सिंह कपकोटी, किशनराम आर्य, महेंद्र सिंह पिल्खवाल, गिरीश चंद्र पाठक, राधा लोहनी, लक्ष्मी धर्मशक्तू, पार्वती पांडे, रमेश सिंह बोरा, सरस्वती बिष्ट, शोभा धपोला, मालती पांडे, मदन सिंह टंगड़िया, मोहन चंद्र सती, बसंती आर्या आदि ने भाग लिया।