फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   The Prime Minister like maduwa biscuit

प्रधानमंत्री के मन को भी भाए मंडुवे के बिस्कुट

Sun, 29 Apr 2018 10:50 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय
भक्त दर्शन पांडेय Updated Sun, 29 Apr 2018 10:50 PM IST
विज्ञापन
The Prime Minister like maduwa biscuit
बिस्कुट पैक करती महिलाएं।  - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पहाड़ में बनाए जाने वाले मंडुवे और चौलाई के बिस्कुट भा गए हैं। उन्होंने रविवार को मन की बात में कपकोट के मुनार गांव का जिक्र करते हुए मंडुवे के बिस्कुटों की तारीफ की और महिला समूहों के प्रयासों को सराहा।

विज्ञापन

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके में मंडुआ और चौलाई का भरपूर उत्पादन होता है। मोटा अनाज होने के कारण लोग मंडुवे का उपयोग जानवरों के चारे के रूप में ज्यादा करते थे।
विज्ञापन


भोजन में कम उपयोग और विपणन के लिए बाजार नहीं मिलने से दो-तीन सालों तक मंडुवा लोगों के घरों में डंप रहता था। 2012 में आजीविका परियोजना के अधिकारियों ने क्षेत्र मेें जाकर लोगों को मंडुआ, चौलाई का महत्व बताया और इनसे रोजगार पैदा करने के टिप्स दिए। इससे प्रेरित हो क्षेत्र की महिलाओं ने समूह के माध्यम से मां चिल्ठा आजीविका स्वायत्तता सहकारिता की स्थापना की।
विज्ञापन
विज्ञापन


अभी 952 परिवार आजीविका परियोजना की ओर से गठित इस सहकारिता समूह से जुड़े हैं। समूह ने शुरुआत में कृषकों से मंडुवा, चौलाई आदि उत्पाद खरीदकर मंडी में बेचे। अनाज को बेचकर हुई बचत से समूह ने एक साल पहले कपकोट के मुनार गांव में बिस्कुट बनाने का प्लांट लगाया। आठ महीने से इस प्लांट में मंडुवे और चौलाई के बिस्कुट बनाए जा रहे हैं।

इसमें मेकिंग, पैकिंग और मार्केटिंग का कार्य पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में है। हर साल 12 से 15 लाख मूल्य के बिस्कुट और पहाड़ी अनाज को मंडियों में बेचकर समूह डेढ़ से दो लाख रुपये की आय कर रहा है। हाड़तोड़ मेहनत से पैदा किया हुआ जो मंडुवा और चौलाई पहले जानवरों का चारा बन जाता था उसे किसान आज 16 रुपये और 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। 


आंगनबाड़ी केंद्र और बाजार में उपलब्ध हैं बिस्कुट 

मुनार गांव में महिलाओं की ओर से स्थापित फैक्ट्री में तैयार होने वाले मंडुवे के बिस्कुट पौष्टिकता से भरपूर हैं। इनको जिले के 50 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा जाता है। इसके अलावा कपकोट, बागेश्वर, कौसानी, गरुड़ और अल्मोड़ा के बाजार में इनको बेचा जाता है। दो सौ ग्राम के मंडुवे और चौलाई के बिस्कुट के पैकेट की कीमत 25 रुपये रखी गई है। मंडुवे के बिस्कुट में आयरन और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होने से गर्भवती महिलाओं के लिए यह सबसे अधिक उपयुक्त माना जाता है।  

 यह कार्यक्रम एकीकृत आजीविका परियोजना के अंतर्गत संचालित होता है। सहकारिता समूहों का गठन कर उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जाता है। मां चिल्ठा आजीविका स्वायत्तता सहकारिता सराहनीय कार्य कर रही है। आगे भी समिति को सहयोग दिया जाता रहेगा।  - धर्मेंद्र पांडेय, प्रबंधक, आजीविका परियोजना।  

..
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में समूह की ओर से तैयार किए जा रहे कार्यों का जिक्र किया है। सुनकर अच्छा लगा। मंडुवा, चौलाई सहित अन्य उत्पादों को बाजार उपलब्ध होने से मुनार, झूनी, खलझूनी, चौड़ा आदि गांवों के किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। - तारा टाकुली, संस्था अध्यक्ष, मुनार, कपकोट। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed