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नोटबंदी से चरमराई अर्थव्यवस्था
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Sun, 11 Dec 2016 12:12 AM IST
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गरुड़ (बागेश्वर)। हजार, पांच सौ की नोटबंदी से ग्रामीण इलाके के लोगों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। उधार की जिंदगी से ग्रामीण तंग आ चुके हैं। समाज कल्याण विभाग ने वृद्धा, विधवा, दिव्यांग आदि योजनाओं के तहत संचालित पेंशन योजनाओं का धन ट्रेजरी के माध्यम से धारकों के खातों में तो डाल दिया है। डाकघर और बैंकों में छोटे नोट न होने पर पात्र अपनी पेंशन नहीं ले पा रहे है।
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समाज कल्याण विभाग ने सरकार की योजनाओं के तहत संचालित पेंशन योजनाओं की धनराशि जिले के वृद्धा, विधवा, दिव्यांगों के खातों में तीन माह की पेंशन राशि जिले के 20 हजार से अधिक लोगों के खातों में नवंबर माह में डाल दी थी। बैंकों और डाकघरों में खुली राशि उपलब्ध न होने और नकदी कम उपलब्ध होने के कारण पात्र पेंशन धारकों सुबह से लाइन लगाने के बाद भी मात्र दो हजार मिल रहे है।
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जिले के अधिकतर पेंशन धारकों के खाते ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों में है। मुख्य डाकघर से ब्रांच पोस्ट ऑफिसों को तीसरे चौथे दिन डाक विभाग के उच्च अधिकारी दस हजार से कम राशि भेज रहे है। ब्रांच पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टरों का कहना है कि समाज कल्याण विभाग से पेंशन खाता धारकों की तीन हजार रुपए पेंशन उनके खातों में आई है।
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विभाग के पास मात्र दो हजार से छोटे नोट उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते वह खाता धारकों को तीन हजार रुपए का भुगतान नहीं कर पा रहे है। मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत भंडारी, पचना के बीडीसी सदस्य प्रकाश कोहली, तैलीहाट की कमला देवी, पिंगलों की जिला पंचायत सदस्या नंदी भंडारी का कहना है कि हजार, पांच सौ के नोट बंद होने और बैंकों में मांग के अनुसार धन न मिलने से सबसे ज्यादा महिलाएं परेशान है। हालात यही रहे तो महिलाएं विरोध करेंगी।