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बागेश्वर में साल दर साल कम हो रहे क्षय रोगी
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डॉ. एनएस टोलिया
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। क्षय या टीबी रोग को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां धीरे-धीरे कम होने के बाद अब जांच कराने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। जिसके सुखद परिणाम भी दिख रहे हैं। जिले में साल दर साल टीबी के मरीजों की संख्या कम होती जा रही है। इस वर्ष जनवरी से अब तक 106 लोगों में टीबी की बीमारी के लक्षण पाए गए। जिनमें से 82 टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है।
पिछले पांच वर्षों के दौरान अब मरीज धीरे-धीरे स्वयं जांच कराने के लिए आने लगे हैं। जांच में तेजी आने से बीमारी को कम करने में विभाग को मदद मिल रही है। जिला क्षय रोग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले की टीबी लैब के अलावा लोग निजी लैब या बाहर के अस्पतालों से भी जांच कराकर आते हैं। जिनका जिला अस्पताल से इलाज किया जाता है।
टीबी चैंपियन बन रहे मददगार
बागेश्वर। टीबी के मरीजों को उपचार के लिए प्रेरित करने में टीबी फोरम की अहम भूमिका रहती है। इस फोरम में डीएम, सीएमओ, जिला क्षय रोग अधिकारी के अलावा टीबी की बीमारी से निजात पा चुका मरीज भी शामिल है। जिसे टीबी चैंपियन के रूप में स्वयंसेवी बनाया गया है। वह स्वयंसेवी टीबी मरीजों के बीच जाकर उन्हें इलाज कराने के लिए प्रेरित करता है। जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है।
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सामान्य टीबी का छह महीने, एमडीआर का लंबा होता है इलाज
बागेश्वर। टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। डॉट्स पद्धति से इस बीमारी का संपूर्ण इलाज होता है। सामान्य टीबी में मरीज का छह महीने का इलाज चलता है। जिसमें मरीज को उसके भार के अनुसार दवा दी जाती है। अगर मरीज दवा बीच में छोड़ दे तो, बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। जिसे एमडीआर कहा जाता है। टीबी गंभीर होने पर मरीज को 12 से 24 महीने तक का कोर्स करना पड़ता है।
तीन वर्षों में मरीजों का विवरण
वर्ष पॉजिटिव मरीज ठीक हुए मरीज
2020 412 384
2021 386 291
2022 82 00
जिले में टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। मरीज स्वयं टीबी की जांच कराने आने लगे हैं। अधिकांश मरीज डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उपचार करा रहे हैं। इसके असर से जिले में टीबी के मरीजों की संख्या भी घट रही है। जिले में अब उपचार के साथ टीबी से बचाव की थेरेपी सुविधा भी उपलब्ध है। इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है।
डॉ. एनएस टोलिया, वरिष्ठ जिला क्षय रोग अधिकारी, बागेश्वर
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पिछले पांच वर्षों के दौरान अब मरीज धीरे-धीरे स्वयं जांच कराने के लिए आने लगे हैं। जांच में तेजी आने से बीमारी को कम करने में विभाग को मदद मिल रही है। जिला क्षय रोग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले की टीबी लैब के अलावा लोग निजी लैब या बाहर के अस्पतालों से भी जांच कराकर आते हैं। जिनका जिला अस्पताल से इलाज किया जाता है।
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टीबी चैंपियन बन रहे मददगार
बागेश्वर। टीबी के मरीजों को उपचार के लिए प्रेरित करने में टीबी फोरम की अहम भूमिका रहती है। इस फोरम में डीएम, सीएमओ, जिला क्षय रोग अधिकारी के अलावा टीबी की बीमारी से निजात पा चुका मरीज भी शामिल है। जिसे टीबी चैंपियन के रूप में स्वयंसेवी बनाया गया है। वह स्वयंसेवी टीबी मरीजों के बीच जाकर उन्हें इलाज कराने के लिए प्रेरित करता है। जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है।
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सामान्य टीबी का छह महीने, एमडीआर का लंबा होता है इलाज
बागेश्वर। टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। डॉट्स पद्धति से इस बीमारी का संपूर्ण इलाज होता है। सामान्य टीबी में मरीज का छह महीने का इलाज चलता है। जिसमें मरीज को उसके भार के अनुसार दवा दी जाती है। अगर मरीज दवा बीच में छोड़ दे तो, बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। जिसे एमडीआर कहा जाता है। टीबी गंभीर होने पर मरीज को 12 से 24 महीने तक का कोर्स करना पड़ता है।
तीन वर्षों में मरीजों का विवरण
वर्ष पॉजिटिव मरीज ठीक हुए मरीज
2020 412 384
2021 386 291
2022 82 00
जिले में टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। मरीज स्वयं टीबी की जांच कराने आने लगे हैं। अधिकांश मरीज डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उपचार करा रहे हैं। इसके असर से जिले में टीबी के मरीजों की संख्या भी घट रही है। जिले में अब उपचार के साथ टीबी से बचाव की थेरेपी सुविधा भी उपलब्ध है। इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है।
डॉ. एनएस टोलिया, वरिष्ठ जिला क्षय रोग अधिकारी, बागेश्वर