{"_id":"9484fce62fbe27f9f16ed1e2c457bdf7","slug":"syalde-bikuti-bhandara-in-fair-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्याल्दे बिखौती के मेले में हुआ भंडारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्याल्दे बिखौती के मेले में हुआ भंडारा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Fri, 17 Apr 2015 11:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्राम पंचायत कपकोट के श्री श्री 1008 काशिल देव मंदिर में आयोजित स्याल्दे बिखौती का मेला भंडारे के साथ संपन्न हो गया। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर में दिनभर पूजा-अर्चना हुई। वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शीष नवाकर पुण्य कमाया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गोदान भी किया।
विज्ञापन
श्री श्री 1008 काशिल देव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने पंडितों से दुर्गा सप्तशती के पाठ करवाए। कई ने अपनी मनौती पूरी होने पर मंदिर में घंटियां, पूजा के काम आने वाले बर्तन अर्पित किए। श्रद्धालुओं ने काशिल देव, भगवती माता, बाण देवता, बाली कुसुमा को नए अनाज का भोग लगाया। महिलाओं, कन्याओें ने भगवती माता, राजा रत कपकोटी की कन्या बाली कुसुमा के मंदिर में चुनरी चढ़ाई। यहां आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पुजारी मोहन चंद्र उपाध्याय, गिरीश चंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में युवा पुजारियों ने श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा।
विज्ञापन
स्याल्दे बिखौती मेले के मौके पर बृहस्पतिवार को ग्राम पंचायत कपकोट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों समेत पांपरिक चांचरी के गीतों का गायन हुआ। मेलार्थियों ने चांचरी के गीतों का शुभारंभ को देवो चढूंल मासिक फूल... गाकर की। उन्होंने काफली तू पाकली कब... शिखर डाना घाम लागि रछ... र ह टाकि ताना... आदि चांचरी गीतों का जमकर गायन किया। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ।
विज्ञापन
कार्यक्रमों का मेलार्थियों ने देर रात तक लुत्फ उठाया। इधर नगर पंचायत के वार्ड नंबर दो के तिरुवाण मोहल्ला स्थित कालिका माता के मंदिर में महिलाओं ने बाली कुसुमा के जीवन पर आधारित गीतों का गायन किया। उन्होंने बाली कुसुमा काशिल मंदिर फूल ढव, ढुला घर में फूल ढव समेत कई अन्य चांचरियों का गायन किया।