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तलाक के बाद भी दर्ज हो सकता घरेलू हिंसा का मुकदमा

Mon, 22 Apr 2019 11:45 PM IST
दीपक नेगी बागेश्वर।
बागेश्वर। Published by: दीपक नेगी Updated Mon, 22 Apr 2019 11:45 PM IST
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Suicides of domestic violence can be registered even after divorce
प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला
 महिलाएं तलाक के बाद भी घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कर परिवार के भरण पोषण का दावा अदालत में कर सकती हैं। ऐसे ही एक मामले में जिला न्यायालय की न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन ने महत्वपूूर्ण फैसला देते हुए 12 साल से मायके में रह रही और चार साल पूर्व तलाक ले चुकी महिला को 1500 रुपये अतिरिक्त प्रतिमाह अदा करने का आदेश दिया है। पूर्व में पति 1200 रुपये प्रतिमाह देता था। अदालत ने मायके में रह रही पत्नी के साथ हो रहे व्यवहार को आर्थिक हिंसा के दायरे में रखते हुए यह आदेश दिया है।
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बागेश्वर की एक महिला अपने पति से 12 साल से अलग रह रही थी। 2015 में वह एकतरफा तलाक भी ले चुकी थी। अदालत ने पति को 1200 रुपये प्रतिमाह अदा करने के आदेश दिए थे। इस बीच, पुत्री की उम्र 17 साल होने पर महिला को परिवार चलाने के लिए 1200 रुपये प्रतिमाह कम लगे। निर्भया प्रकोष्ठ की अधिवक्ता इंदिरा दानू ने तलाक व धारा 125 में भरण पोषण का आदेश होने के बाद भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दावा पेश किया। कहा कि यह आर्थिक हिंसा का मामला बनता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन ने पति को 1500 रुपये प्रतिमाह भरण पोषण देने का आदेेश दिया। ताजा आदेश के बाद अब पति को 2700 रुपये प्रतिमाह पत्नी व बेटी देने होंगे।
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सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के फैसले बने नजीर
न्यायालय में बहस के दौरान निर्भया अधिवक्ता इंदिरा दानू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शबाना बनाम मो. तालिब अली के केस में तलाक के बाद भी महिला घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करते हुए भरण पोषण का आदेश दिया था। इसी तरह दिल्ली हाईकोर्ट ने सोम निखिल ध्यानी बनाम तान्या ध्यानी के केस में भी तलाक व 125 के भरण पोषण लेने के बाद भी महिला घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कर धारा 20 के तहत राहत प्रदान की थी। 
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कोट
यह अपनी तरह का पहला मामला है। जब 12 साल से पति से अलग रह रही व चार साल पूर्व तलाक ले चुकी महिला ने घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करते हुए धारा 20 के तहत भरण पोषण (धनी अनुतोष) का दावा कर उसे अपने पक्ष में किया हो। यह एक नजीर है। सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के क्रम में यह भी कहा गया है कि घरेलू हिंसा का कानून बनने से पूर्व भी यदि हिंसा हुई हो तो वह भी घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की अधिकारी होंगी। - इंदिरा दानू, वरिष्ठ अधिवक्ता, निर्भया बागेश्वर
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