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Bageshwar News: ऋण की अदायगी करने पर ही मिलेगी सब्सिडी
Tue, 26 Sep 2023 12:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 26 Sep 2023 12:05 AM IST
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बागेश्वर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल और सदस्य हंसी रौतेला ने सब्सिडी चाहने के लिए दाखिल परिवाद को निरस्त किया। आयोग ने कहा कि बैंक शिकायतकर्ता की ओर से लिए गए ऋण की पूरी अदायगी होने पर ही नियमानुसार सब्सिडी की राशि अदा करेगा।
शिकायतकर्ता करुली निवासी राजेंद्र सिंह खेतवाल पुत्र पान सिंह ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत वाहन मद में बैंक ऑफ बड़ौदा से ऋण लिया था। जब वह ऋण अदा नहीं कर पाया तो बैंक ने न्यायालय में वाद दायर किया। न्यायालय के आदेश के बाद शिकायतकर्ता की चल-अचल संपत्ति को कुर्क कर उससे वसूली की गई और समझौते के आधार पर वाद का निस्तारण किया।
इधर, ऋण की अदायगी के बाद पर्यटन विभाग की ओर से शिकायतकर्ता के सब्सिडी की राशि 2,28,750 के भुगतान के लिए बैंक को भेजी और शिकायतकर्ता से बैंक से सब्सिडी प्राप्त करने को कहा, लेकिन जब वह बैंक के सब्सिडी की राशि लेने गया तो बैंक ने भुगतान करने से इनकार कर दिया।
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बैंक का कहना था कि शिकायतकर्ता ने बैंक से 8,59,000 रुपये का ऋण लिया था, लेकिन उसकी चल-अचल संपत्ति कुर्क कराकर बैंक को केवल 3,31,000 रुपये ही मिले हैं। बैंक ने 5,28,000 रुपये का घाटा वहन किया है। शिकायतकर्ता ने सब्सिडी के लिए आयोग में प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा और जिला पर्यटन अधिकारी के खिलाफ वाद दायर किया था।
एक सदस्य ने सुनाया अलग फैसला
बागेश्वर। इसी मामले में आयोग के सदस्य रमेश चंद्र सनवाल ने पृथक से फैसला सुनाया है। उन्होंने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा को सब्सिडी के 2,28,750 रुपये समेत मानसिक कष्ट के रूप में 10,000 रुपये और अन्य खर्चा 15,000 रुपये मिलाकर कुल 2,53,750 रुपये मय ब्याज बैंक से दिलाए जाने का निर्णय सुनाया है।
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शिकायतकर्ता करुली निवासी राजेंद्र सिंह खेतवाल पुत्र पान सिंह ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत वाहन मद में बैंक ऑफ बड़ौदा से ऋण लिया था। जब वह ऋण अदा नहीं कर पाया तो बैंक ने न्यायालय में वाद दायर किया। न्यायालय के आदेश के बाद शिकायतकर्ता की चल-अचल संपत्ति को कुर्क कर उससे वसूली की गई और समझौते के आधार पर वाद का निस्तारण किया।
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इधर, ऋण की अदायगी के बाद पर्यटन विभाग की ओर से शिकायतकर्ता के सब्सिडी की राशि 2,28,750 के भुगतान के लिए बैंक को भेजी और शिकायतकर्ता से बैंक से सब्सिडी प्राप्त करने को कहा, लेकिन जब वह बैंक के सब्सिडी की राशि लेने गया तो बैंक ने भुगतान करने से इनकार कर दिया।
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बैंक का कहना था कि शिकायतकर्ता ने बैंक से 8,59,000 रुपये का ऋण लिया था, लेकिन उसकी चल-अचल संपत्ति कुर्क कराकर बैंक को केवल 3,31,000 रुपये ही मिले हैं। बैंक ने 5,28,000 रुपये का घाटा वहन किया है। शिकायतकर्ता ने सब्सिडी के लिए आयोग में प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा और जिला पर्यटन अधिकारी के खिलाफ वाद दायर किया था।
एक सदस्य ने सुनाया अलग फैसला
बागेश्वर। इसी मामले में आयोग के सदस्य रमेश चंद्र सनवाल ने पृथक से फैसला सुनाया है। उन्होंने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा को सब्सिडी के 2,28,750 रुपये समेत मानसिक कष्ट के रूप में 10,000 रुपये और अन्य खर्चा 15,000 रुपये मिलाकर कुल 2,53,750 रुपये मय ब्याज बैंक से दिलाए जाने का निर्णय सुनाया है।