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मार्च तक बर्फ के आगोश में रहेंगे हिमालयी क्षेत्र के गांव
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बागेश्वर का हिमालय की तलहटी में बसा अंतिम गांव खाती। (फाइल फोटो)
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। हिमालयी क्षेत्र के गांव मार्च तक बर्फ के आगोश में रहेंगे। इन गांवों के लिए मार्च तक का राशन पहले ही डंप कर दिया जाता है। इस बार भी राशन हिमालयी क्षेत्र के गोदामों के लिए भेज दिया गया है।
हिमालयी क्षेत्र से सटे खातीगांव, बदियाकोट, वाछम, कर्मी, उंगिया, किलपारा, कुंवारी, मल्लाडुंगर्चा, तलाई आदि में नवंबर से मार्च तक करीब पांच महीने तक बर्फबारी के कारण आवागमन प्रभावित हो जाता है। अभी बर्फबारी नहीं हुई है। सोमवार को हिमालय की चोटियों पर हल्की बर्फबारी हुई। आने वाले दिनों में बर्फबारी की प्रबल संभावना है। पूर्ति निरीक्षक बबलू पांडे ने बताया कि खातीगांव, बदियाकोट, वाछम, कर्मी, उंगिया, मल्लाडुंगर्चा, तलाई के खाद्य गोदामों में अक्तूबर की शुरुआत में छह महीने का राशन भिजवा दिया था। इन गोदामों में करीब दो हजार क्विंटल गेहूं, चावल भेजा गया था, जो राशन विक्रेताओं के पास पहुंच गया है। हिमालयी क्षेत्र के गांवों में मार्च तक राशन की कमी नहीं होगी।
हिमालयी क्षेत्र से सटे गांव कर्मी में बिजली सुविधा है। उंगिया, मल्लाडुंगर्चा, बदियाकोट में पनबिजली परियोजना से बिजली दी जाती है। खाती, किलपारा, कुंवारी में बिजली नहीं है। इन गांवों को हंस फाउंडेशन ने सौरऊर्जा से आच्छादित किया है। वाछम के खड़किया तोक में रहने वाले 10 परिवारों को यूपीसीएल की बिजली मिलती है। 11 परिवारों को हंस फाउंडेशन ने सोलर पैनल दिलाए हैं। हिमालयी क्षेत्र के गांवों में हंस फाउंडेशन की पेयजल योजनाएं हैं। प्राकृतिक स्रोत भी बहुत हैं। इस वजह से पानी की कमी नहीं रहती।
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पिथौरागढ़ के गोदाम भी हुए पैक
पिथौरागढ़। शीतकाल को देखते हुए प्रशासन ने पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में खाद्यान्न की आपूर्ति कर दी है। सभी गोदामों में खाद्यान्न पहुंचाने के बाद सस्ता गल्ला की दुकानों में राशन पहुंचा दिया है।
पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील क्षेत्र के व्यास और दारमा घाटी में हर साल नवंबर माह से हिमपात शुरू हो जाता है। इसे देखते हुए पूर्ति विभाग ने इन गांवों के लिए नजदीकी गोदामों में पहले ही राशन पहुंचा दिया था। इसी तरह से मुनस्यारी गोदामों में भी गेहूं और चावल पहुंचा दिया गया है। पिथौरागढ़ के जिला पूर्ति अधिकारी एमएस रावत ने बताया कि धारचूला और मुनस्यारी के 11 गोदामों के माध्यम से सस्ते गल्ले की सभी दुकानों पर खाद्यान्न भिजवा दिया गया है।
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हिमालयी क्षेत्र से सटे खातीगांव, बदियाकोट, वाछम, कर्मी, उंगिया, किलपारा, कुंवारी, मल्लाडुंगर्चा, तलाई आदि में नवंबर से मार्च तक करीब पांच महीने तक बर्फबारी के कारण आवागमन प्रभावित हो जाता है। अभी बर्फबारी नहीं हुई है। सोमवार को हिमालय की चोटियों पर हल्की बर्फबारी हुई। आने वाले दिनों में बर्फबारी की प्रबल संभावना है। पूर्ति निरीक्षक बबलू पांडे ने बताया कि खातीगांव, बदियाकोट, वाछम, कर्मी, उंगिया, मल्लाडुंगर्चा, तलाई के खाद्य गोदामों में अक्तूबर की शुरुआत में छह महीने का राशन भिजवा दिया था। इन गोदामों में करीब दो हजार क्विंटल गेहूं, चावल भेजा गया था, जो राशन विक्रेताओं के पास पहुंच गया है। हिमालयी क्षेत्र के गांवों में मार्च तक राशन की कमी नहीं होगी।
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हिमालयी क्षेत्र से सटे गांव कर्मी में बिजली सुविधा है। उंगिया, मल्लाडुंगर्चा, बदियाकोट में पनबिजली परियोजना से बिजली दी जाती है। खाती, किलपारा, कुंवारी में बिजली नहीं है। इन गांवों को हंस फाउंडेशन ने सौरऊर्जा से आच्छादित किया है। वाछम के खड़किया तोक में रहने वाले 10 परिवारों को यूपीसीएल की बिजली मिलती है। 11 परिवारों को हंस फाउंडेशन ने सोलर पैनल दिलाए हैं। हिमालयी क्षेत्र के गांवों में हंस फाउंडेशन की पेयजल योजनाएं हैं। प्राकृतिक स्रोत भी बहुत हैं। इस वजह से पानी की कमी नहीं रहती।
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पिथौरागढ़ के गोदाम भी हुए पैक
पिथौरागढ़। शीतकाल को देखते हुए प्रशासन ने पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में खाद्यान्न की आपूर्ति कर दी है। सभी गोदामों में खाद्यान्न पहुंचाने के बाद सस्ता गल्ला की दुकानों में राशन पहुंचा दिया है।
पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील क्षेत्र के व्यास और दारमा घाटी में हर साल नवंबर माह से हिमपात शुरू हो जाता है। इसे देखते हुए पूर्ति विभाग ने इन गांवों के लिए नजदीकी गोदामों में पहले ही राशन पहुंचा दिया था। इसी तरह से मुनस्यारी गोदामों में भी गेहूं और चावल पहुंचा दिया गया है। पिथौरागढ़ के जिला पूर्ति अधिकारी एमएस रावत ने बताया कि धारचूला और मुनस्यारी के 11 गोदामों के माध्यम से सस्ते गल्ले की सभी दुकानों पर खाद्यान्न भिजवा दिया गया है।