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Bageshwar News: साग-सब्जियों के दुश्मन स्नेल का जड़ से होगा सफाया
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दौफाड़ में किसान दीवान सिंह को स्नेल किल कीटनाशक देते केवीके के पादप विशेषज्ञ हरीश जोशी। संवाद
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। पहाड़ों में जंगली सुअर और बंदर के अलावा स्नेल (घोंघा या गनेल) भी खेतीबाड़ी को नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीण इलाकों में यह जीव तेजी से अपनी पैठ बनाता जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद विशेषज्ञों ने स्नेल से फसलों को बचाने के लिए परीक्षण किए। इसके आधार इसके खात्मे के लिए मेटल्डिहाइड को उपयुक्त पाया गया।
दोफाड़, थर्प, गोगिनापानी आदि गांवों के किसानों ने कृषि विभाग और केवीके से स्नेल के प्रकोप को लेकर शिकायत की थी। विवेेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा की शाखा कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के पादप विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने दोफाड़ गांव में स्नेल को खत्म करने के लिए तीन परीक्षण किए, जिनमें स्नेल किल का उपयोग सबसे कारगर साबित हुआ। केवीके ने कृषि विभाग से किसानों को यह रसायन उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
ये तीन परीक्षण किए
01- एक किलो तंबाकू के कचरे को 10ली. पानी में उबालने के बाद 10ली. पानी मिलाकर छिड़काव किया गया। यह प्रयोग केवल 10 प्रतिशत ही प्रभावी रहा।
02 - रोजमैरी के तेल से बने हर्बल उत्पादों का छिड़काव किया गया। यह प्रयोग भी 20 से 25 प्रतिशत ही प्रभाव छोड़ सका।
03- काफी खोजबीन के बाद स्नेल किल (मेटल्डिहाइड) का परीक्षण किया। यह परीक्षण कामयाब रहा और 80 प्रतिशत तक स्नेल का खात्मा हो गया।
नमक के प्रयोग से उर्वरा शक्ति होती है नष्ट
बागेश्वर। घोंघा या स्नेल का जीवन चक्र दो से तीन साल का होता है। यह एक बार में 80 अंडे तक देता है और तीन से छह माह में अंडे देने के लिए परिपक्व हो जाता है। यह जीव सब्जियों की पत्तियों और तनों को काटकर खत्म कर देता है। सीमित संख्या में होने पर इन्हें जैविक या हर्बल विधि से कम किया जा सकता है लेकिन संख्या अधिक होने पर रसायन का उपयोग करना जरूरी है। कुछ लोग इसे मारने के लिए नमक का प्रयोग करते हैं, लेकिन इस विधि से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।
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गनेल के बढ़ते प्रकोप से हमारे गांव में सब्जियों को काफी नुकसान होने लगा था। तंबाकू का कचरा और हर्बल मैजिक स्प्रे भी कारगर नहीं रहा। स्नेल किल से गनेल की संख्या कम हुई है। कृषि विभाग से इस रसायन को मंगाने और किसानों को सब्सिडी में उपलब्ध कराने की मांग की है। - दीवान सिंह कालाकोटी, लाभार्थी किसान, दोफाड़
घोंघा या गनेल के खात्मे के लिए मैटेल्डिहाउड परीक्षण में खरी उतरी है। 2.5 प्रतिशत मैटेल्डिहाउड की टिकिया को 100 ग्राम प्रतिनाली की दर से छिड़काव करने पर इसका व्यापक असर होता है। कृषि विभाग और केवीके के माध्यम से किसान इस दवा को प्राप्त कर सकते हैं। - डॉ. कमल कुमार पांडेय, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर
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दोफाड़, थर्प, गोगिनापानी आदि गांवों के किसानों ने कृषि विभाग और केवीके से स्नेल के प्रकोप को लेकर शिकायत की थी। विवेेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा की शाखा कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के पादप विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने दोफाड़ गांव में स्नेल को खत्म करने के लिए तीन परीक्षण किए, जिनमें स्नेल किल का उपयोग सबसे कारगर साबित हुआ। केवीके ने कृषि विभाग से किसानों को यह रसायन उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
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ये तीन परीक्षण किए
01- एक किलो तंबाकू के कचरे को 10ली. पानी में उबालने के बाद 10ली. पानी मिलाकर छिड़काव किया गया। यह प्रयोग केवल 10 प्रतिशत ही प्रभावी रहा।
02 - रोजमैरी के तेल से बने हर्बल उत्पादों का छिड़काव किया गया। यह प्रयोग भी 20 से 25 प्रतिशत ही प्रभाव छोड़ सका।
03- काफी खोजबीन के बाद स्नेल किल (मेटल्डिहाइड) का परीक्षण किया। यह परीक्षण कामयाब रहा और 80 प्रतिशत तक स्नेल का खात्मा हो गया।
नमक के प्रयोग से उर्वरा शक्ति होती है नष्ट
बागेश्वर। घोंघा या स्नेल का जीवन चक्र दो से तीन साल का होता है। यह एक बार में 80 अंडे तक देता है और तीन से छह माह में अंडे देने के लिए परिपक्व हो जाता है। यह जीव सब्जियों की पत्तियों और तनों को काटकर खत्म कर देता है। सीमित संख्या में होने पर इन्हें जैविक या हर्बल विधि से कम किया जा सकता है लेकिन संख्या अधिक होने पर रसायन का उपयोग करना जरूरी है। कुछ लोग इसे मारने के लिए नमक का प्रयोग करते हैं, लेकिन इस विधि से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।
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गनेल के बढ़ते प्रकोप से हमारे गांव में सब्जियों को काफी नुकसान होने लगा था। तंबाकू का कचरा और हर्बल मैजिक स्प्रे भी कारगर नहीं रहा। स्नेल किल से गनेल की संख्या कम हुई है। कृषि विभाग से इस रसायन को मंगाने और किसानों को सब्सिडी में उपलब्ध कराने की मांग की है। - दीवान सिंह कालाकोटी, लाभार्थी किसान, दोफाड़
घोंघा या गनेल के खात्मे के लिए मैटेल्डिहाउड परीक्षण में खरी उतरी है। 2.5 प्रतिशत मैटेल्डिहाउड की टिकिया को 100 ग्राम प्रतिनाली की दर से छिड़काव करने पर इसका व्यापक असर होता है। कृषि विभाग और केवीके के माध्यम से किसान इस दवा को प्राप्त कर सकते हैं। - डॉ. कमल कुमार पांडेय, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर

बागेश्वर के दोफाड़ में स्नेल किल कीटनाशक के प्रयोग से मरे घोंघा। संवाद - फोटो : BAGESHWAR