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अपने ही घर में मैली हुई सरयू
ब्यूरो /अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Mon, 02 Nov 2015 10:28 PM IST
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झूनी गांव की पहाड़ी से अयोध्या तक बह रही सरयू अपने ही घर में मैली है। नगर में सीवरेज न होने के कारण गंदे नालों इसी नदी में खुलते हैं जबकि कपकोट भराड़ी में नदी के तट को ही कूड़ा फेंकने के अड्डा बना दिया है। वहां कई ने तो अपने शौचालयों के पिट भी इसी के किनारे बना दिए हैं। सरयू को प्रदूषणमुक्त कराने में जहां शासन-प्रशासन चुप बैठा है वहीं पर्यावरण के नाम पर देश-विदेश से धन लाने वालों को भी गंदगी में डूबी इस नदी की स्वच्छता की कोई फिक्र नहीं है।
शिव पुराण के मानस खंड में सरयू का विषद वर्णन है। पुराण के अनुसार अनादिकाल में मुनिश्रेष्ठ वशिष्ठ सरयू को मानसरोवर से लाए। नदी का अवतरण कपकोट के विकास खंड के अंतिम गांव झूनी के सामने की पहाड़ी से हुआ। पुराण के अनुसार यही नदी श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या तक जाती है। रामायण में गोस्वामी तुलसीदास ने सरयू नाम सुमंगल मूला, सब सिद्धि करनि हरनि सब सूला लिखकर सरयू का गुणगान किया है। सरयू के जल को गंगा के जल के समान ही माना गया है। इसी नदी से नगर और खरेही पट्टी के लोगों की प्यास बुझ रही है। नगर में सीवरेज न होने के कारण सारे गंदे नालों का निकास इसी नदी में ही है। राज्य सरकार ने स्पर्श गंगा अभियान और केंद्र सरकार ने संपूर्ण स्वचछता अभियान चलाया है, लेकिन इनका लाभ इस नदी को नहीं मिल पा रहा है। शहर और कस्बाई क्षेत्रों में इसके तट पर शौच करने वालों कोई कमी नहीं है। नगर में संगम, बालीघाट, कपकोट, हरसीला, गांसू, डोटिला, सुमगढ़ समेत कई अन्य स्थानों पर शवदाह भी इसी के तट पर होता है। शवदाह से बची लकड़ियों को नदी में बहा दिया जाता है। वृक्षमित्र किशन सिंह मलड़ा ने केंद्र सरकार से सरयू की निर्मलता बनाए रखने के लिए गंगा की तर्ज पर सरयू विकास प्राधिकरण बनाने की मांग की है। वह जल्दी ही नदी के जल के संरक्षण के लिए इसके किनारे विभिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण करेंगे। इस दौरान नदी को स्वच्छ रखने के लिए लोगों से अपील की जाएगी।
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शिव पुराण के मानस खंड में सरयू का विषद वर्णन है। पुराण के अनुसार अनादिकाल में मुनिश्रेष्ठ वशिष्ठ सरयू को मानसरोवर से लाए। नदी का अवतरण कपकोट के विकास खंड के अंतिम गांव झूनी के सामने की पहाड़ी से हुआ। पुराण के अनुसार यही नदी श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या तक जाती है। रामायण में गोस्वामी तुलसीदास ने सरयू नाम सुमंगल मूला, सब सिद्धि करनि हरनि सब सूला लिखकर सरयू का गुणगान किया है। सरयू के जल को गंगा के जल के समान ही माना गया है। इसी नदी से नगर और खरेही पट्टी के लोगों की प्यास बुझ रही है। नगर में सीवरेज न होने के कारण सारे गंदे नालों का निकास इसी नदी में ही है। राज्य सरकार ने स्पर्श गंगा अभियान और केंद्र सरकार ने संपूर्ण स्वचछता अभियान चलाया है, लेकिन इनका लाभ इस नदी को नहीं मिल पा रहा है। शहर और कस्बाई क्षेत्रों में इसके तट पर शौच करने वालों कोई कमी नहीं है। नगर में संगम, बालीघाट, कपकोट, हरसीला, गांसू, डोटिला, सुमगढ़ समेत कई अन्य स्थानों पर शवदाह भी इसी के तट पर होता है। शवदाह से बची लकड़ियों को नदी में बहा दिया जाता है। वृक्षमित्र किशन सिंह मलड़ा ने केंद्र सरकार से सरयू की निर्मलता बनाए रखने के लिए गंगा की तर्ज पर सरयू विकास प्राधिकरण बनाने की मांग की है। वह जल्दी ही नदी के जल के संरक्षण के लिए इसके किनारे विभिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण करेंगे। इस दौरान नदी को स्वच्छ रखने के लिए लोगों से अपील की जाएगी।
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