{"_id":"6223b245807bc8475b2e3875","slug":"sale-of-dholak-in-bageshwar-bageshwar-news-hld455578849","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब पहले की अपेक्षा होली में काफी कम बिकते हैं ढोलक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब पहले की अपेक्षा होली में काफी कम बिकते हैं ढोलक
विज्ञापन
बागेश्वर में ढोलक बेचते व्यापारी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। मंदी और कोरोना की मार ढोलक व्यवसायियों पर भी पड़ रही है। हर साल होली के सीजन में बरेली, बहेड़ी, हल्द्वानी आदि से ढोलक व्यवसायी ढोलक बेचने पहुंचते हैं। अब पहले की अपेक्षा काफी कम ढोलक बिकते हैं।
बदलते दौर का असर होली पर भी पड़ा है। होली के लिए नई पीढ़ी में उत्साह नहीं दिखाई देता है। नई पीढ़ी के लोग पहाड़ की आम संस्कृति के साथ ही होली से भी विमुख रहते हैं। पुराने जमाने में होली की धूम मची रहती थी। घर-घर में होली गीतों का गायन होता था। ढोलक भी खूब बिकते थे। अब इसमें कमी आई है।
हल्द्वानी से ढोलक बेचने आए गब्बर ने बताया कि वे पिछले 16 वर्षों से बागेश्वर में होली के सीजन में ढोलक बेचने आ रहा है। इस बार हल्द्वानी, बरेली, बहेड़ी से आठ लोग बागेश्वर के विभिन्न इलाकों में ढोलक बेच रहे हैं। कहते हैं कि पहले हर घर में ढोलक होता था। लोग होली पर नया ढोलकर खरीदते थे। पुराने ढोलकों की मरम्मत कराते थे। अब बिक्री में काफी कमी आ गई है। कोरोना काल में ढोलक व्यवसाय खासा प्रभावित हुआ है। बताया कि उनके पास 400 से दो हजार रुपये कीमत के ढोलक हैं। लोग पुरानी ढोलक की मरम्मत करा रहे हैं। नई ढोलक भी बिक रही हैं लेकिन पहले की अपेक्षा काफी कम लोग इसकी मांग करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बदलते दौर का असर होली पर भी पड़ा है। होली के लिए नई पीढ़ी में उत्साह नहीं दिखाई देता है। नई पीढ़ी के लोग पहाड़ की आम संस्कृति के साथ ही होली से भी विमुख रहते हैं। पुराने जमाने में होली की धूम मची रहती थी। घर-घर में होली गीतों का गायन होता था। ढोलक भी खूब बिकते थे। अब इसमें कमी आई है।
विज्ञापन
हल्द्वानी से ढोलक बेचने आए गब्बर ने बताया कि वे पिछले 16 वर्षों से बागेश्वर में होली के सीजन में ढोलक बेचने आ रहा है। इस बार हल्द्वानी, बरेली, बहेड़ी से आठ लोग बागेश्वर के विभिन्न इलाकों में ढोलक बेच रहे हैं। कहते हैं कि पहले हर घर में ढोलक होता था। लोग होली पर नया ढोलकर खरीदते थे। पुराने ढोलकों की मरम्मत कराते थे। अब बिक्री में काफी कमी आ गई है। कोरोना काल में ढोलक व्यवसाय खासा प्रभावित हुआ है। बताया कि उनके पास 400 से दो हजार रुपये कीमत के ढोलक हैं। लोग पुरानी ढोलक की मरम्मत करा रहे हैं। नई ढोलक भी बिक रही हैं लेकिन पहले की अपेक्षा काफी कम लोग इसकी मांग करते हैं।
विज्ञापन