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कोरोना के चलते अपनी माटी पर लौटे परदेशियों के लिए तलाशी जा रही रोजगार की संभावना
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बागेश्वर। कोरोना संक्रमण के चलते महानगरों से करीब तीन हजार लोग जिले में लौटे हैं। इन लोगों से सरकार रिवर्स पलायन की उम्मीद कर रही है। इन लोगों को घर पर रोजगार दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य का पलायन आयोग घर लौटे परदेसियों की बाकायदा सर्वे करवा रहा है। इसमें उनकी इच्छा जानी जा रही है।
जिले के 407 गांवों में से 204 गांव पलायन की मार झेल रहे हैं। उत्तराखंड पलायन आयोग की 30 अप्रैल 2018 को जारी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 37 गांवों से 50 प्रतिशत से अधिक पलायन हुआ है। इन गांवों में आधे से भी कम लोग रह गए हैं। इनमें से अधिकतर परिवार स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी असुविधाओं के कारण शहरों में बस गए हैं। गांवों के युवा रोजगार की तलाश में बाहरी राज्यों की खाक छान रहे हैं। इनमें से 2940 लोग मार्च में ही लौट आए थे। उसके बाद भी तमाम लोग घर लौटे हैं। इनमें अधिकतर 20 से 45 आयुवर्ग के लोग हैं। सरकार की कवायद है कि घर लौटे लोगों को रिवर्स पलायन के तहत गांव में ही रोजगार दिलाया जाए। बाकायदा राज्य पलायन आयोग ने जिलेवार आंकड़े मंगाए हैं। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण घर लौटे लोगों की राय जान रहा है। उनका डाटा एकत्र जुटा रहा है। यह डाटा पलायन आयोग के पास भेजा जाएगा।
कवायद रंग लाई तो उजड़े गांवों में फिर आएगी बहार
बागेश्वर। सरकार और पलायन आयोग की कवायद रंग लाई तो पलायन के कारण उजड़े गांवों में फिर बहार आ सकती है। जिले के कपकोट, गरुड़, कांडा क्षेत्र के साथ ही जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों के युवाओं ने रोजगार के लिए महानगरों का रुख किया है। कई गांवों में बहुत कम परिवार ही बचे हैं। सरकार बाहरी प्रदेशों में निजी सेक्टर में काम कर रहे युवाओं के लिए घर पर रोजगार दिला सकती है तो यह पलायन की मार झेल रहे गांवों के साथ ही युवाओं के लिए सुकूनदायक होगी।
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राज्य पलायन आयोग के निर्देश पर लॉकडाउन के दौरान घर लौटे लोगों का डाटा जुटाया जा रहा है। उनकी राय जानी जा रही है। उनको मनरेगा, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार दिलाया जाएगा। रोजगार के इच्छुक लोगों को उद्योग विभाग के जरिये उद्यम लगाने में भी मदद दिलाई जाएगी। डाटा एकत्र होने के बाद पलायन आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
- केएन तिवारी, डीडीओ, बागेश्वर।
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जिले के 407 गांवों में से 204 गांव पलायन की मार झेल रहे हैं। उत्तराखंड पलायन आयोग की 30 अप्रैल 2018 को जारी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 37 गांवों से 50 प्रतिशत से अधिक पलायन हुआ है। इन गांवों में आधे से भी कम लोग रह गए हैं। इनमें से अधिकतर परिवार स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी असुविधाओं के कारण शहरों में बस गए हैं। गांवों के युवा रोजगार की तलाश में बाहरी राज्यों की खाक छान रहे हैं। इनमें से 2940 लोग मार्च में ही लौट आए थे। उसके बाद भी तमाम लोग घर लौटे हैं। इनमें अधिकतर 20 से 45 आयुवर्ग के लोग हैं। सरकार की कवायद है कि घर लौटे लोगों को रिवर्स पलायन के तहत गांव में ही रोजगार दिलाया जाए। बाकायदा राज्य पलायन आयोग ने जिलेवार आंकड़े मंगाए हैं। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण घर लौटे लोगों की राय जान रहा है। उनका डाटा एकत्र जुटा रहा है। यह डाटा पलायन आयोग के पास भेजा जाएगा।
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कवायद रंग लाई तो उजड़े गांवों में फिर आएगी बहार
बागेश्वर। सरकार और पलायन आयोग की कवायद रंग लाई तो पलायन के कारण उजड़े गांवों में फिर बहार आ सकती है। जिले के कपकोट, गरुड़, कांडा क्षेत्र के साथ ही जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों के युवाओं ने रोजगार के लिए महानगरों का रुख किया है। कई गांवों में बहुत कम परिवार ही बचे हैं। सरकार बाहरी प्रदेशों में निजी सेक्टर में काम कर रहे युवाओं के लिए घर पर रोजगार दिला सकती है तो यह पलायन की मार झेल रहे गांवों के साथ ही युवाओं के लिए सुकूनदायक होगी।
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राज्य पलायन आयोग के निर्देश पर लॉकडाउन के दौरान घर लौटे लोगों का डाटा जुटाया जा रहा है। उनकी राय जानी जा रही है। उनको मनरेगा, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार दिलाया जाएगा। रोजगार के इच्छुक लोगों को उद्योग विभाग के जरिये उद्यम लगाने में भी मदद दिलाई जाएगी। डाटा एकत्र होने के बाद पलायन आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
- केएन तिवारी, डीडीओ, बागेश्वर।