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आक्रामक बंदरों से परेशान हैं खबडोली वासी
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बागेश्वर। जिला मुख्यालय के गांव खबडोली में आक्रामक बंदरों का आतंक बढ़ गया है। पिछले एक महीने में बंदरों ने गांव की तीन महिलाओं सहित सात लोगों को जख्मी किया। बंदरों के आतंक से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द बंदरों से निजात दिलाने की मांग की है।
गांव के भुवन कांडपाल, गीता कांडपाल, भावना कांडपाल, हरीश सिंह, नारायण राम, उमेश और लछीमा देवी को बंदरों ने काटकर जख्मी किया। उन्हें रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर खेत में फसल और सब्जियों को उजाड़ने के साथ ही घरों के भीतर से भी सामान उठा ले जाते हैं। भगाने पर वे काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। भुवन ने बताया कि पिछले सप्ताह बंदर ने कमरे के भीतर आकर मुझ पर हमला कर दिया।
अब गांव में रहने में भी डर लगने लगा है। वहीं गीता कांडपाल ने बताया कि दस दिन पहले बंदरों के झुंड ने हमला कर मुझे जख्मी कर दिया था। एक बंदर ने हाथ पर काट लिया था, जिसमें पांच टांके लगवाने पड़े। बंदरों के डर से लोगों को हर समय हाथ में पत्थर या लाठी लेकर चलना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर जल्द इन कटखने बंदरों से निजात नहीं मिली तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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गांव के भुवन कांडपाल, गीता कांडपाल, भावना कांडपाल, हरीश सिंह, नारायण राम, उमेश और लछीमा देवी को बंदरों ने काटकर जख्मी किया। उन्हें रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर खेत में फसल और सब्जियों को उजाड़ने के साथ ही घरों के भीतर से भी सामान उठा ले जाते हैं। भगाने पर वे काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। भुवन ने बताया कि पिछले सप्ताह बंदर ने कमरे के भीतर आकर मुझ पर हमला कर दिया।
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अब गांव में रहने में भी डर लगने लगा है। वहीं गीता कांडपाल ने बताया कि दस दिन पहले बंदरों के झुंड ने हमला कर मुझे जख्मी कर दिया था। एक बंदर ने हाथ पर काट लिया था, जिसमें पांच टांके लगवाने पड़े। बंदरों के डर से लोगों को हर समय हाथ में पत्थर या लाठी लेकर चलना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर जल्द इन कटखने बंदरों से निजात नहीं मिली तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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