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Bageshwar News: बघर से सुंदरढूंगा के लिए रवाना हुई धार्मिक यात्रा
Mon, 18 Sep 2023 11:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 18 Sep 2023 11:34 PM IST
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बागेश्वर के बघर से सुंदरढूंगा की धार्मिक यात्रा पर रवाना होता बसेड़ा बिरादरी के श्रद्धालु। संवा
बागेश्वर। नंदा राजजात की तर्ज पर होने वाली बसेड़ा वंशजों की सुंदरढूंगा यात्रा का शुभारंभ हो गया है। नौ साल बाद आयोजित धार्मिक यात्रा में पांच श्रद्धालु शिरकत कर रहे हैं। 22 सितंबर को यात्री सुंदरढूंगा से पवित्र ब्रह्मकमल लेकर लौटेंगे। 23 सितंबर को बघर गांव के भगवती मंदिर में होने वाली मुख्य पूजा में मां भगवती को यह फूल अर्पित किया जाएगा। पूजा में बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के बसेड़ा वंशज भागीदारी कर रहे हैं।
बसेड़ा वंशजों की धार्मिक यात्रा 200 साल पुरानी मानी जाती है। बघर गांव के डाना तोक में स्थित इस डाना मंदिर से यात्रा सुंदरढूंगा तक जाती है। पूर्व में नंदा राजजात की तर्ज पर इस यात्रा की अगुवाई भी चौसिंगा भेड़ करता था। इससे पूर्व वर्ष 2014 में यात्रा का आयोजन किया गया था।
धार्मिक आयोजन में कपकोट के विभिन्न गांवों के अलावा पिथौरागढ़ जिले में रहने वाले बसेड़ा बिरादरी के लोगों को आमंत्रित किया जाता है। यात्रा में प्रताप सिंह बसेड़ा, आनंद सिंह बसेड़ा, नरेंद्र सिंह बसेड़ा, त्रिलोक सिंह बसेड़ा, महिपाल सिंह बसेड़ा शामिल हैं।
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वाछम गांव में बनते हैं यात्रा के छत्र
बागेश्वर। सुंदरढूंगा की धार्मिक यात्रा में प्रयोग किए जाने वाले छत्र का निर्माण शुरुआत से अब तक वाछम गांव के लोग ही करते आ रहे हैं। यात्रा जिन गांवों से गुजरेगी, वहां के लोग छत पर भेंट बांधते हैं। इस भेंट को अष्टमी के दिन होने वाली महापूजा में अर्पित किया जाता है। यात्री विभिन्न पड़ाव पर रुकते हुए पंचमी को सुंदरढूंगा पहुंचते हैं और वहां से पूजा अर्चना के बाद ब्रह्मकमल लेकर वापसी करते हैं।
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बसेड़ा वंशजों की धार्मिक यात्रा 200 साल पुरानी मानी जाती है। बघर गांव के डाना तोक में स्थित इस डाना मंदिर से यात्रा सुंदरढूंगा तक जाती है। पूर्व में नंदा राजजात की तर्ज पर इस यात्रा की अगुवाई भी चौसिंगा भेड़ करता था। इससे पूर्व वर्ष 2014 में यात्रा का आयोजन किया गया था।
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धार्मिक आयोजन में कपकोट के विभिन्न गांवों के अलावा पिथौरागढ़ जिले में रहने वाले बसेड़ा बिरादरी के लोगों को आमंत्रित किया जाता है। यात्रा में प्रताप सिंह बसेड़ा, आनंद सिंह बसेड़ा, नरेंद्र सिंह बसेड़ा, त्रिलोक सिंह बसेड़ा, महिपाल सिंह बसेड़ा शामिल हैं।
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वाछम गांव में बनते हैं यात्रा के छत्र
बागेश्वर। सुंदरढूंगा की धार्मिक यात्रा में प्रयोग किए जाने वाले छत्र का निर्माण शुरुआत से अब तक वाछम गांव के लोग ही करते आ रहे हैं। यात्रा जिन गांवों से गुजरेगी, वहां के लोग छत पर भेंट बांधते हैं। इस भेंट को अष्टमी के दिन होने वाली महापूजा में अर्पित किया जाता है। यात्री विभिन्न पड़ाव पर रुकते हुए पंचमी को सुंदरढूंगा पहुंचते हैं और वहां से पूजा अर्चना के बाद ब्रह्मकमल लेकर वापसी करते हैं।