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भिक्षा दे हो कुटी से माता योगी द्वारे आया है...
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Fri, 16 Nov 2018 11:41 PM IST
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कांडा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
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भंतोला की रामलीला में बृहस्पतिवार शाम सीता हरण, जटायु मरण, सीता की खोज, हनुमान मिलन, किष्कंधा में सुग्रीव मित्रता, बालि का वध और सुग्रीव का राजतिलक आदि के दृश्यों का खूबसूरत मंचन किया गया। नकली साधु वेश में रावण ने सीता से भिक्षा दे हो कुटी से माता योगी द्वारे आया है...सीता ने रावण से अरे रावण तू जानता नहीं मेरे पति को...चौपाई गाई।
कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां रामलीला देखने वालों की खासी भीड़ उमड़ रही है। वहां कमेटी के अध्यक्ष कै. पदम सिंह, संरक्षक और बीडीसी सदस्य जोगा सिंह मेहता, प्रबंधक विनोद जोशी, उपाध्यक्ष लक्ष्मण धामी, कोषाध्यक्ष कमल भौर्याल, राधेश्याम जोशी, योगेश जोशी, लीला, चनरा, आनंदी, पुष्पा थीं।
कांडा की रामलीला में सुमंत के जंगल से अयोध्या लौटने, दशरथ विलाप, पुत्र वियोग में दशरथ के देह त्यागने, शत्रुघ्न द्वारा मंथरा को लात मारने, भरत माताओं समेत राम को वन से लौटाने के लिए चित्रकूट में राम और भरत मिलन, भरत के राम की चरण पादुका लेकर नंदीग्राम लौटने के दृश्य का खूबसूरत मंचन किया गया।
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राम, लक्ष्मण और सीता के वन से वापस न लौटा पाने पर अवध में काहे मुुख जाऊं...और नाथ भानु कुल भानु सुनो प्रभो...चौपाई गाई। दशरथ ने हा सिय राम, लखन तुम प्यारे तपसी होकर वन को सिधारे...चौपाई गाई। वहां कमेटी के अध्यक्ष गुंसाई सिंह धपोला, कोषाध्यक्ष रतन सिंह, किशोरी सिंह, व्यवस्थापक हीरा प्रकाश नगरकोटी, बब्लूू कांडपाल, दीप चंद्र, रमेश पांडे, मोहन चंदोला थे।
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कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां रामलीला देखने वालों की खासी भीड़ उमड़ रही है। वहां कमेटी के अध्यक्ष कै. पदम सिंह, संरक्षक और बीडीसी सदस्य जोगा सिंह मेहता, प्रबंधक विनोद जोशी, उपाध्यक्ष लक्ष्मण धामी, कोषाध्यक्ष कमल भौर्याल, राधेश्याम जोशी, योगेश जोशी, लीला, चनरा, आनंदी, पुष्पा थीं।
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कांडा की रामलीला में सुमंत के जंगल से अयोध्या लौटने, दशरथ विलाप, पुत्र वियोग में दशरथ के देह त्यागने, शत्रुघ्न द्वारा मंथरा को लात मारने, भरत माताओं समेत राम को वन से लौटाने के लिए चित्रकूट में राम और भरत मिलन, भरत के राम की चरण पादुका लेकर नंदीग्राम लौटने के दृश्य का खूबसूरत मंचन किया गया।
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राम, लक्ष्मण और सीता के वन से वापस न लौटा पाने पर अवध में काहे मुुख जाऊं...और नाथ भानु कुल भानु सुनो प्रभो...चौपाई गाई। दशरथ ने हा सिय राम, लखन तुम प्यारे तपसी होकर वन को सिधारे...चौपाई गाई। वहां कमेटी के अध्यक्ष गुंसाई सिंह धपोला, कोषाध्यक्ष रतन सिंह, किशोरी सिंह, व्यवस्थापक हीरा प्रकाश नगरकोटी, बब्लूू कांडपाल, दीप चंद्र, रमेश पांडे, मोहन चंदोला थे।