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राजेश ने फूलों की खेती से बदली परिवार की तकदीर
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Fri, 12 Oct 2018 11:31 PM IST
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बागेश्वर में फूलों की खेती के साथ राजेश चौबे।
- फोटो : अमर उजाला
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फूलों की खेती के आइडिए ने बेरोजगारी का दंश झेल रहे राजेश चौबे के परिवार की तकदीर ही बदल डाली। पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की फसल उगाने वाले राजेश अब सालाना तीन लाख रुपये कमा लेते हैं। आत्मनिर्भर राजेश अब दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में हैं।
नौकरी की तलाश में महानगरों की खाक छानकर थक चुके ग्राम छाती निवासी राजेश चौबे ने दस साल पहले घर लौटकर बंजर खेतों को आजीविका का आधार बनाया। शुरू में उन्होंने पारंपरिक खेती को आगे बढ़ाने का कार्य किया लेकिन कुछ फायदा न हुआ। बाद में उद्यान विभाग ने उन्हें व्यावसायिक खेती का सुझाव दिया। उद्यान विभाग की पहल पर राजेश चौबे ने फूलों की खेती में हाथ आजमाया।
उन्होंने एक-दो नाली खेत के साथ फूलों की खेती की शुरूआत की। वर्तमान में राजेश दस नाली जमीन पर फूलों की खेती कर रहे हैं। इस काम में उनके साथ परिवार के छह अन्य सदस्य भी हाथ बंटाते हैं। राजेश को उम्मीद है कि त्यौहारों के सीजन में पिछले साल से ज्यादा व्यापार कर सकेंगे। उनके इस काम से अन्य बेरोजगारों को भी सीख मिलती है।
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बागेश्वर में ही मिल रहा अच्छा बाजार
फूलों की खेती कर रहे राजेश बताते हैं कि बाजार में गेंदा और ग्लेडियस के फूलों की बड़ी मांग है। यहां के परिवेश में गेंदा और ग्लेडियस के फूलों की अच्छी पैदावार हो सकती है। उनके उत्पादित फूल बागेश्वर बाजार में ही हाथों हाथ बिक जाते हैं। नवरात्र, दशहरा, दीपावली आदि पर्वों के साथ ही विभिन्न समारोह में फूूलों की खासी मांग रहती है। राजेश बताते हैं कि अक्सर मांग की तुलना में आपूर्ति ही कम हो जाती है। ब्यूरो
फूलों की खेती में किसानों को काफी लाभ है। विभाग भी ग्रामीणों को बीज आदि सरकारी मदद मुहैया कराता है। सरकारी मदद और अपनी लगन से राजेश चौबे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
- पीएस परिहार, सहायक उद्यान अधिकारी
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नौकरी की तलाश में महानगरों की खाक छानकर थक चुके ग्राम छाती निवासी राजेश चौबे ने दस साल पहले घर लौटकर बंजर खेतों को आजीविका का आधार बनाया। शुरू में उन्होंने पारंपरिक खेती को आगे बढ़ाने का कार्य किया लेकिन कुछ फायदा न हुआ। बाद में उद्यान विभाग ने उन्हें व्यावसायिक खेती का सुझाव दिया। उद्यान विभाग की पहल पर राजेश चौबे ने फूलों की खेती में हाथ आजमाया।
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उन्होंने एक-दो नाली खेत के साथ फूलों की खेती की शुरूआत की। वर्तमान में राजेश दस नाली जमीन पर फूलों की खेती कर रहे हैं। इस काम में उनके साथ परिवार के छह अन्य सदस्य भी हाथ बंटाते हैं। राजेश को उम्मीद है कि त्यौहारों के सीजन में पिछले साल से ज्यादा व्यापार कर सकेंगे। उनके इस काम से अन्य बेरोजगारों को भी सीख मिलती है।
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बागेश्वर में ही मिल रहा अच्छा बाजार
फूलों की खेती कर रहे राजेश बताते हैं कि बाजार में गेंदा और ग्लेडियस के फूलों की बड़ी मांग है। यहां के परिवेश में गेंदा और ग्लेडियस के फूलों की अच्छी पैदावार हो सकती है। उनके उत्पादित फूल बागेश्वर बाजार में ही हाथों हाथ बिक जाते हैं। नवरात्र, दशहरा, दीपावली आदि पर्वों के साथ ही विभिन्न समारोह में फूूलों की खासी मांग रहती है। राजेश बताते हैं कि अक्सर मांग की तुलना में आपूर्ति ही कम हो जाती है। ब्यूरो
फूलों की खेती में किसानों को काफी लाभ है। विभाग भी ग्रामीणों को बीज आदि सरकारी मदद मुहैया कराता है। सरकारी मदद और अपनी लगन से राजेश चौबे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
- पीएस परिहार, सहायक उद्यान अधिकारी