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खतरनाक नहीं पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर
Updated Mon, 11 May 2015 12:18 AM IST
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पिंडारी ग्लेशियर समेत आसपास के दर्शनीय स्थलों को लेकर लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है। दिल्ली के दो युवा पर्यटकसाइकिल से खाती गांव तक गए। वे ग्लेशियर ही नहीं चार दिन में 3650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कौतेला टाप तक का अभियान पूरा करके चार दिन में बागेश्वर लौट आए। इन युवाओं के अनुसार यात्रा कुछ लंबी जरूर हो गई है, लेकिन रास्ते ठीक हैं।
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दिल्ली के वसुंधरा निवासी 23 वर्षीय युधिष्ठिर मंडल और 27 वर्षीय विजय कुमार आपदा से पहले 2012 में भी आए थे। इस बार पूरे इलाके में पहले से अधिक बर्फ है। इस बार वे छह मई की सुबह बागेश्वर से साइकिलों में सवार होकर रवाना हुए और रात को सौंग पहुंचे। सात की सुबह सौंग से चौड़ा, पेठी होते हुए खाती गए। 80 किमी की इस यात्रा के बाद आगे का रास्ता पिंडर के किनारे है।
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आपदा से रास्ता खराब होने के कारण वह खाती में ही साइकिल छोड़कर उसी शाम पैदल द्वाली गए। आठ को द्वाली से उन्होंने कोतेला टाप तक पर्वतारोहण भी किया और रात द्वाली में बिताई। नौ की सुबह पिंडारी ग्लेशियर के आधे रूट का भ्रमण किया। इसके बाद खाती पहुंचकर साइकिल से 10 मई की सुबह बागेश्वर लौट आए।
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उन्होंने बताया कि इस रूट के बारे में आशंकाएं गलत साबित हुई। पिंडारी ग्लेशियर का रास्ता द्वाली के बाद भी ठीक है। चट्टानें खिसक जाने के कारण कफनी ग्लेशियर का रास्ता नदी में समा गया है। इसे ठीक करने में काफी समय लगेगा। उन्होंने बताया कि आपदा के बाद रास्ता कुछ लंबा जरूर हो गया है, लेकिन ट्रेकिंग में कोई दिक्कत नहीं हुई।
ग्लेशियर रूटों की ट्रेकिंग करके लौटे युवा पर्यटकाें ने बताया कि पिंडारी ग्लेशियर के लिए सभी आयु के लोग जा रहे हैं। द्वाली में उन्हें एक 25 सदस्यीय दल मिला, जिसमें बच्चे, उम्रदराज लोग भी थे।