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खुनौली के तल्ला सुन्यूणा में सुअरों ने खेती उजाड़ी
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बागेश्वर के तल्ला सुन्यूणा में सुअरों ने उजाड़ी गडेरी की खेती। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिले के खुनौली ग्रम पंचायत के तल्ला सुन्यूणा में जंगली सुअरों ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। सुअरों ने गडेरी (अरबी) के खेतों को तहस-नहस कर दिया है। गांव में कई वर्षों से सुअरों का आतंक बना हुआ है।
तल्ला सुन्यूणा में जंगली सुअर अक्सर खेती उजाड़ देते हैं। जंगली सुअरों के आतंक के कारण ग्रामीणों को रात में भी पहरा देना पड़ता है। बृहस्पतिवार की रात जंगली सुअरों ने झुंड ने बसंत कांडपाल के गडेरी के खेत को बुरी तरह से रौंद डाला। सुअरों ने गडेरी की फसल को तहस-नहस कर दिया। पौधे उखाड़कर गडेरी खा गए। गांव में लोग बहुतायत में गडेरी की खेती करते हैं। गडेरी का उपयोग करीब 6 माह तक सब्जी के रूप में किया जाता है। सुअरों के आतंक के कारण इस बार गांव के लोगों को गडेरी के स्वाद से वंचित रहना पड़ सकता है।
गांव के दयाधर कांडपाल, बसंत कांडपाल, हरीश कांडपाल, नवीन चंद्र, कमल कवि कांडपाल ने बताया कि गांव में कई वर्षों से सुअरों का आतंक बना हुआ है। सुअरों के आतंक के कारण लोगों को खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। खेतों को सुअरों से बचाने के लिए घेरबाड़ करनी पड़ती है, इसका भी कोई फायदा नहीं मिलता है। सुअरों से हमले का खतरा बना रहता है। इन लोगों ने वन विभाग से सुअरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
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हिंसक जानवर सुअर को मारने के लिए करें आवेदन
बागेश्वर। राज्य सरकार ने जंगली सुअरों को हिंसक जानवर घोषित किया है। सुअरों को मारने का नियम बनाया है। हाल में सुअरों को मारने के नियम को स्थिल करते हुए वन दरोगा, रेंजर स्तर पर आवेदन करने का नियम बनाया है। डीएफओ से भी आवेदन किया जाता है। आवेदन में सुअरों के आतंक का जिक्र करने के साथ ही लाइसेंसधारी स्थानीय शिकारी का नाम देना होता है। वन विभाग से सुअरों को मारने की आसानी से अनुमति मिल जाती है। मृत सुअर को वन कर्मियों की मौजूदगी में दफनाना का नियम है। वन क्षेत्राधिकारी नारायण दत्त पांडे का कहना कि सुअरों के आतंक से परेशान कास्तकारों को इस नियम का लाभ उठाना चाहिए।
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तल्ला सुन्यूणा में जंगली सुअर अक्सर खेती उजाड़ देते हैं। जंगली सुअरों के आतंक के कारण ग्रामीणों को रात में भी पहरा देना पड़ता है। बृहस्पतिवार की रात जंगली सुअरों ने झुंड ने बसंत कांडपाल के गडेरी के खेत को बुरी तरह से रौंद डाला। सुअरों ने गडेरी की फसल को तहस-नहस कर दिया। पौधे उखाड़कर गडेरी खा गए। गांव में लोग बहुतायत में गडेरी की खेती करते हैं। गडेरी का उपयोग करीब 6 माह तक सब्जी के रूप में किया जाता है। सुअरों के आतंक के कारण इस बार गांव के लोगों को गडेरी के स्वाद से वंचित रहना पड़ सकता है।
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गांव के दयाधर कांडपाल, बसंत कांडपाल, हरीश कांडपाल, नवीन चंद्र, कमल कवि कांडपाल ने बताया कि गांव में कई वर्षों से सुअरों का आतंक बना हुआ है। सुअरों के आतंक के कारण लोगों को खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। खेतों को सुअरों से बचाने के लिए घेरबाड़ करनी पड़ती है, इसका भी कोई फायदा नहीं मिलता है। सुअरों से हमले का खतरा बना रहता है। इन लोगों ने वन विभाग से सुअरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
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हिंसक जानवर सुअर को मारने के लिए करें आवेदन
बागेश्वर। राज्य सरकार ने जंगली सुअरों को हिंसक जानवर घोषित किया है। सुअरों को मारने का नियम बनाया है। हाल में सुअरों को मारने के नियम को स्थिल करते हुए वन दरोगा, रेंजर स्तर पर आवेदन करने का नियम बनाया है। डीएफओ से भी आवेदन किया जाता है। आवेदन में सुअरों के आतंक का जिक्र करने के साथ ही लाइसेंसधारी स्थानीय शिकारी का नाम देना होता है। वन विभाग से सुअरों को मारने की आसानी से अनुमति मिल जाती है। मृत सुअर को वन कर्मियों की मौजूदगी में दफनाना का नियम है। वन क्षेत्राधिकारी नारायण दत्त पांडे का कहना कि सुअरों के आतंक से परेशान कास्तकारों को इस नियम का लाभ उठाना चाहिए।