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Bageshwar News: शासनादेश निरस्त करने के विरोध में धरने पर बैठे कर्मचारी
Sat, 13 Jul 2024 12:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 13 Jul 2024 12:24 AM IST
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बागेश्वर। वन विकास निगम में 2002 में दैनिक कर्मचारियों के विनियमित करने संबंधी शासनादेश निरस्त होने से कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में धरना देकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों को पूर्ववत सुविधाओं का लाभ देने की मांग की।
शुक्रवार को धरने पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन के प्रभागीय अध्यक्ष विनोद चंद्र खोलिया ने किया। उन्होंने बताया कि 1991 से पूर्व वन निगम में कार्यरत दैनिक कर्मचारियों को 19 सितंबर 1991 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय के अनुसार पूर्ण वेतन, भत्तों सहित अन्य सुविधाएं अनुमन्य की गईं थी।
पृथक उत्तराखंड बनने के बाद 1991 से पूर्व दैनिक वेतन पर कार्य कर रहे 1737 कार्मिकों को 23 दिसंबर 2002 को विनियमित करते हुए और वेतनमान, एसीपी का लाभ भी दिया गया। वर्ष 2019 में शासन ने इस आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए एसीपी पर रोक लगा दी।
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वन निगम प्रबंधन ने शासन को साल 1991 से वरिष्ठता देने का प्रस्ताव दोबारा भेजा। शासन ने 15 फरवरी 2023 को वेतन, भत्तों सहित सभी सुविधाएं अनुमन्य करते हुए कर्मचारियों के वेतन का निर्धारण और भुगतान किया। हालांकि शासन ने 20 जून 2024 को बिना किसी कारण के अपने उक्त शासनादेश को निरस्त कर दिया। इसका विरोध करते हुए कर्मचारियों ने धरना दिया। इस मौके पर प्रभागीय मंत्री कुमुद कांडपाल, देवकी नंदन जोशी, जैंत सिंह परिहार, हरीश चंद्र फुलारा, पूरन सिंह, राजेंद्र सिंह नेगी, दीपा राणा, गोविंदी देवी, कमला भौर्याल आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को धरने पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन के प्रभागीय अध्यक्ष विनोद चंद्र खोलिया ने किया। उन्होंने बताया कि 1991 से पूर्व वन निगम में कार्यरत दैनिक कर्मचारियों को 19 सितंबर 1991 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय के अनुसार पूर्ण वेतन, भत्तों सहित अन्य सुविधाएं अनुमन्य की गईं थी।
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पृथक उत्तराखंड बनने के बाद 1991 से पूर्व दैनिक वेतन पर कार्य कर रहे 1737 कार्मिकों को 23 दिसंबर 2002 को विनियमित करते हुए और वेतनमान, एसीपी का लाभ भी दिया गया। वर्ष 2019 में शासन ने इस आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए एसीपी पर रोक लगा दी।
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वन निगम प्रबंधन ने शासन को साल 1991 से वरिष्ठता देने का प्रस्ताव दोबारा भेजा। शासन ने 15 फरवरी 2023 को वेतन, भत्तों सहित सभी सुविधाएं अनुमन्य करते हुए कर्मचारियों के वेतन का निर्धारण और भुगतान किया। हालांकि शासन ने 20 जून 2024 को बिना किसी कारण के अपने उक्त शासनादेश को निरस्त कर दिया। इसका विरोध करते हुए कर्मचारियों ने धरना दिया। इस मौके पर प्रभागीय मंत्री कुमुद कांडपाल, देवकी नंदन जोशी, जैंत सिंह परिहार, हरीश चंद्र फुलारा, पूरन सिंह, राजेंद्र सिंह नेगी, दीपा राणा, गोविंदी देवी, कमला भौर्याल आदि मौजूद रहे।