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अस्पताल में जांच के उपकरण नहीं होने से लोग परेशान
bageshwar
Updated Tue, 02 May 2017 10:34 PM IST
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कांडा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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कांडा-कमस्यार क्षेत्र की 35 हजार की आबादी के लिए यहां स्थापित सीएचसी में डाक्टर तो हैं, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। अस्पताल में खून, मल और मूत्र के जांच के भी कोई इंतजाम नहीं हैं इसके लिए लोगों को यहां से 15 से 70 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसमें उनका काफी समय और धन बर्बाद हो रहा है। क्षेत्र के लोगों ने सूबे की नई सरकार से अस्पताल की शीघ्र कायाकल्प करने की मांग की है।
पूर्व ग्राम प्रधान भगवान सिंह माजिला ने कहा कि अस्पताल में हर रोज सौ से अधिक रोगी आते हैं, लेकिन अस्पताल में जांच के लिए एक्सरे तक की सुविधा नहीं है। इसके लिए लोगों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
कालिका मंदिर के पुजारी बंशीधर कांडपाल का कहना है कि सीएचसी का आलीशान भवन बना तो है, लेकिन इसमें लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए उल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। जांच के लिए लोगों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। वहां जाने में रोगियों को कई परेशानियां झेलनी पड़ती है।
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गोविंद लाल वर्मा का कहना है कि अस्तताल में खून, मल और मूत्र की जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं। इससे खुद डाक्टरों को बीमारियों की जांच पड़ताल में कई परेशानियां होती हैं। उन्होंने कहा कि रोगों के जांच के इंतजाम होते तो लोगों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने से मुक्ति मिल जाती।
विजय लाल वर्मा ने कहा कि इस तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अस्पताल हैं, वहां भी स्वास्थ्य की जांच के कोई संसाधन नहीं हैं। लोगों को इसी अस्पताल पर भरोसा रहता है। दूर दराज से यहां आने वाले लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। अस्पताल को व्यवस्थित करने की ठोस पहल होनी चाहिए।
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पूर्व ग्राम प्रधान भगवान सिंह माजिला ने कहा कि अस्पताल में हर रोज सौ से अधिक रोगी आते हैं, लेकिन अस्पताल में जांच के लिए एक्सरे तक की सुविधा नहीं है। इसके लिए लोगों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
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कालिका मंदिर के पुजारी बंशीधर कांडपाल का कहना है कि सीएचसी का आलीशान भवन बना तो है, लेकिन इसमें लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए उल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। जांच के लिए लोगों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। वहां जाने में रोगियों को कई परेशानियां झेलनी पड़ती है।
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गोविंद लाल वर्मा का कहना है कि अस्तताल में खून, मल और मूत्र की जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं। इससे खुद डाक्टरों को बीमारियों की जांच पड़ताल में कई परेशानियां होती हैं। उन्होंने कहा कि रोगों के जांच के इंतजाम होते तो लोगों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने से मुक्ति मिल जाती।
विजय लाल वर्मा ने कहा कि इस तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अस्पताल हैं, वहां भी स्वास्थ्य की जांच के कोई संसाधन नहीं हैं। लोगों को इसी अस्पताल पर भरोसा रहता है। दूर दराज से यहां आने वाले लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। अस्पताल को व्यवस्थित करने की ठोस पहल होनी चाहिए।