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वन स्टॉप सेंटर के लिए गाड़गांव में 126.50 वर्ग मीटर भूमि हस्तांतरित
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बागेश्वर। महिलाओं और बालिकाओं के व्यक्तित्व के विकास, उनके अधिकारों को संरक्षित करने के लिए अभी भगीरथी मंडलसेरा के पुराने सीएमओ कार्यालय में वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) संचालित है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डीएम विनीत कुमार ने गाड़गांव में चिह्नित राजस्व विभाग की 126.50 वर्ग मीटर भूमि महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित कर दी है।
ओएससी में किसी प्रकार की हिंसा आदि से पीड़ित महिलाओं, बालिकाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सकीय, कानूनी सहायता, परामर्श, सामाजिक सहयोग, रिपोर्ट दर्ज कराने में सहायता, काउंसलिंग की सुविधाएं दिलाई जाती हैं। इसके माध्यम से एक ही छत के नीचे पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को तत्काल आपातकालीन एवं गैर आपातकालीन सुविधा दिलाते हुए उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाता है। हिंसा या अन्य प्रकार का उत्पीड़न झेल रही महिलाओं, बालिकाओं को ओएससी के माध्यम से मदद दिलाई जाती है।
ओएससी की समीक्षा के दौरान पिछले दिनों जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र बिष्ट ने इस सेंटर के स्थायी भवन निर्माण के लिए डीएम से भूमि आवंटन की मांग की थी। डीएम ने महिला एवं बाल विकास विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की। बताया कि आवंटित भूमि का उपयोग शासन से अनुमोदित एवं स्वीकृत परियोजना के लिए किया जाय। कहा कि यदि विभाग हस्तांतरित भूमि को तीन वर्षों तक प्रस्तावित कार्य के लिए उपयोग में नहीं लाता है तो वह मूल विभाग राजस्व विभाग में स्वत: निहित हो जाएगी।
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ओएससी में किसी प्रकार की हिंसा आदि से पीड़ित महिलाओं, बालिकाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सकीय, कानूनी सहायता, परामर्श, सामाजिक सहयोग, रिपोर्ट दर्ज कराने में सहायता, काउंसलिंग की सुविधाएं दिलाई जाती हैं। इसके माध्यम से एक ही छत के नीचे पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को तत्काल आपातकालीन एवं गैर आपातकालीन सुविधा दिलाते हुए उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाता है। हिंसा या अन्य प्रकार का उत्पीड़न झेल रही महिलाओं, बालिकाओं को ओएससी के माध्यम से मदद दिलाई जाती है।
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ओएससी की समीक्षा के दौरान पिछले दिनों जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र बिष्ट ने इस सेंटर के स्थायी भवन निर्माण के लिए डीएम से भूमि आवंटन की मांग की थी। डीएम ने महिला एवं बाल विकास विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की। बताया कि आवंटित भूमि का उपयोग शासन से अनुमोदित एवं स्वीकृत परियोजना के लिए किया जाय। कहा कि यदि विभाग हस्तांतरित भूमि को तीन वर्षों तक प्रस्तावित कार्य के लिए उपयोग में नहीं लाता है तो वह मूल विभाग राजस्व विभाग में स्वत: निहित हो जाएगी।
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