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Bageshwar News: आईटीआई एक, ट्रेड चार और अनुदेशक शून्य
Sat, 31 May 2025 12:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 31 May 2025 12:24 AM IST
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बागेश्वर। जिले में तकनीकी ज्ञान लेकर औद्योगिक संस्थानों में सेवा देने का सपना देख रहे युवाओं को जिले के औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र में तकनीकी ज्ञान दिलाने के लिए अनुदेशक नहीं मिल पा रहे हैं। अब संस्थानों में नए सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी है जिले की नोडल आईटीआई राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र में अनुदेशकों के सभी पद रिक्त चल रहे हैं।
जिले की नोडल आईटीआई कांडा से वर्तमान में 35 प्रशिक्षु तकनीकी की शिक्षा ले रहे हैं। जिनमें से 20 प्रशिक्षु इलेक्ट्रीशियन और 15 प्रशिक्षु अन्य ट्रेडों के प्रशिक्षु हैं। संस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रीशियन, ड्राफ्टमैन सिविल और स्टेनो हिंदी के ट्रेड संचालित हैं। इन ट्रेडों का ज्ञान प्रशिक्षुओं को देने के लिए संस्थान में एक भी अनुदेशक नहीं हैं।
व्यवस्था के तौर पर कठपुड़ियाछीना में इलेक्ट्रीशियन के अनुदेशक गौरव कुमार महीने में 15 दिन प्रशिक्षुओं को तकनीकी ज्ञान देेते हैं। अन्य ट्रेडों पर संस्थान में कक्षाओं का संचालन नहीं होता है। अनुदेशक नहीं होने से संस्थान में साल दर साल प्रशिक्षुओं की संख्या भी कम होती जा रही है।
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संस्थान में प्रशासन अब नए नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश की तैयारी कर रहा है। बगैर अनुदेशकों के संस्थान में प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ा पाना संस्थान के लिए चुनौती साबित होगा।
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जिले की नोडल आईटीआई कांडा से वर्तमान में 35 प्रशिक्षु तकनीकी की शिक्षा ले रहे हैं। जिनमें से 20 प्रशिक्षु इलेक्ट्रीशियन और 15 प्रशिक्षु अन्य ट्रेडों के प्रशिक्षु हैं। संस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रीशियन, ड्राफ्टमैन सिविल और स्टेनो हिंदी के ट्रेड संचालित हैं। इन ट्रेडों का ज्ञान प्रशिक्षुओं को देने के लिए संस्थान में एक भी अनुदेशक नहीं हैं।
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व्यवस्था के तौर पर कठपुड़ियाछीना में इलेक्ट्रीशियन के अनुदेशक गौरव कुमार महीने में 15 दिन प्रशिक्षुओं को तकनीकी ज्ञान देेते हैं। अन्य ट्रेडों पर संस्थान में कक्षाओं का संचालन नहीं होता है। अनुदेशक नहीं होने से संस्थान में साल दर साल प्रशिक्षुओं की संख्या भी कम होती जा रही है।
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संस्थान में प्रशासन अब नए नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश की तैयारी कर रहा है। बगैर अनुदेशकों के संस्थान में प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ा पाना संस्थान के लिए चुनौती साबित होगा।