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अब जिला पंचायत सदस्य करेंगे आमरण अनशन
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बागेश्वर। जिला पंचायत उपाध्यक्ष और सदस्यों का आंदोलन बुधवार से एक कदम और आगे बढ़ने जा रहा है। सदस्यों ने बुधवार से आमरण अनशन करने का फैसला लिया है। बुधवार को भैरूचौबट्टा की जिपं सदस्य गोपा धपोला आमरण अनशन पर बैठेंगी। इधर आरटीआई के जवाब में जिला पंचायत से मिली पंचायतीराज एक्ट की प्रमाणित प्रति से समितियों का कार्यकाल दो वर्ष होने संबंधी जिपं अध्यक्ष बसंती देव के दावे को खारिज करने का काम किया है।
मंगलवार को जिपं उपाध्यक्ष नवीन परिहार की अध्यक्षता में आंदोलनस्थल पर हुई सभा में भैरूचौबट्टा की जिपं सदस्य गोपा धपोला ने जिपं से आरटीआई में मिली पंचायतीराज अधिनियम की प्रति दिखाते हुए कहा कि जिपं अध्यक्ष नियोजन समेत तमाम समितियों का कार्यकाल दो वर्ष का होने की बात एसडीएम और तहसीलदार के सामने कह चुकी हैं, जिसका विरोध करते हुए उन्होंने प्रति को गलत बताया था। मामले में एसपी को भी जांच के लिए शिकायतीपत्र दिया गया है।
धपोला ने कहा कि बुधवार सुबह 11 बजे से पहले जिला प्रशासन और जिपं के अधिकारियों ने उन लोगों की मांगों पर कार्यवाही नहीं की तो वह सुबह 11 बजे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगी। जिपं उपाध्यक्ष के साथ ही सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र खेतवाल, वंदना ऐठानी, इंदिरा परिहार, रूपा कोरंगा, रेखा देवी ने धपोला के एलान का समर्थन किया।
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क्या है विवाद
आंदोलनरत जिला पंचायत सदस्य सदन में समितियों का कार्यकाल एक साल निर्धारित करने का दावा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि छह जनवरी को समितियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी बजट का वितरण किया गया है। इस पर कुछ दिन पहले जिपं अध्यक्ष बसंती देव ने मीडिया के सामने समितियों का कार्यकाल दो वर्ष होने की बात कही थी। एक्ट की प्रति भी दिखाई थी। जिपं अध्यक्ष के दावे को जिपं के लोक सूचनाधिकारी/एएमए की ओर से आरटीआई में मिली जानकारी ने खारिज करने का काम किया है। समितियों के कार्यकाल का मामला पुलिस तक पहुंचा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरटीआई से मिली जानकारी जांच में अहम साबित होगी।
आंदोलन को मिलने लगा साथ, कई गांवों के लोग धरने पर बैठे
बागेश्वर। जिपं उपाध्यक्ष और सदस्यों के आंदोलन को मंगलवार को सात, चामी, बमराड़ी, थकलाड़, खोली समेत कई गांवों के लोगों का समर्थन मिला। इन गांवों के तमाम लोग आंदोलन स्थल पर पहुंचकर धरने पर बैठे। धरने पर बैठीं बमराड़ी की बीडीसी सदस्य उमा रावत, थकलाड़ की प्रधान शीला चन्याल, प्रेम सिंह रावत, पूर्व जिपं सदस्य मनोज कुमार, सुंदर लाल, केवल राम, जगदीश सिंह रावत आदि ने कहा कि जिला पंचायत क्षेत्रों को बजट देने में पक्षपात किया जा रहा है। जो गलत है। जरूरत पड़ी तो वह लोग भी आंदोलन में कूदेंगे।
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मंगलवार को जिपं उपाध्यक्ष नवीन परिहार की अध्यक्षता में आंदोलनस्थल पर हुई सभा में भैरूचौबट्टा की जिपं सदस्य गोपा धपोला ने जिपं से आरटीआई में मिली पंचायतीराज अधिनियम की प्रति दिखाते हुए कहा कि जिपं अध्यक्ष नियोजन समेत तमाम समितियों का कार्यकाल दो वर्ष का होने की बात एसडीएम और तहसीलदार के सामने कह चुकी हैं, जिसका विरोध करते हुए उन्होंने प्रति को गलत बताया था। मामले में एसपी को भी जांच के लिए शिकायतीपत्र दिया गया है।
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धपोला ने कहा कि बुधवार सुबह 11 बजे से पहले जिला प्रशासन और जिपं के अधिकारियों ने उन लोगों की मांगों पर कार्यवाही नहीं की तो वह सुबह 11 बजे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगी। जिपं उपाध्यक्ष के साथ ही सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र खेतवाल, वंदना ऐठानी, इंदिरा परिहार, रूपा कोरंगा, रेखा देवी ने धपोला के एलान का समर्थन किया।
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क्या है विवाद
आंदोलनरत जिला पंचायत सदस्य सदन में समितियों का कार्यकाल एक साल निर्धारित करने का दावा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि छह जनवरी को समितियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी बजट का वितरण किया गया है। इस पर कुछ दिन पहले जिपं अध्यक्ष बसंती देव ने मीडिया के सामने समितियों का कार्यकाल दो वर्ष होने की बात कही थी। एक्ट की प्रति भी दिखाई थी। जिपं अध्यक्ष के दावे को जिपं के लोक सूचनाधिकारी/एएमए की ओर से आरटीआई में मिली जानकारी ने खारिज करने का काम किया है। समितियों के कार्यकाल का मामला पुलिस तक पहुंचा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरटीआई से मिली जानकारी जांच में अहम साबित होगी।
आंदोलन को मिलने लगा साथ, कई गांवों के लोग धरने पर बैठे
बागेश्वर। जिपं उपाध्यक्ष और सदस्यों के आंदोलन को मंगलवार को सात, चामी, बमराड़ी, थकलाड़, खोली समेत कई गांवों के लोगों का समर्थन मिला। इन गांवों के तमाम लोग आंदोलन स्थल पर पहुंचकर धरने पर बैठे। धरने पर बैठीं बमराड़ी की बीडीसी सदस्य उमा रावत, थकलाड़ की प्रधान शीला चन्याल, प्रेम सिंह रावत, पूर्व जिपं सदस्य मनोज कुमार, सुंदर लाल, केवल राम, जगदीश सिंह रावत आदि ने कहा कि जिला पंचायत क्षेत्रों को बजट देने में पक्षपात किया जा रहा है। जो गलत है। जरूरत पड़ी तो वह लोग भी आंदोलन में कूदेंगे।