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बागेश्वर के खाती गांव में सड़क न संचार, मुश्किलें हजार, नेता गैरजिम्मेदार
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बागेश्वर(कालिका रावल)। पिंडारी ग्लेशियर की तलहटी पर बसे सीमांत के खाती गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। ग्रामीण इन सभी परेशानियों के लिए नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी उनकी स्थिति पहले की तरह ही है। गांव को जोड़ने के लिए न तो सड़क है और न ही संचार सुविधा उपलब्ध है। चुनाव के दौरान तो नेता यहां वोट मांगने आ जाते हैं फिर पांच साल अपनी शक्ल दिखाना और वादों को भूल जाते हैं।
गांव के 73 परिवार सरकार के डिजिटल इंडिया के सपनों से वाकिफ जरूर हैं लेकिन इस सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। क्योंकि यहां किसी भी संचार कंपनी का नेटवर्क बेहतर नहीं है। कभी कभार धूर नामक स्थान पर लगे बीएसएनएल के टॉवर से खाती गांव में हल्के सिग्नल आते हैं, जिसके लिए मोबाइल फोन इधर से उधर लेकर घूमना पड़ता है। खाती गांव जाने के लिए बागेश्वर से खर्किया तक 65 किलोमीटर की दूरी वाहन से तय करनी पड़ती है। वहां से पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। हाल ही में इस गांव में बिजली आई है। इन दिनों गांव के लिए सड़क का निर्माण किया जा रहा है। खातीगांव के लोग सीमांत के इस गांव में प्रहरी की तरह डटे हुए हैं। सरकार कब इस सुंदर गांव और वहां के लोगों की सुध लेगी, यह अहम और चुभता हुआ सवाल है।
पोर्टर, गाइड के रूप में मिलता था रोजगार
बागेश्वर। खाती गांव के लोगों की आजीविका का साधन पिंडारी ट्रैकिंग रूट हैं, जो 2013 की आपदा के बाद से बदहाल है। गांव के लोग पोर्टर और गाइड का काम करते थे और ट्रैकिंग रूट पर ढाबे चलाते थे, लेकिन पिछले आठ साल से ट्रैकिंग रूट की मरम्मत नहीं होने और अब कोरोना की वजह से ट्रैकिंग ठप है। गांव के लोगों के सामने आजीविका का संकट हो गया है।
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दुश्वारियों के बावजूद पलायन नहीं
बागेश्वर। गांव में लाख दुश्वारियां हों लेकिन गांव के लोग पुरखों की जमीन छोड़ना नहीं चाहते हैं। यही वजह है कि इस गांव से अब तक पलायन नहीं हुआ है। खाती गांव में राजमा, आलू, रामदाना (चौलाई), जौ की खेती होती है। अन्य अनाज ग्रामीणों को खरीदना पड़ता है। गांव के लोग उन लोगों के लिए उदाहरण हैं जो जरा से मुश्किल हालात पैदा होते ही गांव छोड़ देते हैं।
खातीगांव के लिए सड़क बन रही है। संचार सुविधा के लिए जियो कंपनी से बात हुई है। जियो कंपनी का टावर लगने के बाद खाती गांव की संचार सेवा सुधर जाएगी।
- बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट।
धूर में लगा बीएसएनएल का टावर काम कर रहा है। सिग्नल में कोई दिक्कत हो रही होगी, तो इसका पता लगाया जाएगा। अगर कोई दिक्कत होगी तो शीघ्र दूर कराई जाएगी।
- हेमंत जोशी, जेटीओ, बीएसएनएल, बागेश्वर।
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गांव के 73 परिवार सरकार के डिजिटल इंडिया के सपनों से वाकिफ जरूर हैं लेकिन इस सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। क्योंकि यहां किसी भी संचार कंपनी का नेटवर्क बेहतर नहीं है। कभी कभार धूर नामक स्थान पर लगे बीएसएनएल के टॉवर से खाती गांव में हल्के सिग्नल आते हैं, जिसके लिए मोबाइल फोन इधर से उधर लेकर घूमना पड़ता है। खाती गांव जाने के लिए बागेश्वर से खर्किया तक 65 किलोमीटर की दूरी वाहन से तय करनी पड़ती है। वहां से पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। हाल ही में इस गांव में बिजली आई है। इन दिनों गांव के लिए सड़क का निर्माण किया जा रहा है। खातीगांव के लोग सीमांत के इस गांव में प्रहरी की तरह डटे हुए हैं। सरकार कब इस सुंदर गांव और वहां के लोगों की सुध लेगी, यह अहम और चुभता हुआ सवाल है।
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पोर्टर, गाइड के रूप में मिलता था रोजगार
बागेश्वर। खाती गांव के लोगों की आजीविका का साधन पिंडारी ट्रैकिंग रूट हैं, जो 2013 की आपदा के बाद से बदहाल है। गांव के लोग पोर्टर और गाइड का काम करते थे और ट्रैकिंग रूट पर ढाबे चलाते थे, लेकिन पिछले आठ साल से ट्रैकिंग रूट की मरम्मत नहीं होने और अब कोरोना की वजह से ट्रैकिंग ठप है। गांव के लोगों के सामने आजीविका का संकट हो गया है।
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दुश्वारियों के बावजूद पलायन नहीं
बागेश्वर। गांव में लाख दुश्वारियां हों लेकिन गांव के लोग पुरखों की जमीन छोड़ना नहीं चाहते हैं। यही वजह है कि इस गांव से अब तक पलायन नहीं हुआ है। खाती गांव में राजमा, आलू, रामदाना (चौलाई), जौ की खेती होती है। अन्य अनाज ग्रामीणों को खरीदना पड़ता है। गांव के लोग उन लोगों के लिए उदाहरण हैं जो जरा से मुश्किल हालात पैदा होते ही गांव छोड़ देते हैं।
खातीगांव के लिए सड़क बन रही है। संचार सुविधा के लिए जियो कंपनी से बात हुई है। जियो कंपनी का टावर लगने के बाद खाती गांव की संचार सेवा सुधर जाएगी।
- बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट।
धूर में लगा बीएसएनएल का टावर काम कर रहा है। सिग्नल में कोई दिक्कत हो रही होगी, तो इसका पता लगाया जाएगा। अगर कोई दिक्कत होगी तो शीघ्र दूर कराई जाएगी।
- हेमंत जोशी, जेटीओ, बीएसएनएल, बागेश्वर।