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एनएसएस परीक्षा की राह में रोड़ा बना कोरोना
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बागेश्वर। कोरोना ने शिक्षा प्रणाली की समय सारिणी को प्रभावित कर दिया है। महामारी का असर एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) के प्रमाण पत्र परीक्षा पर भी पड़ा है। वर्ष 2020 में होने वाली बी और सी प्रमाणपत्र की परीक्षा का आयोजन अब तक नहीं हो सका है। इसका सबसे अधिक असर इंटरमीडिएट पास कर चुके छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
जिले में 17 माध्यमिक विद्यालयों में एनएसएस की इकाई का संचालन किया जाता है। इनमें दो इकाइयों का गठन साल 2020 में ही हुआ। माध्यमिक इकाइयों में 1150 स्वयंसेवी पंजीकृत हैं, जिन्हें पिछले साल बी और सी प्रमाणपत्र की परीक्षा देनी थी। एनएसएस की परीक्षा का आयोजन बोर्ड परीक्षा के तत्काल बाद किया जाता है। इंटरमीडिएट की परीक्षा में बैठा छात्र भी इस परीक्षा में भाग लेकर प्रमाणपत्र हासिल कर सकता है। पिछले साल कोरोना के चलते परीक्षा नहीं हो पाई। अब भी परीक्षा होने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
यह होता है लाभ
एनएसएस के बी प्रमाणपत्र की मदद से बीएड और अन्य समकक्ष प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभार्थी को 10 अंक का लाभ मिलता है। इसी तरह से सी प्रमाणपत्र होने से 15 अंक का फायदा होता है। डिग्री कॉलेज में प्रवेश के समय भी प्रमाणपत्र उपयोगी होता है। छात्र 11वीं में बी और 12वीं में सी की परीक्षा दे सकता है। अगर 11वीं में वह बी प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सका तो इंटरमीडिएट के अंतिम वर्ष में उसे यह प्रमाणपत्र हासिल करने का मौका मिलता है। पिछले साल परीक्षा नहीं होने से छूटे छात्रों पर इसका असर पड़ेगा।
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परीक्षा कार्यालय से प्रमाण पत्र परीक्षा के लिए मांगी गई सूची भेजी गई है। कोरोना के कारण अब तक परीक्षा नहीं हो पाई है। कार्यालय से अनुमोदन मिलने के बाद जल्द परीक्षा कराई जाएगी। - राजीव निगम, जिला समन्वयक, एनएसएस, बागेश्वर।
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जिले में 17 माध्यमिक विद्यालयों में एनएसएस की इकाई का संचालन किया जाता है। इनमें दो इकाइयों का गठन साल 2020 में ही हुआ। माध्यमिक इकाइयों में 1150 स्वयंसेवी पंजीकृत हैं, जिन्हें पिछले साल बी और सी प्रमाणपत्र की परीक्षा देनी थी। एनएसएस की परीक्षा का आयोजन बोर्ड परीक्षा के तत्काल बाद किया जाता है। इंटरमीडिएट की परीक्षा में बैठा छात्र भी इस परीक्षा में भाग लेकर प्रमाणपत्र हासिल कर सकता है। पिछले साल कोरोना के चलते परीक्षा नहीं हो पाई। अब भी परीक्षा होने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
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यह होता है लाभ
एनएसएस के बी प्रमाणपत्र की मदद से बीएड और अन्य समकक्ष प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभार्थी को 10 अंक का लाभ मिलता है। इसी तरह से सी प्रमाणपत्र होने से 15 अंक का फायदा होता है। डिग्री कॉलेज में प्रवेश के समय भी प्रमाणपत्र उपयोगी होता है। छात्र 11वीं में बी और 12वीं में सी की परीक्षा दे सकता है। अगर 11वीं में वह बी प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सका तो इंटरमीडिएट के अंतिम वर्ष में उसे यह प्रमाणपत्र हासिल करने का मौका मिलता है। पिछले साल परीक्षा नहीं होने से छूटे छात्रों पर इसका असर पड़ेगा।
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परीक्षा कार्यालय से प्रमाण पत्र परीक्षा के लिए मांगी गई सूची भेजी गई है। कोरोना के कारण अब तक परीक्षा नहीं हो पाई है। कार्यालय से अनुमोदन मिलने के बाद जल्द परीक्षा कराई जाएगी। - राजीव निगम, जिला समन्वयक, एनएसएस, बागेश्वर।