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इमरजेंसी में एक घंटा इंतजार के बाद भी नहीं मिले डॉक्टर
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बागेश्वर जिला अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में बुधवार की सुबह खाली पड़ी डॉक्टर की कुर्सी। संवाद न्?
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। बावजूद इसके व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ रही हैं। ताजा मामला बुधवार की सुबह का है। जहां एक मरीज और उनके तीमारदार को एक घंटा इंतजार करने के बाद भी आपातकालीन डॉक्टर की सेवा नहीं मिल सकी। परेशान मरीज और तीमारदार ने स्वास्थ्य महकमे से अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच करने की मांग की है।
नदीगांव, सैम मंदिर वार्ड निवासी रमेश सिंह भंडारी की पत्नी का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। वे अपनी पत्नी को बुधवार की सुबह पौने छह बजे जिला अस्पताल लेकर गए। वे सीधे आपातकालीन सेवा कक्ष में गए लेकिन वहां पर कोई चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं था। उन्होंने कुछ देर इंतजार किया लेकिन वहां कोई नहीं आया। उन्होंने आपातकालीन वार्ड में भी डॉक्टर की खोजबीन की, लेकिन वहां भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद उन्हें इमरजेंसी कक्ष के बगल वाले कमरे में चौकीदार मिला। चौकीदार ने डॉक्टर को फोन करने की बात कही, लेकिन आधे घंटे का इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर का पता नहीं आया। इधर, उनकी पत्नी की परेशानी बढ़ती जा रही थी, आखिरकार एक फार्मासिस्ट ने उन्हें इंजेक्शन दिया। जिसके बाद करीब पौने सात बजे वह अपनी पत्नी को लेकर जिला अस्पताल से लौट आए और निजी क्लीनिक में उनकी जांच कराई।
भंडारी ने बताया कि अस्पताल जाने के बावजूद इलाज नहीं मिलना बेहद निराश करने वाला है। सरकारी अस्पतालों की ऐसी व्यवस्थाएं होंगी तो गरीबों का इलाज कैसे होगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराने की मांग की।
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डॉक्टरों की नहीं है कमी, फिर भी परेशानी
बागेश्वर। जिला अस्पताल एक समय में डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था, लेकिन वर्तमान में अस्पताल में 13 विशेषज्ञ और 14 साधारण ग्रेड चिकित्सक सहित 27 डॉक्टर तैनात हैं। बावजूद इसके समय पर डॉक्टर की सेवा नहीं मिलना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। भंडारी ने कहा कि अगर आपातकालीन सेवा ही लचर होगी तो, दुर्घटना, गंभीर बीमार का इलाज कैसे समय पर हो सकेगा।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं है। आपातकालीन सेवा में दो डॉक्टर हमेशा तैनात रहते हैं। संभवत: सुबह के समय डॉक्टर नित्यकर्म करने गए होंगे या किसी आपातकालीन केस की जांच कर रहे होंगे। विभाग की ओर से मामले की जांच की जाएगी। सेवा में अगर कुछ कमी रही तो उसे दुरुस्त किया जाएगा। वीके टम्टा, सीएमएस, जिला अस्पताल बागेश्वर
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नदीगांव, सैम मंदिर वार्ड निवासी रमेश सिंह भंडारी की पत्नी का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। वे अपनी पत्नी को बुधवार की सुबह पौने छह बजे जिला अस्पताल लेकर गए। वे सीधे आपातकालीन सेवा कक्ष में गए लेकिन वहां पर कोई चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं था। उन्होंने कुछ देर इंतजार किया लेकिन वहां कोई नहीं आया। उन्होंने आपातकालीन वार्ड में भी डॉक्टर की खोजबीन की, लेकिन वहां भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद उन्हें इमरजेंसी कक्ष के बगल वाले कमरे में चौकीदार मिला। चौकीदार ने डॉक्टर को फोन करने की बात कही, लेकिन आधे घंटे का इंतजार करने के बाद भी डॉक्टर का पता नहीं आया। इधर, उनकी पत्नी की परेशानी बढ़ती जा रही थी, आखिरकार एक फार्मासिस्ट ने उन्हें इंजेक्शन दिया। जिसके बाद करीब पौने सात बजे वह अपनी पत्नी को लेकर जिला अस्पताल से लौट आए और निजी क्लीनिक में उनकी जांच कराई।
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भंडारी ने बताया कि अस्पताल जाने के बावजूद इलाज नहीं मिलना बेहद निराश करने वाला है। सरकारी अस्पतालों की ऐसी व्यवस्थाएं होंगी तो गरीबों का इलाज कैसे होगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराने की मांग की।
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डॉक्टरों की नहीं है कमी, फिर भी परेशानी
बागेश्वर। जिला अस्पताल एक समय में डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था, लेकिन वर्तमान में अस्पताल में 13 विशेषज्ञ और 14 साधारण ग्रेड चिकित्सक सहित 27 डॉक्टर तैनात हैं। बावजूद इसके समय पर डॉक्टर की सेवा नहीं मिलना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। भंडारी ने कहा कि अगर आपातकालीन सेवा ही लचर होगी तो, दुर्घटना, गंभीर बीमार का इलाज कैसे समय पर हो सकेगा।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं है। आपातकालीन सेवा में दो डॉक्टर हमेशा तैनात रहते हैं। संभवत: सुबह के समय डॉक्टर नित्यकर्म करने गए होंगे या किसी आपातकालीन केस की जांच कर रहे होंगे। विभाग की ओर से मामले की जांच की जाएगी। सेवा में अगर कुछ कमी रही तो उसे दुरुस्त किया जाएगा। वीके टम्टा, सीएमएस, जिला अस्पताल बागेश्वर