{"_id":"63333d0a5c564e25ee0f502b","slug":"navratra-in-bageshwar-bageshwar-news-hld477175396","type":"story","status":"publish","title_hn":"शक्तिस्वरूपा मां के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है नवरात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शक्तिस्वरूपा मां के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है नवरात्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होता है। नवरात्र के नौ दिनों तक शक्ति स्वरूपा मां की विभिन्न रूपों में उपासना की जाती है। दशमी के दिन विजयादशमी माता की पूजा का विधान है। नवरात्र पर्व शक्ति की महिमा को प्रदर्शित करता है। शक्ति से संसार का संचालन माना गया है। नवरात्र पर्व इन्हीं नौ शक्तियों की पूजा, उपासना का द्योतक है।
नवरात्र में नौ दिन तक भूखे रहकर उपवास कर लेना मात्र ही उपासना नहीं है। यह पर्व मानव के शरीर में स्थित नौ छिद्रों में रहने वाले नौ प्रकार के पाप या अशुद्धियों से निवृत्त होने की सीख देता है। नवरात्र में नौ प्रकार की भक्ति या उपासना से शक्ति स्वरूपा मां जगतजननी को प्रसन्न करने का विधान है। श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, संख्य, आत्मनिवेदन इन नौ प्रकार की भक्ति से आंतरिक शुद्धि के लिए किया जाने वाला दिव्यकर्म ही नवरात्र व्रत कहलाता है। नौ दिनों तक पूर्ण व्रत का पालन करने से ही मां अंबा की भक्ति और कृपा प्राप्त की जा सकती है।
नारी के प्रति सम्मान को प्रकट करता है नवरात्र
बागेश्वर। सनातन धर्म में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। भारतीय संस्कृति में मां का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। जिस प्रकार जन्म देने वाली माता और धरती माता हमारा आधार हैं, उसी तरह से जगदंबा अखिल विश्व का आधार हैं। उन्हें शक्ति स्वरूपा कहा गया है। नवरात्र पर्व शक्ति को संचित कर जगत कल्याण में उस शक्ति का उपयोग करने की प्रेरणा देता है। नारी सम्मान के इस पर्व में कन्या पूजा का विधान बताया गया है। नवरात्र में दो से दस वर्ष की कन्या की कुमारी रूप में पूजा की जाती है।
विज्ञापन
जीव हिंसा से नहीं होगी मां प्रसन्न
बागेश्वर। नवरात्र पूर्ण वैज्ञानिक पर्व है। शारदीय नवरात्र के दौरान मौसम में परिवर्तन होता है। इस दौरान लोगों को संयमित खानपान ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। नवरात्र के व्रत भी यही सीख देते हैं। नवरात्र में विभिन्न भोज्य पदार्थों से कन्या, ब्राह्मण, साधु-संत, अनाथ, पक्षियों के लिए बलिदान करना चाहिए। जीव की हिंसा का अर्थ बलि नहीं अपितु मां को वही भोजन अर्पित किया जाना चाहिए जिसे स्वयं ग्रहण कर रहे हैं।
सनातन धर्म में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। नवरात्र पर्व हमें नारी का सम्मान करने, शरीर, मन में व्याप्त बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा देता है। मनुष्य को नवरात्र पर्व से सीख लेकर अधर्म के मार्ग को छोड़कर धर्म, सत्य के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। - डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, आचार्य/प्रवक्ता, बागेश्वर।
विज्ञापन
नवरात्र में नौ दिन तक भूखे रहकर उपवास कर लेना मात्र ही उपासना नहीं है। यह पर्व मानव के शरीर में स्थित नौ छिद्रों में रहने वाले नौ प्रकार के पाप या अशुद्धियों से निवृत्त होने की सीख देता है। नवरात्र में नौ प्रकार की भक्ति या उपासना से शक्ति स्वरूपा मां जगतजननी को प्रसन्न करने का विधान है। श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, संख्य, आत्मनिवेदन इन नौ प्रकार की भक्ति से आंतरिक शुद्धि के लिए किया जाने वाला दिव्यकर्म ही नवरात्र व्रत कहलाता है। नौ दिनों तक पूर्ण व्रत का पालन करने से ही मां अंबा की भक्ति और कृपा प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
नारी के प्रति सम्मान को प्रकट करता है नवरात्र
बागेश्वर। सनातन धर्म में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। भारतीय संस्कृति में मां का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। जिस प्रकार जन्म देने वाली माता और धरती माता हमारा आधार हैं, उसी तरह से जगदंबा अखिल विश्व का आधार हैं। उन्हें शक्ति स्वरूपा कहा गया है। नवरात्र पर्व शक्ति को संचित कर जगत कल्याण में उस शक्ति का उपयोग करने की प्रेरणा देता है। नारी सम्मान के इस पर्व में कन्या पूजा का विधान बताया गया है। नवरात्र में दो से दस वर्ष की कन्या की कुमारी रूप में पूजा की जाती है।
विज्ञापन
जीव हिंसा से नहीं होगी मां प्रसन्न
बागेश्वर। नवरात्र पूर्ण वैज्ञानिक पर्व है। शारदीय नवरात्र के दौरान मौसम में परिवर्तन होता है। इस दौरान लोगों को संयमित खानपान ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। नवरात्र के व्रत भी यही सीख देते हैं। नवरात्र में विभिन्न भोज्य पदार्थों से कन्या, ब्राह्मण, साधु-संत, अनाथ, पक्षियों के लिए बलिदान करना चाहिए। जीव की हिंसा का अर्थ बलि नहीं अपितु मां को वही भोजन अर्पित किया जाना चाहिए जिसे स्वयं ग्रहण कर रहे हैं।
सनातन धर्म में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। नवरात्र पर्व हमें नारी का सम्मान करने, शरीर, मन में व्याप्त बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा देता है। मनुष्य को नवरात्र पर्व से सीख लेकर अधर्म के मार्ग को छोड़कर धर्म, सत्य के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। - डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, आचार्य/प्रवक्ता, बागेश्वर।