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नौकोड़ी के पर्वतारोही केदार कोरंगा ने फतह की गरुड़ा चोटी
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बागेश्वर। जिले के नौकोड़ी (कपकोट) निवासी पर्वतारोही केदार सिंह कोरंगा ने चमोली जिले में 19685 फुट (करीब 6000 मीटर) की ऊंचाई में स्थित गरुड़ा पर्वत का सफलता पूर्वक आरोहण किया है। बीएसएफ में तैनात कोरंगा दो बार माउंट एवरेस्ट, एक बार माउंट कंचनजंगा के साथ ही भारत की कई चोटियों को फतह कर चुके हैं।
कोरंगा ने बीते छह जुलाई को गरुड़ा पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराया। कोरंगा की सफलता से जिले के लोगों में खुशी व्याप्त है। पर्वतारोही कोरंगा का कहना है कि उत्तराखंड साहसिक खेलों का प्रदेश है। उत्तराखंड में के युवा साहसिक खेलों में रुचि लेने लगे हैं। वह बताते हैं कि साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले युवा उत्तरकाशी से बेसिक और एडवांस कोर्स कर सकते हैं। दार्जलिंग, हिमाचल के मनाली में भी साहसिक खेलों के प्रशिक्षण की अच्छी सुविधा है।
अपनी जन्मभूमि को कभी मत छोड़ना
बागेश्वर। पर्वतारोही केदार सिंह कोरंगा ने पहाड़ के युवाओं से अपनी जन्मभूमि को कभी न छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि पहाड़ की सुंदरता पहाड़ के लोगों की शान है। पहाड़ों में जीने का जो आनंद है, वह कहीं नहीं है। कहते हैं कि उत्तराखंड के नवयुवकों को समझना होगा कि हमारे पर्वतीय क्षेत्रों का कैसे विकास हो और पहाड़ से लोगों का पलायन बंद हो। पहाड़ के लोगों को इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।
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केदार के पिता दीवान सिंह भी बीएसएफ में थे तैनात
बागेश्वर। बीएसएफ में हवलदार के पद पर कार्यरत पर्वतारोही केदार सिंह कोरंगा इस समय देहरादून स्थित बीएसएफ एडवांस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट कैंप इंस्ट्रक्टर हैं। उनके पिता स्व. दीवान सिंह कोरंगा भी बीएसएफ में तैनात थे।
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कोरंगा ने बीते छह जुलाई को गरुड़ा पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराया। कोरंगा की सफलता से जिले के लोगों में खुशी व्याप्त है। पर्वतारोही कोरंगा का कहना है कि उत्तराखंड साहसिक खेलों का प्रदेश है। उत्तराखंड में के युवा साहसिक खेलों में रुचि लेने लगे हैं। वह बताते हैं कि साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले युवा उत्तरकाशी से बेसिक और एडवांस कोर्स कर सकते हैं। दार्जलिंग, हिमाचल के मनाली में भी साहसिक खेलों के प्रशिक्षण की अच्छी सुविधा है।
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अपनी जन्मभूमि को कभी मत छोड़ना
बागेश्वर। पर्वतारोही केदार सिंह कोरंगा ने पहाड़ के युवाओं से अपनी जन्मभूमि को कभी न छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि पहाड़ की सुंदरता पहाड़ के लोगों की शान है। पहाड़ों में जीने का जो आनंद है, वह कहीं नहीं है। कहते हैं कि उत्तराखंड के नवयुवकों को समझना होगा कि हमारे पर्वतीय क्षेत्रों का कैसे विकास हो और पहाड़ से लोगों का पलायन बंद हो। पहाड़ के लोगों को इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।
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केदार के पिता दीवान सिंह भी बीएसएफ में थे तैनात
बागेश्वर। बीएसएफ में हवलदार के पद पर कार्यरत पर्वतारोही केदार सिंह कोरंगा इस समय देहरादून स्थित बीएसएफ एडवांस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट कैंप इंस्ट्रक्टर हैं। उनके पिता स्व. दीवान सिंह कोरंगा भी बीएसएफ में तैनात थे।