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Bageshwar News: बारिश में दरक रहे पहाड़, कपकोट में सात नए भूस्खलन क्षेत्र बने
Tue, 16 Sep 2025 11:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 16 Sep 2025 11:39 PM IST
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बागेश्वर। मानसूनी बारिश में पहाड़ों के दरकने से कपकोट तहसील क्षेत्र की ग्रामीण सड़कों को सबसे अधिक नुकसान हुआ। इस साल सात सड़कों पर नए भूस्खलन क्षेत्र बनने से ग्रामीण क्षेत्रों की यातायात व्यवस्था काफी प्रभावित हुई। वर्तमान में तहसील क्षेत्र में 14 प्रमुख भूस्खलन जोन सक्रिय हैं। इनमें 12 सड़कें पीएमजीएसवाई और दो लोनिवि के अधीन हैं।
लोनिवि कपकोट के ईई अमित कुमार पटेल ने बताया कि उनके अधीन वाली दो सड़कों पर भूस्खलन क्षेत्र हैं। कपकोट-कर्मी मोटर मार्ग के किमी सात गांसू में और भानी-हरसिंग्याबगड़ के किमी एक भूस्खलन क्षेत्र पहले से ही हैं। इस साल कोई नया जोन नहीं बना है। पीएमजीएसवाई के ईई अंबरीश रावत ने बताया कि इस साल कपकोट-पिंडारी मोटर मार्ग के किमी छह, पोलिंग-हरसीला के किमी दो, खाती के किमी तीन, कमेड़ीदेवी-स्याकोट के किमी दो, नैकाना-बसोरा के किमी तीन, धरमघर-माजखेत के किमी 11 और चीराबगड़-पोथिंग सड़क के किमी तीन में नए भूस्खलन क्षेत्र बने हैं। पूर्व से बने भूस्खलन क्षत्रों में रिखाड़ी-वाछम सड़क के किमी 37, काफलीकमेड़ा के किमी एक, बड़ेत मोटर मार्ग के किमी दो और तीन, खड़लेख-भनार के किमी 11 और उंगिया-सोराग मोटर मार्ग के किमी आठ शामिल हैं। पूरे मानसून सीजन में इन स्थानों पर भूस्खलन होने से वाहनों की आवाजाही ठप होती रही।
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लोनिवि कपकोट के ईई अमित कुमार पटेल ने बताया कि उनके अधीन वाली दो सड़कों पर भूस्खलन क्षेत्र हैं। कपकोट-कर्मी मोटर मार्ग के किमी सात गांसू में और भानी-हरसिंग्याबगड़ के किमी एक भूस्खलन क्षेत्र पहले से ही हैं। इस साल कोई नया जोन नहीं बना है। पीएमजीएसवाई के ईई अंबरीश रावत ने बताया कि इस साल कपकोट-पिंडारी मोटर मार्ग के किमी छह, पोलिंग-हरसीला के किमी दो, खाती के किमी तीन, कमेड़ीदेवी-स्याकोट के किमी दो, नैकाना-बसोरा के किमी तीन, धरमघर-माजखेत के किमी 11 और चीराबगड़-पोथिंग सड़क के किमी तीन में नए भूस्खलन क्षेत्र बने हैं। पूर्व से बने भूस्खलन क्षत्रों में रिखाड़ी-वाछम सड़क के किमी 37, काफलीकमेड़ा के किमी एक, बड़ेत मोटर मार्ग के किमी दो और तीन, खड़लेख-भनार के किमी 11 और उंगिया-सोराग मोटर मार्ग के किमी आठ शामिल हैं। पूरे मानसून सीजन में इन स्थानों पर भूस्खलन होने से वाहनों की आवाजाही ठप होती रही।
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