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मोटर पुल गिरने की होगी उच्च स्तरीय जांच
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ बागेश्वर।
Updated Wed, 02 Sep 2015 12:12 AM IST
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कपकोट के समीप पनौरा में सरयू पर निर्माण के दौरान मोटर पुल के दो बार गिरने के मामले में अभी तक ठेकेदार को जिम्मेदार ठहरा रहे लोनिवि की भूमिका की भी जांच होगी।
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न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ठेकेदार से वसूली की कार्रवाई फिलहाल रुक गई है। वहीं जिला जज ने ठेकेदार की एक याचिका के बाद पूरे प्रकरण पर तल्ख टिप्पणी की है।
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मामले की तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच के लिए फैसले की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने के आदेश दिए हैं।
पनौरा गांव में सरयू नदी पर चार साल पहले 90 मीटर स्पान का स्टील गार्डर मोटर पुल मंजूर हुआ। यह काम लोनिवि के कपकोट खंड के अंतर्गत था।
पुल का ढांचा खड़ा होते-होते 2012 की बरसात में यह पुल सरयू के तेज उफान से गिर गया। इसकी लागत लगभग दो करोड़ रुपये थी।
इसमें से पहली किस्त के रूप में 98 लाख, 35 हजार, 212 रुपये का भुगतान पिथौरागढ निवासी ठेकेदार चंद्री चंद को हो चुका था।
इसके बाद ठेकेदार ने अपने धन से फिर से पुल का निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन 2013 की बारिश में उफान के दौरान फिर से पुल गिर गया।
लोनिवि कपकोट खंड ने पुल गिरने के लिए एकतरफा ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराते हुए चुकता की गई 98 लाख, 35 हजार 212 रुपये की राशि वसूलने के लिए नोटिस भेज दिया।
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ठेकेदार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके निर्माण संबंधी शर्तों के मुताबिक दोनों पक्षों के मध्य भुगतान का रास्ता निकालने की अपील की।
ठेकेदार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद सिंह भंडारी का कहना है कि पुल ठेकेदार की गलती से नहीं वरन बाढ़ के कारण गिरा है।
हाईकोर्ट में यह मामला अभी विचाराधीन है। दूसरी तरफ लोनिवि ने गत दिनों को ठेकेदार को धन की वसूली के लिए नोटिस दिया, तो ठेकेदार ने वसूली के खिलाफ जिला जज की अदालत में याचिका दायर की।
इस याचिका पर जिला जज डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने 28 अगस्त को फैसला सुनाया है। जज ने कहा है कि ठेकेदार की याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट का फैसला होने तक ठेकेदार से वसूली नहीं की जाए।
साथ ही इस मामले में तकनीकी, प्रशासनिक खामी और वित्तीय अनियमितता की जांच कराने के लिए फैसले की एक प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने के भी आदेश दिए हैं।