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तहसील गेट पर ही लेट गया रुपए निकालने आया बीमार ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:50 PM IST
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बीमार ग्रामीण
- फोटो : amar ujala
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पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों के बंद होने से हर कोई परेशान है। हालात यह हैं कि बीमार से लेकर बुजुर्गों को भी बैंकों में रुपए निकालने के लिए कतार लगानी पड़ रही है। बड़े नोटों के बंद होने से किसी के पास टिकट के लिए तो किसी के पास दवाइयां खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। बागेश्वर में बैंक से रुपए निकालने के लिए आया एक बीमार ग्रामीण तहसील गेट पर ही लेट गया।
बड़े नोटों को बंद करने के आठ दिन बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। लोग करेंसी के लिए जगह-जगह लाइन लगाकर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। बिलौना निवासी नंदन प्रसाद पिछले लंबे समय से बीमार हैं। पैसा खत्म हुआ तो बुधवार को वह वृद्धावस्था पेंशन के लिए खोले गए खाते से एक हजार रुपए निकालने अपनी पत्नी और भतीजे के साथ बैंक आए। परंतु कुछ ही देर प्रतीक्षा करने पर उनकी हालत खराब हो गई। सांस फूलने के कारण वे तहसील गेट पर ही लेट गए। नंदन प्रसाद की पत्नी ने बताया कि लंबे समय से उनकी तबियत खराब चल रही है। खाते से रुपए निकालने के लिए उनको बैंक में लाना जरूरी था।
जांच में खर्च हो गए पैसे, अब घर कैसे लौटें
बागेश्वर। छोटे नोटों की कमी के कारण हर कोई परेशान है। खासकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे लोग सबसे अधिक परेशान हैं। ऐसे ही एक मामले में गर्भवती पत्नी की जांच कराने जिला मुख्यालय आए युवक के पास घर लौटने के लिए टिकट तक के लिए पैसे नहीं थे। सानीउडियार निवासी सुंदर सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी आठ माह के गर्भ से है। वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला मुख्यालय आया था। उसके पास 350 रुपए थे जो जांच में खर्च हो गए हैं। अब उसके पास घर लौटने के लिए टिकट तक नहीं है। युवक की मजबूरी को देखते हुए मीडिया कर्मियों के कहने पर डॉक्टर ने युवक को पैसे लौटा दिए।
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...............दवा विक्रेता गोकुल जोशी ने बताया कि 500 और 1000 के नोटों के बंद होने से दवाईयों की बिक्री तो जारी है लेकिन कटौती हो रही है। जिस मरीज को 10 दिन की दवाई लिखी गई है वह केवल पांच ही दिन की दवा लेकर जा रहा है।
................दवा विक्रेता महेश खेतवाल ने बताया कि अधिकांश लोग दवाई खरीदने के लिए 500 और 1000 के ही नोट ला रहे हैं। परंतु छोटी करेंसी नहीं होने से वापस करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
..............अस्पताल में भर्ती नेपाली मजदूर सुरेश थापा ने बताया कि नोट बंद होने से उसके पास दवाइयां खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। जो भी दवाइयां अस्पताल से मिल रही हैं उन्हीं को खा रहा हूं।
16 बीजीएस 09 पी - सुरेश थापा।
...............रेखा देवी ने बताया कि उनका कार्य सामान्य दिनों की तरह चल रहा है। पांच सौ और हजार के नोट बंद होने से कुछ समय तो परेशानी रहेगी ही। धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आएगा।
.................वृद्घ महिला कमला देवी ने बताया कि वह जांच के लिए अस्पताल आई हैं। रुपयों की जरूरत तो हर काम के लिए होती है। अभी पेंशन की धनराशि उन्हें नहीं मिली है बैंकों में भीड़ है जिससे परेशानी हो रही है।
बड़े नोटों को बंद करने के आठ दिन बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। लोग करेंसी के लिए जगह-जगह लाइन लगाकर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। बिलौना निवासी नंदन प्रसाद पिछले लंबे समय से बीमार हैं। पैसा खत्म हुआ तो बुधवार को वह वृद्धावस्था पेंशन के लिए खोले गए खाते से एक हजार रुपए निकालने अपनी पत्नी और भतीजे के साथ बैंक आए। परंतु कुछ ही देर प्रतीक्षा करने पर उनकी हालत खराब हो गई। सांस फूलने के कारण वे तहसील गेट पर ही लेट गए। नंदन प्रसाद की पत्नी ने बताया कि लंबे समय से उनकी तबियत खराब चल रही है। खाते से रुपए निकालने के लिए उनको बैंक में लाना जरूरी था।
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जांच में खर्च हो गए पैसे, अब घर कैसे लौटें
बागेश्वर। छोटे नोटों की कमी के कारण हर कोई परेशान है। खासकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे लोग सबसे अधिक परेशान हैं। ऐसे ही एक मामले में गर्भवती पत्नी की जांच कराने जिला मुख्यालय आए युवक के पास घर लौटने के लिए टिकट तक के लिए पैसे नहीं थे। सानीउडियार निवासी सुंदर सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी आठ माह के गर्भ से है। वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला मुख्यालय आया था। उसके पास 350 रुपए थे जो जांच में खर्च हो गए हैं। अब उसके पास घर लौटने के लिए टिकट तक नहीं है। युवक की मजबूरी को देखते हुए मीडिया कर्मियों के कहने पर डॉक्टर ने युवक को पैसे लौटा दिए।
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...............दवा विक्रेता गोकुल जोशी ने बताया कि 500 और 1000 के नोटों के बंद होने से दवाईयों की बिक्री तो जारी है लेकिन कटौती हो रही है। जिस मरीज को 10 दिन की दवाई लिखी गई है वह केवल पांच ही दिन की दवा लेकर जा रहा है।
................दवा विक्रेता महेश खेतवाल ने बताया कि अधिकांश लोग दवाई खरीदने के लिए 500 और 1000 के ही नोट ला रहे हैं। परंतु छोटी करेंसी नहीं होने से वापस करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
..............अस्पताल में भर्ती नेपाली मजदूर सुरेश थापा ने बताया कि नोट बंद होने से उसके पास दवाइयां खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। जो भी दवाइयां अस्पताल से मिल रही हैं उन्हीं को खा रहा हूं।
16 बीजीएस 09 पी - सुरेश थापा।
...............रेखा देवी ने बताया कि उनका कार्य सामान्य दिनों की तरह चल रहा है। पांच सौ और हजार के नोट बंद होने से कुछ समय तो परेशानी रहेगी ही। धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आएगा।
.................वृद्घ महिला कमला देवी ने बताया कि वह जांच के लिए अस्पताल आई हैं। रुपयों की जरूरत तो हर काम के लिए होती है। अभी पेंशन की धनराशि उन्हें नहीं मिली है बैंकों में भीड़ है जिससे परेशानी हो रही है।