{"_id":"5bfadad3bdec22414f57802b","slug":"many-times-the-artificial-lake-is-not-built-even-after-raising-the-demand","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई बार मांग उठाने के बाद भी नहीं बनी कृत्रिम झील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई बार मांग उठाने के बाद भी नहीं बनी कृत्रिम झील
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sun, 25 Nov 2018 10:54 PM IST
विज्ञापन
केदारेश्वर हिचौड़ी-कपकोट के इसी स्थल पर सरयू में कृत्रिम झील बनाने की है मांग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कपकोट को कुदरती सौंदर्य के मामले में धनी कहा जाता है। इसके उत्तर भाग में विश्व प्रसिद्ध पिंडारी, सुुंदरढुंगा और कफनी ग्लेशियर समेत कई मनोहारी स्थल हैं। सरयू का उद्गम स्थल समेत नंद और देवीकुंड भी इसी क्षेत्र में हैं। कुदरती सौंदर्य से भरपूर होने के बाद भी सरकारों ने यहां पर्यटन विकास के लिए कुछ खास नहीं किया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रवासियों द्वारा यहां सरयू में कृत्रिम झील बनाने की मांग कई सालों से उठाई जा रही है। लेकिन शासन स्तर से इस कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
मालूम हो कि तहसील मुख्यालय के उत्तरी भाग में पिंडारी, सुंदरढुंगा और कफनी ग्लेशियर हैं। जहां बड़ी संख्या में देश विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी जाते हैं। सैलानियों के मनोरंजन के लिए यहां कोई व्यवस्थाएं नहीं हैं। नगर से होकर सरयू बहती है। लोगों का कहना है कि यदि नदी पर केदारेश्वर मैदान के पास कृत्रिम झील बनाई जाती तो यहां पहुंचने वाले सैलानियों को झील में नौकायन करने की सुविधा मिलती। पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ कई खाली हाथों को भी रोजगार मिलता। लेकिन आज तक किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं गया है।
पर्यटन को नए आयाम मिलेंगे
होटल व्यवसायी राजा शाही का कहना है कि सरयू में कृत्रिम झील बनने से क्षेत्र के पर्यटन को नए आयाम मिलेंगे। क्षेत्र के सभी दर्शनीय स्थलों का विकास होने पर कई खाली हाथों को रोजगार मिलेगा।
विज्ञापन
व्यापार बढे़गा
अवकाश प्राप्त सूबेदार जनम सिंह बिष्ट कहते हैं सरयू में कृत्रिम झील बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही विकास को भी नयी दिशा मिलेगी। व्यापार भी बढ़ेेगा। रोजगार के लिए बेरोजगार युवाओं को नहीं भटकना पड़ेगा।
कई सालों से उठाई जा रही है यह मांग
टैक्सी चालक हेम जोशी कहते हैं कि सरयू में कृत्रिम झील बनाने की मांग काफी पुुरानी है। अलग राज्य बनने के बाद भी सरयू में कृत्रिम झील आज तक नहीं बन सकी है।
कोट
-सरकार ने दर्शनीय स्थलों में सैलानियों को आधारभूत सुविधाएं मिले इसके लिए पूरे प्रयास कर रही है। इससे परिणाम शीघ्र दिखाई देंगे। होटल व्यवसाय के अलावा लोगों को होम स्टे के लिए भी लाभान्वित किया जा रहा है।
बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।
मालूम हो कि तहसील मुख्यालय के उत्तरी भाग में पिंडारी, सुंदरढुंगा और कफनी ग्लेशियर हैं। जहां बड़ी संख्या में देश विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी जाते हैं। सैलानियों के मनोरंजन के लिए यहां कोई व्यवस्थाएं नहीं हैं। नगर से होकर सरयू बहती है। लोगों का कहना है कि यदि नदी पर केदारेश्वर मैदान के पास कृत्रिम झील बनाई जाती तो यहां पहुंचने वाले सैलानियों को झील में नौकायन करने की सुविधा मिलती। पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ कई खाली हाथों को भी रोजगार मिलता। लेकिन आज तक किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं गया है।
विज्ञापन
पर्यटन को नए आयाम मिलेंगे
होटल व्यवसायी राजा शाही का कहना है कि सरयू में कृत्रिम झील बनने से क्षेत्र के पर्यटन को नए आयाम मिलेंगे। क्षेत्र के सभी दर्शनीय स्थलों का विकास होने पर कई खाली हाथों को रोजगार मिलेगा।
विज्ञापन
व्यापार बढे़गा
अवकाश प्राप्त सूबेदार जनम सिंह बिष्ट कहते हैं सरयू में कृत्रिम झील बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही विकास को भी नयी दिशा मिलेगी। व्यापार भी बढ़ेेगा। रोजगार के लिए बेरोजगार युवाओं को नहीं भटकना पड़ेगा।
कई सालों से उठाई जा रही है यह मांग
टैक्सी चालक हेम जोशी कहते हैं कि सरयू में कृत्रिम झील बनाने की मांग काफी पुुरानी है। अलग राज्य बनने के बाद भी सरयू में कृत्रिम झील आज तक नहीं बन सकी है।
कोट
-सरकार ने दर्शनीय स्थलों में सैलानियों को आधारभूत सुविधाएं मिले इसके लिए पूरे प्रयास कर रही है। इससे परिणाम शीघ्र दिखाई देंगे। होटल व्यवसाय के अलावा लोगों को होम स्टे के लिए भी लाभान्वित किया जा रहा है।
बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।