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लेपर्ड प्रोजेक्ट के दूसरे चरण की तैयारी शुरू

Sat, 09 Jan 2016 12:46 AM IST
आनंद नेगी/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
आनंद नेगी/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Sat, 09 Jan 2016 12:46 AM IST
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Leopard start preparing the second phase of the project

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुए (स्नो लेपर्ड) के संरक्षण को वन विभाग व्यापक स्तर पर प्रयास करेगा। इसके लिए 2009 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुए प्रोजेक्ट लेपर्ड का मानीटरिंग चरण लगभग पूरा हो गया है। दूसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

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अभी तक उत्तराखंड में चार तेंदुए कैमरों में कैद हो चुके हैं। हिमालयी क्षेत्र में इनकी मौजूदगी के प्रमाण मिलने के बाद विभाग अब सुरक्षा, खुफिया, जनसहभागिता के कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। दुनिया भर में अवैध शिकार के कारण हिम तेंदुए के सामने अस्तित्व का संकट है।
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भारत में इसे ए श्रेणी के संरक्षित वन्यजीव का दर्जा दिया गया है। भारत सरकार ने इसके संरक्षण के लिए जनवरी 2009 में प्रोजेक्ट लेपर्ड शुरू किया। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, अरुणांचल, सिक्किम में इसे लागू किया गया है।  इस परियोजना के पहले चरण में हिम तेंदुओं की संख्या और उनके ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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 इसके लिए पिछले सालों में ट्रैप कैमरों की मदद ली गई। कैमरे ने पिछले साल 29 जून को कुमाऊं के सुंदरढुंगा ग्लेशियर के पास 41 सौ मीटर की ऊंचाई पर एक हिम तेंदुए की तस्वीर खींची। इससे पहले कैमरों ने गढ़वाल के नंदादेवी राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, गंगोत्री अभ्यारण्य में तीन हिम तेंदुओं की तस्वीरें खींची।

 पिथौरागढ़ के अस्कोट सेंचुरी में भी इसकी मौजूदगी की सूचनाएं मिलती रही हैं। वन संरक्षक कुमाऊं के सांख्यिकी अधिकारी शंकर कुमार ने बताया कि लेपर्ड प्रोजेक्ट के तहत मॉनीटरिंग चरण में अभी तक बुग्यालों में सर्वे, ट्रैप कैमरों से निगरानी, लंबी दूरी की गश्तें चल रही हैं। इसके बाद दूसरे चरण की तैयारी है।

तेंदुओं की सुरक्षा के लिए खुफिया तंत्र की मजबूती, अवैध शिकार पर रोक, जन जागरण, तेंदुओं के आवासीय, आहार क्षेत्र विस्तार, बुग्यालों में स्वच्छता, नैसर्गिकता बरकार रखने जैसे कार्यक्रम चलेंगे।

 वन्यजीवों के तस्कर बुग्यालों में आग लगाकर नीचे आने वाले जानवरों का शिकार करते हैं। वन्यजीवों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों की सहभागिता जरूरी है।

 हिम तेंदुआ भेड़, बकरी आदि वन्यजीवों का शिकार करने के लिए 50 फीट लंबी छलांग लगा सकता  है। इसके पंजे मजबूत, चौड़े होते हैं। ऊंचाई दो फीट, लंबाई छह फीट से साढे़ सात फीट, वजन 35 से 55 किलो, उम्र अधिकतम 21 साल तक होती है।


विश्व में सात हजार तक हिम तेंदुए हैं। इनमे से 600 से 700 तक चिड़ियाघरों और अभ्यारण्यों में हैं। हिम तेंदुओं की 60 फीसदी से अधिक आबादी मध्य एशिया में है। उत्तराखंड में इनकी संख्या 55 से 80 तक है।

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