फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Khadiya's failed to give jobs to youth

खड़िया का अकूत भंडार, युवाओं को नहीं दे सका रोजगार

Mon, 25 Mar 2019 11:59 PM IST
दीपक नेगी सुरेश पांडेय/अमर उजाला/ बागेश्वर
सुरेश पांडेय/अमर उजाला/ बागेश्वर Published by: दीपक नेगी Updated Mon, 25 Mar 2019 11:59 PM IST
विज्ञापन
Khadiya's failed to give jobs to youth
बागेश्वर में खड़िया खदान क्षेत्र। - फोटो : अमर उजाला

जिले में कुदरत ने खड़िया के रूप में खनिज संपदा का अकूत भंडार दिया है, लेकिन सरकारें इस खड़िया रूपी खनिज संपदा पर आधारित एक भी उद्योग लगा पाने में नाकाम रही हैं। जिस कारण स्थानीय युवाओं को खड़िया से रोजगार नहीं मिल सका है। 

विज्ञापन


बागेश्वर जिले को खड़िया खनन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। बागेश्वर से प्रतिवर्ष हजारों टन खड़िया खोदकर मैदानी जिलों में पहुंचाई जाती है। खड़िया से सौंदर्य प्रसाधन सहित अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। बीते कई साल से खड़िया पर आधारित उद्योग लगाने के लिए सरकारें आश्वासन देती रही हैं लेकिन आज तक इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन


खड़िया पर आधारित उद्योग लगता तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल जाता। वर्तमान में प्रशासन जिस तरीके से खड़िया खनन कर बाहरी जिलों में उसे भेजता है उससे महज नेपाली मजदूरों व चंद खेत मालिकों व वाहन चालकों को ही रोजगार मिल रहा है। उद्योग लगने पर बड़े पैमाने पर युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खुल सकते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इन स्थानों पर होता है खड़िया खनन
कांडा, रीमा, दफौट, चौगांवछीना, विजयपुर। 

जिले में 90 खदान हैं स्वीकृत
जिला प्रशासन की संस्तुति पर प्रदेश सरकार ने जिले के विभिन्न स्थानों में 90 खड़िया खदान के पट्टे स्वीकृत किए हैं। जिसमें से लगभग 35 खदानें ही वर्तमान में कार्यरत हैं। शेष खदानों में कार्य बंद है। कार्यरत खदानों से ही सरकार को प्रतिवर्ष 10 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलता है।

उद्योग से रुक सकता है पलायन
जिले में खड़िया पर आधारित उद्योग लगते तो जिले से पलायन पर रोक लगाने मेें मदद मिल सकती थी। जिले से अधिकांश युवा रोजगार के लिए बाहरी जिलों में पलायन करते हैं। वर्तमान खनन प्रक्रिया से सिर्फ मजदूर तबके को ही रोजगार मिल रहा है। शिक्षित व उच्च शिक्षित युवाओं को इससे खास लाभ नहीं हो रहा है।

जिले में खड़िया खनन से सरकार को प्रतिवर्ष 10 करोड़ से अधिक का राजस्व जाता है। खड़िया पर आधारित उद्योग लगाने में जमीन, ट्रांसपोर्टेशन सहित कई व्यवहारिक दिक्कतें हैं। इस कारण उद्योग लगा पाना संभव नहीं हो रहा है। फिर भी सैकड़ों लोगों को खड़िया खनन से रोजगार मिल रहा है। - रवि नेगी, जिला खान अधिकारी बागेश्वर। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed