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आने को तेरे सिर पर है आफत जरा संभल..
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:16 PM IST
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.बागेश्वर में कविता पाठ करते रचनाकार।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रक्टेश्वर सृजन मंच की ओर से यहां हुई मासांत काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
शिक्षक जगदीश दफौटी के निवास पर हुई काव्य गोष्ठी की शुरूआत दीप चंद्र पांडे ने सरस्वती वंदना हे वीणा वादिनी जग जननी.. गाकर की। डॉ. राजीव जोशी ने अपनी कविता आने को तेरे सिर पर है आफत जरा संभल...प्रस्तुत कर लोगों की खूब तालियां बटोरी। इस मौके पर विनोद प्रकाश ने सन्नाटों की सनसन है टूटा हुआ दरपन है..., संजय गुरुरानी ने स्कूल सच में बच्चों के कोमल भावों का..., मीमांक्षा ने मेरी उत्तराखंड की संस्कृति देखी जावा...और डॉ. कुंदन रावत ने कविता ठाड़ उठो सरासरी हंसि आली माठू माठ कविता प्रस्तुत की। अध्यक्षता दीप पांडे और संचालन संजय गुरुरानी ने किया। इस मौके खष्टी गनघरिया, अंजू राज, प्रेम प्रकाश नेचुरल और गोपाल कृष्ण जोशी आदि मौजूद थे।
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शिक्षक जगदीश दफौटी के निवास पर हुई काव्य गोष्ठी की शुरूआत दीप चंद्र पांडे ने सरस्वती वंदना हे वीणा वादिनी जग जननी.. गाकर की। डॉ. राजीव जोशी ने अपनी कविता आने को तेरे सिर पर है आफत जरा संभल...प्रस्तुत कर लोगों की खूब तालियां बटोरी। इस मौके पर विनोद प्रकाश ने सन्नाटों की सनसन है टूटा हुआ दरपन है..., संजय गुरुरानी ने स्कूल सच में बच्चों के कोमल भावों का..., मीमांक्षा ने मेरी उत्तराखंड की संस्कृति देखी जावा...और डॉ. कुंदन रावत ने कविता ठाड़ उठो सरासरी हंसि आली माठू माठ कविता प्रस्तुत की। अध्यक्षता दीप पांडे और संचालन संजय गुरुरानी ने किया। इस मौके खष्टी गनघरिया, अंजू राज, प्रेम प्रकाश नेचुरल और गोपाल कृष्ण जोशी आदि मौजूद थे।