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Bageshwar News: जख्मी दिवाकर को कंधे पर ढोकर आठ किमी दूर सड़क तक पहुंचाया
Sun, 20 Jul 2025 12:02 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 20 Jul 2025 12:02 AM IST
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कपकोट के सोराग से घायल को स्ट्रेचर से सड़क तक ले जाते ग्रामीण। स्रोत- ग्रामीण
कपकोट (बागेश्वर)। सोराग गांव के लिए मोटर मार्ग बनने के बाद भी पिंडर नदी पर पुल नहीं बनने का दंश ग्रामीण झेल रहे हैं। बीमार होने पर लोगों को डोली की मदद से सड़क तक लाना पड़ता है। विगत दिनों एक किशोर के कमर में चोट लगने पर उसे स्ट्रेचर की मदद से आठ किमी दूर सड़क तक लाना पड़ा।
सोराग गांव निवासी 11वीं कक्षा का छात्र दिवाकर दानू (16) विगत बृहस्पतिवार के दिन छत से गिर गया था। इससे उसकी कमर में चोट लग गई। वह उठने और बैठने में असमर्थ हो गया। उसे डोली पर बैठाकर सड़क तक लाना संभव नहीं था। इसलिए ग्रामीण बलवंत सिंह, प्रवीण सिंह, नरेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, सूरज आदि उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर सड़क तक लाए।
लंबी दूरी होने के चलते ग्रामीण उसे कई जगह रोककर लेकर पहुंचे। इस दौरान छात्र दर्द से कराहता रहा। सड़क पर पहुंचाने के बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों के अनुसार किशोर के कमर की हड्डी में फ्रेक्चर है। उसे बेड रेस्ट की सलाह देकर डिस्चार्ज किया गया।
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रेडक्रॉस का स्ट्रेचर आया काम
ग्रामीणों ने बताया कि गांव से मरीज को लाने के लिए डोली का ही प्रयोग किया जाता है। दिवाकर की कमर में चोट के कारण उसे डोली से लाना संभव नहीं था। ऐसे समय में रेडक्रॉस समिति की ओर से दिए गए स्ट्रेचर की काफी मदद मिली। इससे पूर्व भी समिति के दिए स्ट्रेचर की मदद से मरीजों को सड़क तक लाने में मदद मिली।
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सोराग गांव निवासी 11वीं कक्षा का छात्र दिवाकर दानू (16) विगत बृहस्पतिवार के दिन छत से गिर गया था। इससे उसकी कमर में चोट लग गई। वह उठने और बैठने में असमर्थ हो गया। उसे डोली पर बैठाकर सड़क तक लाना संभव नहीं था। इसलिए ग्रामीण बलवंत सिंह, प्रवीण सिंह, नरेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, सूरज आदि उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर सड़क तक लाए।
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लंबी दूरी होने के चलते ग्रामीण उसे कई जगह रोककर लेकर पहुंचे। इस दौरान छात्र दर्द से कराहता रहा। सड़क पर पहुंचाने के बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों के अनुसार किशोर के कमर की हड्डी में फ्रेक्चर है। उसे बेड रेस्ट की सलाह देकर डिस्चार्ज किया गया।
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रेडक्रॉस का स्ट्रेचर आया काम
ग्रामीणों ने बताया कि गांव से मरीज को लाने के लिए डोली का ही प्रयोग किया जाता है। दिवाकर की कमर में चोट के कारण उसे डोली से लाना संभव नहीं था। ऐसे समय में रेडक्रॉस समिति की ओर से दिए गए स्ट्रेचर की काफी मदद मिली। इससे पूर्व भी समिति के दिए स्ट्रेचर की मदद से मरीजों को सड़क तक लाने में मदद मिली।