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आलू की खेती से इंद्र कर रहे लाखों की कमाई
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ागेश्वर। गरुड़ विकासखंड के ह्वीलकुलवान निवासी इंद्र सिंह बिष्ट पिछले 15 वर्ष से आलू की परंपरागत खेती को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वह 50 नाली के खेतों में आलू की खेती करते हैं। आलू उत्पादन के सिरमौर बने बिष्ट हर साल आलू से ही 4.50 लाख रुपये की कमाई कर लेते हैं। वह क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
ह्वीलकुलवान ग्राम पंचायत में आलू की खेती परंपरागत रूप से की जाती है। 15 वर्षों से आलू की खेती कर रहे इंद्र ने इस समय 15 नाली में कुफरी ज्योति प्रजाति के आलू बोए हैं। 35 नाली के खेतों में पहाड़ी आलू का रोपण किया है। बिष्ट बताते हैं कि एक नाली में औसतन छह क्विंटल आलू पैदा हो जाता है। इस तरह उनके खेतों में करीब 300 क्विंटल आलू पैदा होता है। बताते हैं कि प्रति क्विंटल डेढ़ से दो हजार रुपये दाम मिल जाते हैं। आलू गरुड़ के साथ ही हल्द्वानी मंडी में बेचा जाता है। वह पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जी का भी उत्पादन करते हैं। इसके अलावा अदरक और हल्दी की खेती भी करते हैं।
ह्वीलकुलवान में और लोग भी करते हैं सब्जी का उत्पादन
बागेश्वर। ह्वीलकुलवान के साथ ही ग्राम पंचायत के तोक दियागैर, जुग्यानी और कुलवान में भी लोग आलू का उत्पादन करते हैं। ह्वीलकुलवान के प्रगतिशील किसान भुवन सिंह बिष्ट ने 35 नाली भूमि में आलू बोया है। बेमौसमी सब्जी के उत्पादन के लिए उद्यान विभाग के सहयोग से 50 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस का निर्माण कराया है। ग्राम पंचायत के दियागैर में भी तमाम किसानों ने 40 नाली भूमि में आलू बोया है। आलू से इनकी अच्छी आजीविका चल जाती है।
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उद्यान विभाग समय-समय पर किसानों को कीटनाशक, बीज, खाद प्रदान करता है। जिला उद्यान अधिकारी आरके सिंह के सफल संचालन में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं। युवाओं को भी औद्यानिक गतिविधियों से लाभ लेना चाहिए। - विक्रम सिंह प्रभारी उद्यान सचल दल पिंगलो/वज्यूला (गरुड़)
03 बीजीएस 01 पी
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ह्वीलकुलवान ग्राम पंचायत में आलू की खेती परंपरागत रूप से की जाती है। 15 वर्षों से आलू की खेती कर रहे इंद्र ने इस समय 15 नाली में कुफरी ज्योति प्रजाति के आलू बोए हैं। 35 नाली के खेतों में पहाड़ी आलू का रोपण किया है। बिष्ट बताते हैं कि एक नाली में औसतन छह क्विंटल आलू पैदा हो जाता है। इस तरह उनके खेतों में करीब 300 क्विंटल आलू पैदा होता है। बताते हैं कि प्रति क्विंटल डेढ़ से दो हजार रुपये दाम मिल जाते हैं। आलू गरुड़ के साथ ही हल्द्वानी मंडी में बेचा जाता है। वह पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जी का भी उत्पादन करते हैं। इसके अलावा अदरक और हल्दी की खेती भी करते हैं।
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ह्वीलकुलवान में और लोग भी करते हैं सब्जी का उत्पादन
बागेश्वर। ह्वीलकुलवान के साथ ही ग्राम पंचायत के तोक दियागैर, जुग्यानी और कुलवान में भी लोग आलू का उत्पादन करते हैं। ह्वीलकुलवान के प्रगतिशील किसान भुवन सिंह बिष्ट ने 35 नाली भूमि में आलू बोया है। बेमौसमी सब्जी के उत्पादन के लिए उद्यान विभाग के सहयोग से 50 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस का निर्माण कराया है। ग्राम पंचायत के दियागैर में भी तमाम किसानों ने 40 नाली भूमि में आलू बोया है। आलू से इनकी अच्छी आजीविका चल जाती है।
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उद्यान विभाग समय-समय पर किसानों को कीटनाशक, बीज, खाद प्रदान करता है। जिला उद्यान अधिकारी आरके सिंह के सफल संचालन में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं। युवाओं को भी औद्यानिक गतिविधियों से लाभ लेना चाहिए। - विक्रम सिंह प्रभारी उद्यान सचल दल पिंगलो/वज्यूला (गरुड़)
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