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Bageshwar News: हिमालयी गांवों में हंस फाउंडेशन ने पहुंचाया पानी
Mon, 27 Mar 2023 12:46 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 27 Mar 2023 12:46 AM IST
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हंस फाउंडेशन की मदद से हिमालय क्षेत्र के गांव में पानी की समस्या दूर हुई है।
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बागेश्वर। हंस फाउंडेशन की मदद से हिमालय क्षेत्र के गांव में पानी की समस्या दूर हुई है। फाउंडेशन ने तीन साल में 72 छोटी-छोटी पेयजल योजनाओं का निर्माण किया है। इनसे लोगों को घर-घर पानी मिल रहा है।
फाउंडेशन ने वर्ष 2020 से 2022 तक बदियाकोट, कालो, किलपारा, बाछम, तीख, सोराग, बोरबलड़ा, खाती गांव में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से 72 पेयजल योजनाओं का निर्माण किया। हिमालयी क्षेत्र के गांवों में प्रचुर पानी होने के बाद भी योजनाएं न बनने से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। लोग प्राकृतिक स्रोत, जलधारों से पानी की आपूर्ति करते थे। फाउंडेशन ने हिमालयी क्षेत्र के गांवों की पेयजल दिक्कत को देखते हुए छोटी-छोटी योजनाएं बनाकर घर-घर तक पानी पहुंचाया।
दुर्गम गांव के हर घर में की रोशनी
बागेश्वर। हंस फाउंडेशन ने खाती, बाछम, कुंवारी, बोरबलड़ा गांव में 350 सोलर लाइट लगाईं हैं। प्रत्येक परिवार के घर में तीन बल्ब जलाने की सुविधा प्रदान की। इससे इन घरों में उजाला हुआ। फाउंडेशन के कंसलटेंट एनबी अवस्थी ने बताया कि बदियाकोट की खराब पड़ी छोटी पनबिजली परियोजना को बारह लाख रुपये की लागत से सुधारा गया। अब इन गांवों को लगातार बिजली मिल रही है।
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फाउंडेशन ने वर्ष 2020 से 2022 तक बदियाकोट, कालो, किलपारा, बाछम, तीख, सोराग, बोरबलड़ा, खाती गांव में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से 72 पेयजल योजनाओं का निर्माण किया। हिमालयी क्षेत्र के गांवों में प्रचुर पानी होने के बाद भी योजनाएं न बनने से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। लोग प्राकृतिक स्रोत, जलधारों से पानी की आपूर्ति करते थे। फाउंडेशन ने हिमालयी क्षेत्र के गांवों की पेयजल दिक्कत को देखते हुए छोटी-छोटी योजनाएं बनाकर घर-घर तक पानी पहुंचाया।
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दुर्गम गांव के हर घर में की रोशनी
बागेश्वर। हंस फाउंडेशन ने खाती, बाछम, कुंवारी, बोरबलड़ा गांव में 350 सोलर लाइट लगाईं हैं। प्रत्येक परिवार के घर में तीन बल्ब जलाने की सुविधा प्रदान की। इससे इन घरों में उजाला हुआ। फाउंडेशन के कंसलटेंट एनबी अवस्थी ने बताया कि बदियाकोट की खराब पड़ी छोटी पनबिजली परियोजना को बारह लाख रुपये की लागत से सुधारा गया। अब इन गांवों को लगातार बिजली मिल रही है।
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