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एलोपैथिक अस्पताल में ताला लटका मिला
Tue, 18 Dec 2018 11:28 PM IST
Almora desk
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Published by: Almora desk
Updated Tue, 18 Dec 2018 11:28 PM IST
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राऐपै चिकित्सालय के दरवाजों पर लगे ताले।
- फोटो : अमर उजाला
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कपकोट विकास खंड के सुदूरवर्ती राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय लाहुर में कार्यरत डाक्टर पिछले तीन महीने से अनुपस्थित चल रहे हैं। मंगलवार को अस्पताल में ताला लटका मिला। वर्तमान में यह अस्पताल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। उनके अवकाश पर जाने व विभागीय कार्य से बाहर जाने पर अस्पताल बंद रखना मजबूरी हो जाती है। डॉक्टर न होने से ग्रामीणों को उपचार के लिए 24 किमी दूर तहसील मुख्यालय की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लाहुर गांव की जनसंख्या 1100 के करीब है। गांव में अस्पताल खुलवाने के लिए ग्रामीणों ने पहले खासी मशक्कत की थी। लाहुर के अलावा मिकिला और खल्पट्टा समेत अन्य गांवों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। विगत कुछ समय से व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। यहां तैनात डाक्टर गत सितंबर महीने से नहीं है। बार्ड ब्वाय दो महीने पहले रिटायर हो गया था तब से यह पद भी खाली है। पर्यावरणमित्र का काफी समय पहले कमेड़ीदेवी तबादला हो गया था तब से उसके स्थान पर कोई प्रतिस्थानी नहीं आया है। मंगलवार को अस्पताल में दिन भर ताला लटका रहा।
उपचार के लिए 24 किमी दूर जाना मजबूरी
ग्रामीण खीम सिंह पांडा कहते हैं कि डॉक्टर न होने से लोगों को उपचार के लिए 24 किमी दूर भराड़ी या कपकोट जाना पड़ता है।
अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलते
ईश्वर सिंह कहते हैं अस्पताल में इलाज के लिए जब भी जाते हैं डाक्टर नहीं मिलते हैं। सरकार को अस्पताल का सच जानने की कोशिश करनी चाहिए।
अशक्त लोगों को उठानी पड़ रही हैं दिक्कतें
शांति देवी का कहना है कि अस्पताल में डाक्टर नहीं होने से अशक्त लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिन घरों में बुजुर्ग अकेले रहते हैं। उनके लिए दवा कौन लाए यह बड़ी समस्या हो गई है।
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शुरू से हो रही है उपेक्षा
चंपा देवी का कहना है कि सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थापित अस्पताल की शुरू से ही उपेक्षा हो रही है। अस्पताल में डाक्टर समेत अन्य कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। अन्यथा आंदोलन को मजबूर होना पड़ेेगा।
कोट...........
-राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय लाहुर में तैनात डाक्टर गत सितंबर माह से अनुपस्थित चल रहे हैं। सूचना सीएमओ को भेजी गई है। सोमवार को फार्मेसिस्ट विभागीय बैठक में आए थे। मंगलवार को वह अवकाश पर थे। फार्मेसिस्ट को अस्पताल नियमित खोलने के निर्देश दिए गए हैं। -बीएस रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी कपकोट।
-अस्पताल में ताला लगना गंभीर मामला है। जिलाधिकारी को मामले की शीघ्र जांच कराने को कहा जाएगा। सीएमओ को अस्पतालों का समय-समय पर मौका मुआयना करने को कहा गया है। अस्पताल की अन्य समस्याओं के समाधान के प्रयास किए जाएंगे।- बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।
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ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लाहुर गांव की जनसंख्या 1100 के करीब है। गांव में अस्पताल खुलवाने के लिए ग्रामीणों ने पहले खासी मशक्कत की थी। लाहुर के अलावा मिकिला और खल्पट्टा समेत अन्य गांवों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। विगत कुछ समय से व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। यहां तैनात डाक्टर गत सितंबर महीने से नहीं है। बार्ड ब्वाय दो महीने पहले रिटायर हो गया था तब से यह पद भी खाली है। पर्यावरणमित्र का काफी समय पहले कमेड़ीदेवी तबादला हो गया था तब से उसके स्थान पर कोई प्रतिस्थानी नहीं आया है। मंगलवार को अस्पताल में दिन भर ताला लटका रहा।
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उपचार के लिए 24 किमी दूर जाना मजबूरी
ग्रामीण खीम सिंह पांडा कहते हैं कि डॉक्टर न होने से लोगों को उपचार के लिए 24 किमी दूर भराड़ी या कपकोट जाना पड़ता है।
अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलते
ईश्वर सिंह कहते हैं अस्पताल में इलाज के लिए जब भी जाते हैं डाक्टर नहीं मिलते हैं। सरकार को अस्पताल का सच जानने की कोशिश करनी चाहिए।
अशक्त लोगों को उठानी पड़ रही हैं दिक्कतें
शांति देवी का कहना है कि अस्पताल में डाक्टर नहीं होने से अशक्त लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिन घरों में बुजुर्ग अकेले रहते हैं। उनके लिए दवा कौन लाए यह बड़ी समस्या हो गई है।
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शुरू से हो रही है उपेक्षा
चंपा देवी का कहना है कि सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थापित अस्पताल की शुरू से ही उपेक्षा हो रही है। अस्पताल में डाक्टर समेत अन्य कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। अन्यथा आंदोलन को मजबूर होना पड़ेेगा।
कोट...........
-राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय लाहुर में तैनात डाक्टर गत सितंबर माह से अनुपस्थित चल रहे हैं। सूचना सीएमओ को भेजी गई है। सोमवार को फार्मेसिस्ट विभागीय बैठक में आए थे। मंगलवार को वह अवकाश पर थे। फार्मेसिस्ट को अस्पताल नियमित खोलने के निर्देश दिए गए हैं। -बीएस रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी कपकोट।
-अस्पताल में ताला लगना गंभीर मामला है। जिलाधिकारी को मामले की शीघ्र जांच कराने को कहा जाएगा। सीएमओ को अस्पतालों का समय-समय पर मौका मुआयना करने को कहा गया है। अस्पताल की अन्य समस्याओं के समाधान के प्रयास किए जाएंगे।- बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।