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गरुड़ ब्लॉक हुआ कैशलेस
आनंद बिष्ट/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Tue, 10 Jan 2017 11:59 PM IST
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गरुड़ ब्लॉक हुआ कैशलेस
- फोटो : अमर उजाला
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गरुड़ (बागेश्वर)। गरुड़ ब्लॉक सूबे का पहला विकास खंड बन गया है, जिसमें निर्माण कार्यों के सभी भुगतान कैशलेस सिस्टम से होने लगे हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान सीधे मजदूरों और सामग्री अंश का भुगतान रजिस्टर्ड फर्मों के खातों में पड़ने से फर्जी मस्टर रोल की पुरानी शिकायत समाप्त हो जाएगी।
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ग्राम्य विकास विभाग की कार्यदायी संस्था क्षेत्र पंचायत है। इसमें क्षेत्र पंचायत निधि और राज्य वित्त के निर्माण कार्य मस्टर रोल प्रणाली से हो रहे थे। इसके भुगतान में कई बार फर्जी मस्टर रोल की शिकायतें अक्सर आती थी। कार्यदायी संस्था स्वीकृत निर्माण कार्यों का वर्क ऑर्डर पहले वीडीओ के पद नाम से जारी करती थी लेकिन अब जिला प्रशासन हर स्तर पर कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा दे रहा है।
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डीएम के निर्देश पर ब्लॉक कार्यालय राज्य वित्त, क्षेत्र पंचायत के सभी निर्माण कार्यों का भुगतान मजदूरों के खातों में जमा करवा रहा है जबकि सामग्री अंश का भुगतान रजिस्टर्ड फर्मों को किया जा रहा है, हालांकि नवंबर प्रथम सप्ताह तक क्षेत्र पंचायत निर्माण कार्य के भुगतान का चेक संबंधित ग्राम पंचायत के पद नाम से काटती थी लेकिन रिजर्व बैंक के निर्देश पर एक खाते से सप्ताह में मात्र 24 हजार धन निकासी की सीमा के कारण वीडीओ बैंकों से निमाण कार्य का धन नहीं निकाल पा रहे थे।
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इसलिए डीएम मंगेश घिल्डियाल ने क्षेत्र पंचायत कपकोट, बागेेश्वर, जिला पंचायत से निर्माण कार्यों का भुगतान कैशलेस सिस्टम से करने के निर्देश दिए है। ताकि मजदूरों को मजदूरी का भुगतान समय पर हो सके। इसी कारण सभी ग्राम पंचायतों से मजदूरी का भुगतान मजदूरों के खातों में जमा करवाने से पूरा ब्लॉक कैशलेस हो गया है।
गरुड़ (बागेश्वर)। कार्यदायी संस्था क्षेत्र पंचायत पहले क्षेत्र पंचायत निधि और राज्य वित्त के कार्यों का कार्यादेश संबंधित ग्राम पंचायत के वीडीओ के नाम जारी करती थी। क्षेत्र पंचायत सदस्य अपने निर्वाचन क्षेत्र में निर्माण कार्य बतौर मेट बनाया जाता था।
इसके भुगतान के लिए क्षेत्र पंचायत वीडीओ के पद नाम से चेक काटती थी। वीडीओ बैंक से भुगतान लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य को सौंपता था। ब्लॉक प्रमुख भरत फर्स्वाण, ज्येष्ठ ब्लॉक उपप्रमुख जगदीश कुनियाल, कनिष्ठ उपप्रमुख प्रकाश कोहली आदि का कहना है कि कैशलेस सिस्टम से दूरदराज के गांवों निर्माण कार्य संपादित कराने में दिक्कतें आ रही हैं।
गरुड़ (बागेश्वर)। साल भर में करोड़ों रुपए का निर्माण कार्य मस्टर रोल प्रणाली से कराने वाली संस्था जिला पंचायत पर नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। मजदूरी का भुगतान न होने से विधायक निधि के गैंग मेट आए दिन जिला पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। भुगतान न होने पर अधिकतर कार्यकर्ताओं ने निधि के कार्य रोक दिए हैं।
बागेश्वर के विधायक चंदन दास, कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण के विधायक निधि लाखों के रुपए के निर्माण कार्यों की कार्यदायी संस्था जिला पंचायत है। सभी निर्माण कार्य मस्टर रोल प्रणाली से चल रहे हैं लेकिन तीन माह से जिला पंचायत का भुगतान नहीं कर पा रही है।
इसमें एक खाते से सप्ताहभर में मात्र 24 हजार रुपए निकासी की सीमा के कारण विधायक निधि का भुगतान भी नहीं हो सका है। जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने बताया कि पंचायत में विधायक निधि, राज्य वित्त के तीन लाख रुपए तक के निर्माण कार्य मस्टर रोल प्रणाली से होते हैं लेकिन नोटबंदी के दौर में कैसलेश प्रणाली से पंचायत के निर्माण कार्यों पर बुरा असर पड़ा है जबकि तीन दिन बाद उत्तरायणी का मेला शुरू होने वाला है।