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नहीं रहे पूर्व मंत्री राम प्रसाद टम्टा
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पूर्व मंत्री राम प्रसाद टम्टा। फाइल फोटो
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। पूर्व कैबिनेट मंत्री भाजपा के वरिष्ठ नेता राम प्रसाद टम्टा का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। टम्टा दो बार बागेश्वर के विधायक रहे थे।
टम्टा की बृहस्पतिवार को अचानक तबियत खराब हो गई थी। परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए। शुक्रवार को परिजन उन्हें बागेश्वर स्थित घर ले आए। रात में तबियत बिगड़ने पर उन्हें हल्द्वानी ले जाया गया। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती किया, उसके बाद हल्द्वानी के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। शनिवार की सुबह उनका निधन हो गया।
टम्टा वर्ष 1993 में पहली बार बागेश्वर सीट से विधायक चुने गए। राज्य गठन के बाद हुए पहले चुनाव में वह बागेश्वर सीट से एक बार फिर विधायक चुने गए। एनडी तिवारी सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे। वर्ष 2007 और 2012 का चुनाव वह हार गए। टम्टा वर्ष 1971 से कांग्रेस से जुड़े थे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर टम्टा ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
टम्टा इतना सादगी भरा जीवन जीते थे कि रोडवेज की बस में सफर करते थे। बागेश्वर में उनके चाहने वालों की कमी नहीं थी। वे अब भी लगातार राजनीति में सक्रिय रहते थे। भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति रहती थी। टम्टा के निधन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, सांसद अजय टम्टा, परिवहन मंत्री चंदन राम दास, भाजपा जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, भाजपा के खरही मंडल अध्यक्ष रवि करायत समेत तमाम लोगों ने दुख व्यक्त किया है। सभी ने कहा है कि टम्टा के निधन से बागेश्वर की राजनीति में एक शून्यता आ गई है, जिसकी पूर्ति संभव नहीं है। टम्टा अपने पत्नी मुन्नी देवी, पीछे दो पुत्र, दो पुत्रियों और नाती, पोतों से भरा परिवार छोड़ गए हैं। बागेश्वर के श्मशान घाट में रविवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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टम्टा की बृहस्पतिवार को अचानक तबियत खराब हो गई थी। परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए। शुक्रवार को परिजन उन्हें बागेश्वर स्थित घर ले आए। रात में तबियत बिगड़ने पर उन्हें हल्द्वानी ले जाया गया। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती किया, उसके बाद हल्द्वानी के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। शनिवार की सुबह उनका निधन हो गया।
टम्टा वर्ष 1993 में पहली बार बागेश्वर सीट से विधायक चुने गए। राज्य गठन के बाद हुए पहले चुनाव में वह बागेश्वर सीट से एक बार फिर विधायक चुने गए। एनडी तिवारी सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे। वर्ष 2007 और 2012 का चुनाव वह हार गए। टम्टा वर्ष 1971 से कांग्रेस से जुड़े थे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर टम्टा ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
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टम्टा इतना सादगी भरा जीवन जीते थे कि रोडवेज की बस में सफर करते थे। बागेश्वर में उनके चाहने वालों की कमी नहीं थी। वे अब भी लगातार राजनीति में सक्रिय रहते थे। भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति रहती थी। टम्टा के निधन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, सांसद अजय टम्टा, परिवहन मंत्री चंदन राम दास, भाजपा जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, भाजपा के खरही मंडल अध्यक्ष रवि करायत समेत तमाम लोगों ने दुख व्यक्त किया है। सभी ने कहा है कि टम्टा के निधन से बागेश्वर की राजनीति में एक शून्यता आ गई है, जिसकी पूर्ति संभव नहीं है। टम्टा अपने पत्नी मुन्नी देवी, पीछे दो पुत्र, दो पुत्रियों और नाती, पोतों से भरा परिवार छोड़ गए हैं। बागेश्वर के श्मशान घाट में रविवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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